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करेंसी चेस्ट नकली नोट मामला: 26 साल पहले गांव से शहर आया था मुकेश, बना दर्जी; अब एनआईए खंगाल रही नेटवर्क

Fri, 25 Sep 2026 01:56 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 25 Sep 2026 01:56 PM IST
सार

सहारनपुर के 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मामले में गिरफ्तार मुकेश की पृष्ठभूमि और संपर्कों की एनआईए जांच कर रही है। मेरठ करेंसी चेस्ट में मिले 4.63 लाख के नकली नोटों से संभावित कनेक्शन भी खंगाला जा रहा है।

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Currency Chest Fake Note Case: Mukesh Moved to City 26 Years Ago, Started Tailoring Work; NIA Probes His Netwo
एनआईए - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहारनपुर जनपद में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपी मुकेश की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। सरसावा क्षेत्र के गांव कुतुबपुर का मूल निवासी मुकेश करीब 26 साल पहले गांव से शहर आया था। अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) उसके संपर्कों और भूमिका की पड़ताल कर रही है। इसी बीच मेरठ में एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट से मिले करीब 4.63 लाख रुपये के जाली नोट जांच के लिए नया सिरा बन गए हैं।

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26 साल पहले गांव से शहर आया था मुकेश
आरोपी मुकेश मूलरूप से सरसावा क्षेत्र के गांव कुतुबपुर का रहने वाला है। करीब 26 साल पहले वह गांव से शहर आया था। शुरुआत में वह मनोहरपुर गांव में किराये के मकान में रहा। बाद में उसने अपना मकान बना लिया। परिवार में पत्नी और एक बेटा है। 
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मुकेश ने घर के पास ही कपड़ा सिलाई की दुकान कर रखी है। दुकान किराये की है और बताया गया है कि वह पत्नी मिथलेश और बेटे के साथ मिलकर यहां काम करता है। उसका अपना करीब 37 गज का मकान है।

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पहले भी जाली नोट के मामले में जा चुका है जेल
सितंबर 2024 में मुकेश पुराने जाली नोट के एक मामले में जेल जा चुका है। उस समय थाना कुतुबशेर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। अब 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मामले में एनआईए ने मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच में उसे आरोपी आदेश चौधरी का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।

एनआईए अब मुकेश के संपर्क में रहने वाले लोगों और उसकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। उसकी भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

Currency Chest Fake Note Case: Mukesh Moved to City 26 Years Ago, Started Tailoring Work; NIA Probes His Netwo
सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में जांच करने पहुंचे मुख्य सुरक्षा अधिकारी। बाहर खड़ी उनकी गाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

मेरठ करेंसी चेस्ट से मिले नोटों ने जोड़ा नया सिरा
इसी बीच मेरठ में एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट से करीब 4.63 लाख रुपये के जाली नोट मिलने के बाद जांच के सामने एक नया सिरा आया है। एनआईए इस बात की पड़ताल कर रही है कि मेरठ में मिले जाली नोटों का स्रोत क्या है और क्या इनकी सप्लाई चेन का कोई संबंध सहारनपुर के मामले से है।

जांच में दोनों मामलों में मिले नोटों की सीरीज, गुणवत्ता, डिजाइन, बरामदगी का तरीका और करेंसी चेस्ट तक पहुंचने के रास्ते जैसे बिंदुओं का मिलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें: मेरठ: करेंसी चेस्ट में मिले 4.63 लाख के नकली नोटों की क्राइम ब्रांच करेगी जांच, एटीएस भी करेगी मॉनिटरिंग

दो करेंसी चेस्ट, एक बड़ा सवाल
सहारनपुर और मेरठ दोनों मामलों में जाली नोटों का करेंसी चेस्ट तक पहुंचना जांच का अहम पहलू बन गया है। यदि दोनों मामलों में नोटों की सीरीज या बैंकिंग चैनल में उनके पहुंचने के तरीके में समानता मिलती है तो जांच की दिशा आगे बदल सकती है।

सहारनपुर मामले में अब भी बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की जाली करेंसी बैंकिंग सिस्टम में किस रास्ते से पहुंची और इसका मूल स्रोत क्या था। मेरठ में सामने आए जाली नोट इस सवाल की जांच में एक नई कड़ी के तौर पर देखे जा रहे हैं।

सहारनपुर मामले में चार आरोपी गिरफ्तार
सहारनपुर की पीएनबी करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में एनआईए अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में करेंसी चेस्ट, उसमें आने वाली नकदी, नकदी की छंटाई और आगे भेजी जाने वाली रकम से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे और इनका मूल स्रोत क्या था। इसी कड़ी में मेरठ में मिले जाली नोटों और सहारनपुर प्रकरण के बीच संभावित संबंध की भी जांच की जा रही है।

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