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सचिन त्यागी फाइल - 5
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मेरठ। पुनर्जागरण को समझने से पूर्व सबसे पहले हमें संस्कृति को समझना होगा। कुछ लोगों को संस्कृति के बारे भ्रम है। वे सभ्यता को ही संस्कृति मान बैठे हैं। सभ्यता और संस्कृति मेें अंतर है। सभ्यता का आशय हमारे रहन-सहन और हमारी आदतों से है। जबकि संस्कृति का अर्थ हमारी आत्मा का विषय है, ज्ञान का विषय है, जिसने विश्व को प्रभावित किया है। ये विचार सीसीएसयू के इतिहास विभाग में आयोजित वेबिनार में मुख्य वक्ता डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड, मिनिस्ट्रीरआफ कल्चर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया नई दिल्ली ने व्यक्त किए।
वेबिनार के विशिष्ट वक्ता प्रो. सीएम अग्रवाल, भूतपूर्व विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग कुमाऊं यूनिवर्सिटी, अल्मोड़ा ने कहा कि पुनर्जागरण का अर्थ पुनर्जन्म से है। उन्होंने अपने शोध पत्र में पुनर्जागरण के प्रारंभ काल से लेकर भारत में इसका फैलाव किस प्रकार हुआ सभी को समझाया। विशिष्ट वक्ता डॉ. एलमन जोसेफ रेनर, एसोसिएट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, डेनमार्क, एवं सुधीश शुक्ला यूनिवर्सिटी आफ जोहानिसबर्ग रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. अजय विजय कौर ने वेबिनार को सफल बनाने के लिए कुलपति प्रो. एनके तनेजा, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला को धन्यवाद किया। डीन ऑफ आर्ट्स प्रो. नवीन कुमार लोहनी, प्रो. अराधना का विशेष सहयोग रहा। संचालन डॉ. शुचि गुप्ता ने किया। इस दौरान डॉ. पवन कुमार, डॉ. योगेश कुमार, अरशद हुसैन, कमलकांत, कालूराम, लोकेश शर्मा, विकास कुमार आदि का सहयोग रहा।
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वेबिनार के विशिष्ट वक्ता प्रो. सीएम अग्रवाल, भूतपूर्व विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग कुमाऊं यूनिवर्सिटी, अल्मोड़ा ने कहा कि पुनर्जागरण का अर्थ पुनर्जन्म से है। उन्होंने अपने शोध पत्र में पुनर्जागरण के प्रारंभ काल से लेकर भारत में इसका फैलाव किस प्रकार हुआ सभी को समझाया। विशिष्ट वक्ता डॉ. एलमन जोसेफ रेनर, एसोसिएट प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन, डेनमार्क, एवं सुधीश शुक्ला यूनिवर्सिटी आफ जोहानिसबर्ग रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. अजय विजय कौर ने वेबिनार को सफल बनाने के लिए कुलपति प्रो. एनके तनेजा, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला को धन्यवाद किया। डीन ऑफ आर्ट्स प्रो. नवीन कुमार लोहनी, प्रो. अराधना का विशेष सहयोग रहा। संचालन डॉ. शुचि गुप्ता ने किया। इस दौरान डॉ. पवन कुमार, डॉ. योगेश कुमार, अरशद हुसैन, कमलकांत, कालूराम, लोकेश शर्मा, विकास कुमार आदि का सहयोग रहा।
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