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कब्रिस्तान में मौत का जखीरा

Sun, 06 Oct 2019 02:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2019 02:36 AM IST
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Death Goods Factory in the cemetery the cisterns in the fake grave
कब्रिस्तान में मौत के सामान की फैक्टरी... फर्जी कब्र में तमंचे
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मेरठ। घरों, तहखानों, जंगलों के बाद अब परीक्षितगढ़ के खजूरी गांव के कब्रिस्तान में तमंचा फैक्टरी का पर्दाफाश हुआ है। एक फर्जी कब्र से काफी मात्रा में तमंचे और अधबने तमंचे भी बरामद हुए हैं। इन तमंचों को ऑन डिमांड बनाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, शामली, गाजियाबाद आदि जिलों में सप्लाई किया जाता था।
एसपी देहात अविनाश पांडेय ने शनिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि खजूरी गांव के कब्रिस्तान में रात को संदिग्ध लोगों की आवाजाही रहती है। पड़ताल के बाद शुक्रवार रात सीओ सदर देहात अखिलेश भदौरिया और एसओ परीक्षितगढ़ कैलाशचंद ने कब्रिस्तान में छापा मारकर जांच की जो सामने आया कि कब्रिस्तान में ही तमंचे बनाए जा रहे थे। पुलिस ने भूरा पुत्र खुर्शीद निवासी खजूरी और हारून पुत्र मुंशी निवासी अहमदनगर बढ़ला थाना परीक्षितगढ़ को गिरफ्तार कर लिया।
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फर्जी कब्र में मौत का सामान
एसपी देहात के अनुसार कब्रिस्तान में तमंचे बनाने का पूरा सेटअप लगा मिला। पूरी फैक्टरी एक फर्जी कब्र के आसपास ही संचालित हो रही थी। इस फर्जी कब्र के पास पंखा भट्ठी लगी थी। मौके से तमंचे बनाने के उपकरणों में नाल, ट्रिगर, 45 पिन आदि सामान बरामद किया गया। फर्जी कब्र की तलाशी ली गई तो उसमें 13 तैयार तमंचे, एक बंदूक और 50 अधबने तमंचे मिले। आरोपियों ने बताया कि वे तमंचे बनाने के बाद सारा सामान फर्जी कब्र में पॉलीथिन में पैक करके रख देते थे और ऊपर से मिट्टी कर देते थे, ताकि किसी को शक न हो।
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नौ साल से बना रहा तमंचे
इस फैक्टरी के सरगना भूरा ने बताया कि वह साल 2010 से तमंचे बनाते आ रहा था। उस पर परीक्षितगढ़, मुंडाली, भावनपुर थाने में 13 मुकदमे दर्ज हैं। हारून के खिलाफ परीक्षितगढ़ और सदर बाजार में सात मामले दर्ज हैं। भूरा जेल भी गया और वहां से छूटकर काफी समय मुजफ्फरनगर में रहा था। एसपी के अनुसार इन तमंचों को दूसरे जिलों में सप्लाई करने वाली की तलाश में दबिश दी जा रही है।
एक दिन में चार तमंचे, एक 1500 का
सरगना भूरा के अनुसार वे एक रात में तीन-चार तमंचे बना लेते थे। एक तमंचा बनाने में 500-700 रुपये की लागत आती है। जबकि वह 1500 रुपये बिकता है। कब्रिस्तान में तमंचा बनाने के बाद दिन निकलने से पहले ही वह तैयार तमंचे घर ले जाता था। उसकी पत्नी को इस धंधे का पता है।

हो चुके पहले भी खुलासे
इससे पहले लिसाड़ी गेट क्षेत्र के एक घर में तहखाने में मुंगेर के कारीगरों द्वारा पिस्टल और तमंचे बनाने का खुलासा दिल्ली पुलिस कर स्पेशल सेल छापा मारकर कर चुकी है। यहां से भारी मात्रा में पिस्टल और तमंचे बरामद हुए थे। वहीं, देहात क्षेत्र में किराए के घरों में, घरों के तहखानों में और जंगलों में तमंचा फैक्टरियों का कई बार भंडाफोड़ हो चुका है।
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