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दशलक्षण पर्व: धर्मनगरी बड़ौत के पंच कल्याणक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत कई हस्तियां में हो चुकी हैं शामिल

Wed, 31 Aug 2022 04:13 PM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
मुकेश पंवार, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 31 Aug 2022 04:13 PM IST
सार

धार्मिक गतिविधियों से बागपत की धर्मनगरी बड़ौत का गहरा नाता रहा है। 1931 में आचार्य शांति सागर महाराज व 1965 में आचार्य विद्यानंद महाराज पर पुष्प वर्षा हेलीकाप्टर से हुई थी। धर्मनगरी बड़ौत में जैन धर्म से जुडे़ 11 मंदिर हैं।

 

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Dashlakshana Parv: Defense Minister Rajnath Singh have been involved in Panch Kalyanak in Baraut
पंच कल्याणक में शामिल राजनाथ सिंह File photo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जैन श्रद्धालुओं में बुधवार से शुरू हुए दशलक्षण पर्व को लेकर काफी उत्साह है। यह उत्साह हालांकि पहली बार नहीं है, बल्कि धर्मनगरी बड़ौत का धार्मिक गतिविधियों से वर्षों से गहरा नाता रहा है। यहां पर देश के प्रसिद्ध सुधर्माचार्य के सानिध्य में चतुर्मास व पंचकल्याणक हो चुके हैं। इतना ही नहीं इन चतुर्मास और पंचकल्याणक में देश के वर्तमान रक्षामंत्री और मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री भी शामिल हो चुके हैं।

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धर्मनगरी बड़ौत में जैन धर्म से जुडे़ 11 मंदिर हैं। जिसमें बड़ा दिगंबर जैन मंदिर, छोटा दिगंबर जैन मंदिर, अतिथि भवन मंदिर, अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर, शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कैनाल रोड, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नेहरू रोड, महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर गुराना रोड, दिगंबर जैन मंदिर पारस बिहार, साधुवृति आश्रम दिगंबर जैन दिल्ली रोड, महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर व श्वेतांबर मंदिर शामिल हैं। यहां पर जैन श्रद्धालु नियमित पूजा, अर्चना करते हैं।
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इन सुधर्माचार्य के सानिध्य में हो चुका है चर्तुमास व पंचकल्याणक, हेलीकाप्टर से हुई थी पुष्पा वर्षा
महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष विनोद कुमार जैन एडवोकेट व अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि वर्ष 1931 में नगर में मात्र दो मंदिर थे। जिनमें एक दिगंबर जैन बड़ा मंदिर व एक दिगंबर जैन छोटा मंदिर। यहां पर देश के सुप्रसिद्व आचार्य शांतिसागर महाराज आए थे।
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1965 में आचार्य विद्यानंद महाराज, वर्ष 1976 में आचार्य धर्म सागर महाराज, वर्ष 1987 में आचार्य कुंदु सागर महाराज, वर्ष 1996 में आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज व आचार्य सौरभ सागर महाराज, वर्ष 2009 में मुनि विमर्श सागर महाराज, वर्ष 2012 में आचार्य गुप्तिनंदी महाराज, वर्ष 2014 में आचार्य विमर्श सागर महाराज शामिल हुए थे। नगर में आए जैनाचार्य आचार्य विद्यानंद महाराज, आचार्य धर्मसागर महाराज पर नगरवासियों ने हेलीकॉप्टर से पुष्पा वर्षा भी की थी।

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 वर्ष 2003 में पंचकल्याणक में शामिल हुए थे मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज चौहान
महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष विनोद कुमार जैन एडवोकेट और अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि प्रमाण सागर महाराज के सानिध्य में दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के मैदान पर वर्ष 2003 में अजितनाथ मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव में हुआ था। जिसमें उस समय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे व वर्तमान में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान भी शामिल हुए थे।

वर्ष 1992 में देश के वर्तमान रक्षामंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके राजनाथ सिंह भी धर्मनगरी बड़ौत में आचार्य संतमति सागर महाराज के सानिध्य में हुए चतुर्मास में महाराज का आशीर्वाद लेने आए थे। इस दौरान विनोद कुमार जैन एडवोकेट के नेतृत्व में जैन श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया था।

1. उत्तम क्षमा : उत्तम क्षमा की आराधना से पर्युषण पर्व का आरंभ होता है। सहनशीलता का विकास इसका उद्देश्य है। सभी के प्रति क्षमाभाव रखना।
2. उत्तम मार्दव,: चित्त में मृदुता व व्यवहार में नम्रता होना। सभी के प्रति विनयभाव रखना।
3. उत्तम आर्जव : भाव की शुद्धता। जो सोचना सो कहना। जो कहना, वही करना। छल, कपट का त्याग करना। कथनी और करनी में अंतर नहीं करना।
4.उत्तम शौच : मन में किसी भी तरह का लोभ न रखना। आसक्ति घटाना। न्याय नीति पूर्वक कमाना।
5. उत्तम सत्य : सत्य बोलना। हितकारी बोलना। थोड़ा बोलना। प्रिय और अच्छे वचन बोलना।
6. उत्तम संयम : मन, वचन और शरीर को काबू में रखना। संयम का पालन करना। मन तथा इंद्रियों पर काबू रखना।
7. उत्तम तप : मलिन वृत्तियों को दूर करने के लिए तपस्या करना। तप का प्रयोजन मन की शुद्धि है।
8.उत्तम त्याग : सुपात्र को ज्ञान, अभय, आहार और औषधि का दान देना तथा राग-द्वेषादि का त्याग करना।
9. उत्तम आकिंचन : अपरिग्रह को स्वीकार करना।
10. उत्तम ब्रह्मचर्य : सद्गुणों का अभ्यास करना और पवित्र रहना। चिदानंद आत्मा में लीन होना।

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