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Meerut News: सील खुलने के बाद लोगों ने खुद शुरु किया ध्वस्तीकरण
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रंगोली मंडप, सेन फोर्ड अस्पताल समेत तमाम संपत्तियों में काम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में अब तमाम संपत्तियों से सामान निकालने के साथ ही ध्वस्तीकरण भी आवंटियों ने शुरू कर दिया है। परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 8 अप्रैल को 44 संपत्तियां सील कर दी थीं। इन आवासीय भवनों में पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधियां हो रही थीं। आवासीय भवनों में पूर्ण व्यावसायिक प्रयोग पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश 14 जुलाई को दिया था। इसी के तहत परिषद की ओर से इन संपत्तियों का सर्वे किया गया था। संपत्ति स्वामियों को नोटिस जारी कर 15 दिन में इनके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हुए हैं।
सेंट्रल मार्केट सेक्टर-2 तथा गोल मंदिर के पास सेक्टर-3, 4 के चौराहे पर महिलाएं धरने पर बैठी हुई हैं। धरने देते हुए सौ दिन से भी अधिक का समय बीत चुका है। महिलाओं की मांग है कि उन्हें रोजगार व घर देने के प्रस्ताव पर जो अफसरों से बात हुई है, उसे लिखित में दें।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने ईडब्लूएस मकानों में भी सेट बैक छोड़ने के आदेश दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि महज चार इंच की दीवार पर मकान बने हैं, इनमें सेट बैक छोड़ा जाता है तो मकान गिर जाएंगे। आवास विकास परिषद की ओर से लगातार कई बार महिला और व्यापारियों के साथ कार्यालय में कई दौर की वार्ता हो चुकी है।
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महिलाएं और व्यापारियों ने प्रति व्यापारी हर महीने गुजर-बसर के लिए 50 हजार रुपये देने और निशुल्क दुकानें देने की मांग की है। अब मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी के मेरठ आने के बाद उनके समक्ष ये प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव पर मंजूरी के बाद ईडब्लूएस मकानों का पुनर्निर्माण होगा।
वहीं, परिषद द्वारा ध्वस्तीकरण के लिए भवनों की सील खोलने के बाद से अब लगातार काम शुरू हो गया है। इन भवनों में खुद आवंटी और दुकानदार सामान निकालकर ध्वस्तीकरण करा रहे हैं।
शनिवार को रंगोली मंडप, डॉ. सुधा अस्पताल, सेन फोर्ड अस्पताल में से सामान निकालकर खुद ही ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया। इसी के साथ पूर्व विधायक विनोद हरित भी सेंट्रल मार्केट में अपने व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में सेट बैक छोड़ने के लिए निर्माण तुड़वा रहे हैं। पूरे बाजार में लगातार घन, हथौड़े और ड्रिल मशीनों का शोर गूंज रहा है।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में अब तमाम संपत्तियों से सामान निकालने के साथ ही ध्वस्तीकरण भी आवंटियों ने शुरू कर दिया है। परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 8 अप्रैल को 44 संपत्तियां सील कर दी थीं। इन आवासीय भवनों में पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधियां हो रही थीं। आवासीय भवनों में पूर्ण व्यावसायिक प्रयोग पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश 14 जुलाई को दिया था। इसी के तहत परिषद की ओर से इन संपत्तियों का सर्वे किया गया था। संपत्ति स्वामियों को नोटिस जारी कर 15 दिन में इनके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हुए हैं।
सेंट्रल मार्केट सेक्टर-2 तथा गोल मंदिर के पास सेक्टर-3, 4 के चौराहे पर महिलाएं धरने पर बैठी हुई हैं। धरने देते हुए सौ दिन से भी अधिक का समय बीत चुका है। महिलाओं की मांग है कि उन्हें रोजगार व घर देने के प्रस्ताव पर जो अफसरों से बात हुई है, उसे लिखित में दें।
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दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने ईडब्लूएस मकानों में भी सेट बैक छोड़ने के आदेश दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि महज चार इंच की दीवार पर मकान बने हैं, इनमें सेट बैक छोड़ा जाता है तो मकान गिर जाएंगे। आवास विकास परिषद की ओर से लगातार कई बार महिला और व्यापारियों के साथ कार्यालय में कई दौर की वार्ता हो चुकी है।
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महिलाएं और व्यापारियों ने प्रति व्यापारी हर महीने गुजर-बसर के लिए 50 हजार रुपये देने और निशुल्क दुकानें देने की मांग की है। अब मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी के मेरठ आने के बाद उनके समक्ष ये प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव पर मंजूरी के बाद ईडब्लूएस मकानों का पुनर्निर्माण होगा।
वहीं, परिषद द्वारा ध्वस्तीकरण के लिए भवनों की सील खोलने के बाद से अब लगातार काम शुरू हो गया है। इन भवनों में खुद आवंटी और दुकानदार सामान निकालकर ध्वस्तीकरण करा रहे हैं।
शनिवार को रंगोली मंडप, डॉ. सुधा अस्पताल, सेन फोर्ड अस्पताल में से सामान निकालकर खुद ही ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया। इसी के साथ पूर्व विधायक विनोद हरित भी सेंट्रल मार्केट में अपने व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में सेट बैक छोड़ने के लिए निर्माण तुड़वा रहे हैं। पूरे बाजार में लगातार घन, हथौड़े और ड्रिल मशीनों का शोर गूंज रहा है।