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बुराड़ी कांड से मिलती है अरोड़ा फैमिली की मिस्ट्री, पांच मौतों का राज आज तक रहस्य

Fri, 06 Jul 2018 09:14 PM IST
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 06 Jul 2018 09:14 PM IST
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Delhi burari kand has again refreshed the case of these five mass deaths
मर्डर केस - फोटो : अमर उजाला

बुराड़ी दिल्ली के भुवनेश भाटिया परिवार के 11 लोगों की मौतों ने टीपी नगर के रघुकुल विहार में विनीत अरोड़ा फैमिली के पांच सदस्यों की सामूहिक मौतों का प्रकरण ताजा कर दिया है। ये दोनों मिस्ट्री कहीं न कहीं आपस में मिलती हैं तो शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती है। सबसे खास बात यह है कि दोनों ही परिवारों ने पूजा पाठ के बाद जान दी। इस व्यापारी परिवार के परिजन इसे हत्या तो पुलिस आत्महत्या मानती रही। लेकिन करीब 21 महीने के बाद भी न तो अभी तक फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आ पाई और न ही पुलिस की जांच किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंची। 

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दरअसल जैसा बुराड़ी के 11 लोगों की मौत का मामला तंत्रमंत्र के इर्दगिर्द घूम रहा है, ठीक उसी तरह मेरठ के इस व्यापारी परिवार की मौतों के पीछे भी तंत्रमंत्र की भी खूब चर्चा चली थी। जांच के ऐसे बिंदु कहीं न कहीं इन दोनों केसों में समानता लिए हैं, जो इन चर्चाओं को बल देते हैं। उस समय मामला बेहद गंभीर था। फोरेंसिक लैब में जांच के लिए सैंपल भेजे गए थे। लेकिन पुलिस इस दिशा में दो कदम भी नहीं चली। इस कॉलोनी और शहर के लोगों के जेहन में सवाल उठते कि आखिर इस परिवार के साथ क्या हुआ था। इसकी चार्जशीट तक कोर्ट में दाखिल नहीं हुई।
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सात अक्तूबर 2016
दिन शुक्रवार और समय सुबह के आठ बजे थे। रोजाना की तरह ड्राइवर प्रमोद फैक्ट्री मालिक विनीत अरोड़ा के घर रघुकुल विहार कॉलोनी पहुंचा। विनीत अरोड़ा एयर फिल्टर के बड़े डिस्ट्रीब्यूटर थे। प्रमोद दरवाजे पर घंटी बजाता रहा। लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था। ड्राइवर को परेशान देखकर पड़ोसी अनुज आया। अनहोनी का अंदेशा जताकर अनुज ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा। अंदर का भयावह नजारा देखकर सबके होश उड़ गए। व्यापारी विनीत अरोड़ा (40), उनकी पत्नी पूजा (38), बेटा अभिषेक (16) और मां कृष्णा (65) के शव एक ही लाइन में फांसी पर लटके थे। उनके हाथों की नसें कटी थीं, जिनसे खून टपक रहा था। विनीत के पिता मोहन अरोरा (70) का शव बेड पर दूसरे कमरे पर पड़ा था। जिन्होंने जहर का सेवन किया था।
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क्या हुआ था इस परिवार के साथ

Delhi burari kand has again refreshed the case of these five mass deaths
यूपी पुलिस

बागपत रोड पर टीपीनगर थाने से सटी रघुकुल विहार कॉलोनी में इस हंसते खेलते व्यापारी परिवार के साथ क्या हुआ, यह सवाल आज भी लोगों के जेहन में कांटे की तरह चुभ रहा है। रिश्तेदार दावा करते हैं कि परिवार के लोग आत्महत्या नहीं कर सकते। लेकिन पांच लोगों की सामूहिक मौत जैसे मामले की भी टीपी नगर पुलिस ने गंभीरता से जांच नहीं की। साथ ही इस केस को आत्महत्या का रूप देने में कसर नहीं छोड़ी। चौतरफा आक्रोश होने पर पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जिसमें मोहन अरोरा के शव का बिसरा सुरक्षित रखा गया। जबकि अन्य परिवार के चारों लोगों के शरीर के सैंपल लेकर फोरेंसिक लैब के लिए भेजे गए। लेकिन पुलिस की जांच की नतीजा सिफर रहा। 

न रिपोर्ट आई और न चार्जशीट लगी
इस मामले में पुलिस ने न तो आगरा से फोरेंसिक लैब से जांच रिपोर्ट लाना मुनासिब समझा और न अभी चार्जशीट दाखिल की। पुलिस ने इस मामले में कोई जांच तक नहीं की। मकान से बरामद चार पन्नों के सुसाइड नोट का मिलान तक नहीं कराया गया। लोगों का कहना है कि अगर दिल्ली पुलिस बुराडी कांड के रहस्य का खुलासा कर दे तो शायद मेरठ पुलिस की भी नींद टूट जाए। जबकि इस परिवार के रिश्तेदारों ने मामले को हत्या बताकर पुलिस के अधिकारियों से जांच कराने की मांग की थी। बावजूद पुलिस ने कुछ नहीं किया। यह हाल तो तब है, जब इस घटना की जांच करने आईजी जोन मौके पर गए थे।

हवन के बाद हुई थी मौत

दिल्ली बुराड़ी कांड में चर्चा है कि परिवार ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए ऐसा कदम उठाया। ठीक इसी तरह मेरठ में भी विनीत अरोरा की फैमिली ने किया था। क्योंकि घटनास्थल के मुआयने के दौरान घर पर हवन की राख मिली थी। जिससे अंदेशा लगाया जा रहा था कि परिवार के पांच लोगों की मौत से पूर्व घर में हवन हुआ। सवाल उठता है कि टीपीनगर में व्यापारी फैमिली ने भी मोक्ष प्राप्त करने या किसी अंधविश्वास के बहकावे में ऐसा जोखिम कदम उठाया था। लोगों में चर्चा कि दिल्ली और मेरठ कांड की पटकथा एक जैसी है। चर्चा यहां तक भी है कि कहीं दोनों परिवार को भ्रमित करने वाला कोई एक ही शख्स तो नहीं है। क्योंकि मौत का तरीका दोनों में लगभग एक जैसा ही इस्तेमाल कराया गया है।

कर्ज लेने कोई नहीं आया
विनीत अरोरा के घर से मिला सुसाइड नोट अंग्रेजी में था। समूचा परिवार पढ़ा लिखा और संपन्न था। विनीत के भाई और उसकी पत्नी पूजा की फैमिली भी संपन्न है। बरामद सुसाइड नोट में लिखा था कि उनके ऊपर मोटा कर्ज हो गया है, जिसके चलते वह परिवार के साथ जान दे रहे हैं। जबकि ऐसा बाद में कुछ सामने नहीं आया। किसी ने उनके परिवार या रिश्तेदारों से भी संपर्क नहीं किया कि विनीत पर उनका मोटा पैसा है। पुलिस जांच में भी स्पष्ट हो गया था कि विनीत पर बिजनेस के मुताबिक ही कर्जा है। जिससे उनका लेनदेन चलता था। कोई बड़े कर्ज की बात सामने नहीं आई।

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