कांजी हाउस में पशुओं से क्रूरता, इस विभाग को नहीं योगीराज का डर!
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मेरठ में पशु क्रूरता को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार भले ही गंभीर हो। लेकिन निगम प्रशासन लापरवाह है। इसकी बानगी नगर निगम के कांजी हाउस में देखी जा सकती है। यहां पर पशुओं के लिए न तो कोई उचित स्थान है और न ही चारा और पानी का प्रबंध। ऐसे में वहां बंद पशुओं को छोड़े जाने तक भूखे ही रहना पड़ता है। जबकि नगर निगम से कांजी हाउस के लिए पांच लाख रुपये वार्षिक खर्च का इंतजाम है।
बदहाल है कांजी हाउस
अमर उजाला टीम ने सूरजकुंड स्थित कांजी हाउस का हाल देखा। यहां मुख्य गेट और पीने के पानी की टंकी टूटी मिली। पशुओं के रखने को टीन शेड भी थी, लेकिन गंदगी के कारण बदहाल हैं। परिसर में भूसा, चारा रखने का हॉल तो है, लेकिन खाली पड़ा है। कर्मचारी के लिए बने भवन भी जर्जर हैं। सिर्फ चौकीदार शौकीन तैनात दिखे।
कान्हा योजना के तहत ये होनी हैं सुविधाएं
कांजी हाउस में पशुओं के रहने के लिए अलग-अलग शेड।
पीने के पानी की उचित व्यवस्था।
पशुओं के लिए भूसा यानी चारा रखने की व्यवस्था।
कांजी हाउस के भीतर ही बायो गैस प्लांट स्थापना।
शेड के ऊपर सौर ऊर्जा प्लांट से पेयजल व प्रकाश व्यवस्था।
कर्मचारी के रहने के लिए आवास और एक ऑफिस।
पशुओं के उपचार के लिए पशु चिकित्सक की व्यवस्था।
कान्हा आश्रय योजना की जानकारी नहीं
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुंवरसेन का कहना है कि कांजी हाउस नगर पालिका के समय का बना हुआ है। हम आवारा पशुओं को पकड़कर उसमें रखते हैं। पशुपालकों से जुर्माना भी वसूला जाता है। कान्हा आश्रय योजना की जानकारी नहीं है। पशुओं को हम चारा उपलब्ध कराते हैं।
क्रूरता को लेकर बेहद गंभीर
महापौर हरिकांत अहलूवालिया मुख्यमंत्री सभी पशुओं पर क्रूरता को लेकर बेहद गंभीर हैं। फिर से व्यवस्था का जायजा लेकर कान्हा आश्रय योजना के तहत निर्माण कराया जाएगा।
कांजी हाउस से निगम को आय भी
नगर निगम प्रशासन ने अपने मूल बजट में कांजी हाउस से अनुमानित आय 20 हजार रुपये वार्षिक दर्शायी है। यह आय उन पशुओं से होती है, जिनको महानगर की सड़कों पर घूमते समय पकड़कर कांजी हाउस में बंद किया जाता है। पशुपालक से प्रति पशु के हिसाब से 100 रुपये जुर्माना वसूला जाता है।