{"_id":"6a4657badcd907797e0a026c","slug":"demand-for-re-consolidation-of-land-holdings-in-jalalpur-jora-meerut-news-c-228-1-mwn1001-105085-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: जलालपुर जोरा में दोबारा चकबंदी कराने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: जलालपुर जोरा में दोबारा चकबंदी कराने की मांग
विज्ञापन
- किसान ने मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव जलालपुर जोरा निवासी नरेंद्र कुमार ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर गांव में चकबंदी प्रक्रिया दोबारा शुरू कराने, धारा-6 के तहत बंद की गई कार्रवाई की उच्च स्तरीय जांच कराने और अवैध कब्जे हटवाने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया कि गांव में वर्ष 2014 से 2023 तक चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी और कब्जा परिवर्तन का कार्य भी जारी था। आरोप है कि वर्ष 2023 में कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में अधिकारियों ने धारा-6 लागू कर चकबंदी प्रक्रिया बंद कर दी, जिससे वर्षों से चल रहा कार्य अधूरा रह गया।
शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार का कहना है कि चकबंदी नहीं होने के कारण किसानों की भूमि कई स्थानों पर बंटी हुई है, जिससे खेती करना कठिन हो गया है। साथ ही सरकारी एवं निजी भूमि पर अवैध कब्जों के कारण भूमि विवाद लगातार बढ़ रहे हैं। ज्ञापन में दावा किया कि गांव में मारपीट, गोलीबारी, झगड़े और आत्महत्या जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। गांव के अधिकांश किसान चकबंदी के पक्ष में हैं।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, धारा-6 निरस्त कर गांव में चकबंदी का कार्य दोबारा शुरू कराया जाए, अवैध कब्जे हटवाए जाएं तथा चकबंदी पूरी होने तक गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर गांव में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जिस कानून व्यवस्था प्रभावित होगी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। क्षेत्र के गांव जलालपुर जोरा निवासी नरेंद्र कुमार ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र भेजकर गांव में चकबंदी प्रक्रिया दोबारा शुरू कराने, धारा-6 के तहत बंद की गई कार्रवाई की उच्च स्तरीय जांच कराने और अवैध कब्जे हटवाने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया कि गांव में वर्ष 2014 से 2023 तक चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी और कब्जा परिवर्तन का कार्य भी जारी था। आरोप है कि वर्ष 2023 में कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में अधिकारियों ने धारा-6 लागू कर चकबंदी प्रक्रिया बंद कर दी, जिससे वर्षों से चल रहा कार्य अधूरा रह गया।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार का कहना है कि चकबंदी नहीं होने के कारण किसानों की भूमि कई स्थानों पर बंटी हुई है, जिससे खेती करना कठिन हो गया है। साथ ही सरकारी एवं निजी भूमि पर अवैध कब्जों के कारण भूमि विवाद लगातार बढ़ रहे हैं। ज्ञापन में दावा किया कि गांव में मारपीट, गोलीबारी, झगड़े और आत्महत्या जैसी घटनाएं बढ़ी हैं। गांव के अधिकांश किसान चकबंदी के पक्ष में हैं।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, धारा-6 निरस्त कर गांव में चकबंदी का कार्य दोबारा शुरू कराया जाए, अवैध कब्जे हटवाए जाएं तथा चकबंदी पूरी होने तक गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर गांव में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जिस कानून व्यवस्था प्रभावित होगी।