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बीजेपी कराएगी शहर के कमेले बंद, 2000 से ज्यादा महिलाओं समेत 7000 लोग करते हैं काम

Sat, 18 Mar 2017 03:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Sat, 18 Mar 2017 03:17 PM IST
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Crisis on all the  Kamele in the city, now BJP will stop!
कमेलों पर संकट

प्रदेश में भाजपा के बहुमत में आने के बाद अब यांत्रिक कमेले के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। भाजपा के चुनावी मुद्दों में यह अहम था और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इसकी घोषणा की थी। ऐसे में सरकार बनने की स्थिति में माना जा रहा है कि भाजपा इस वादे को पूरा कर सकती है। जिससे शहर में चल रही मीट फैक्ट्रियों के सामने संकट पैदा होगा। हालांकि यह अहम है कि स्थानीय आपूर्ति का क्या होगा। भाजपा नेताओं का मत है कि मीट उद्योग की बजाए दुग्ध क्रांति की और रुख किया जाना चाहिए। 

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मेरठ में भी कमेला भाजपा का पुराना मुद्दा रहा है। पहले भी पशुओं के कटान और कमेले पर भाजपा राजनीति करती रही है। इस विस चुनाव के दौरान अमित शाह ने कहा था कि अगर यूपी में भाजपा की सरकार बनी तो सभी यांत्रिक कमेले बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने पशु कटान करने और मांस का निर्यात करने वाले लोगों को पशुपालन का कारोबार करने की भी सलाह दी। मेरठ में मेरठ-हापुड़ रोड पर मीट व्यापार से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां हैं। यहां से मीट निर्यात होता है। इसके लिए सैकड़ों पशुओं का कटान होता है। 
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कमेलों को लेकर एनजीटी भी सख्त 
कमेले को लेकर एनजीटी भी बेहद सख्त है। कमेले में काटे जाने वाले पशुओं के खून और अवशेषों से पर्यावरण दूषित होता है। इसका सीधा असर मानव शरीर  पर पड़ता है। पूर्व में जारी एनजीटी के आदेश पर गौर करें तो कोई भी साधारण कमेला शहर में नहीं चल सकता है। अगर शहर की आपूर्ति के लिए पशु कटान होना भी है तो उसके लिए अत्याधुनिक कमेला संचालित किया जा सकता है। 
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15 हजार लोग को मिला है रोजगार
मेरठ में मुख्य रूप से हापुड़ रोड पर तीन बड़े और इतनी ही अन्य मीट फैक्ट्रियां हैं। इन सभी में लगभग सात हजार लोग काम करते हैं। दो हजार से ज्यादा महिलाओं को भी यहां काम मिला हुआ है जो पैकेजिंग से जुड़ी हैं। फैक्ट्री संचालक कहते हैं कि इसके अलावा इतने ही लोग ऐसे भी हैं जो पशु खरीदकर  यहां लाने आदि का काम करते हैं। लगभग 15 हजार लोगों को इस काम से रोजगार मिला हुआ है।

500 करोड़ का है टर्नओवर
मेरठ की कई फैक्ट्रियों का टर्नओवर इस धंधे से सालाना सौ करोड़ से भी ज्यादा का है। लगभग पांच सौ करोड़ रुपये का टर्न ओवर तो इन्हीं फैक्ट्रियों का है। वैसे यह धंधा एक हजार करोड़ रुपये सालाना से भी ज्यादा का है। इन फैक्ट्रियों में मुख्य रूप से मांस एक्सपोर्ट ही होता है। चीन तथा खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा मीट भेजा जाता है। ऐसे में यदि सरकार ने इसे बंद किया तो जहां स्थानीय आय कम होगी, तो सरकार को भी इससे मिलने वाला टैक्स नहीं मिल सकेगा।

घोसीपुर में है कमेले की 5.26 हेक्टेयर भूमि

Crisis on all the  Kamele in the city, now BJP will stop!
यूपी पुलिस

ग्राम घोसीपुर में अत्याधुनिक पशुवध शाला निर्माण के लिए 5.26 हैक्टेयर भूमि है। इस पर 2011 में पशु वधशाला बनी थी। वह मानकों के विपरीत पाई गई और पशुओं का खून और अवशेष काली नदी में डाले जा रहे थे। जो सीधा गंगा को दूषित कर रहा था। प्रदूषण विभाग ने करीब चार साल पहले कमेला बंद करा दिया था।

आदेश का होगा पालन 
सरकार को जो भी आदेश आएगा उसका अनुपालन किया जाएगा। निगम पहले ही अपना कमेला बंद किए हुए है। यदि शहर में कहीं भी कमेले चल रहे हैं तो नगर स्वास्थ्य अधिकारी से रिपोर्ट लेकर उन्हें बंद कराएंगे। -डीके कुशवाहा नगरायुक्त
 
निगम की जिम्मेदारी 
शहर को मीट आपूर्ति की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। नगर निगम घोसीपुर में अपना कमेला संचालित कराए। शहर में प्रदूषण फैलाते अवैध कमेलों की जांच नहीं हो रही है। -शाहिद अब्बासी, सपा पार्षद

बंद कराया निगम का कमेला 
घोसीपुर में संचालित कमेला करीब चार साल पूर्व बंद कराकर निगम की आय पूरी तरह शून्य कर दी गई। भाजपा कमेलों का विरोध करती रही है। सपा सरकार ने अत्याधुनिक कमेले के लिए 10 करोड़ रुपये जारी किए थे। हमने सपा सरकार की मंशा को भी पूरा नहीं होने दिया। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर

अवैध यांत्रिक कमेले ही हो सकते बंद
वैध रूप से चल रहे यांत्रिक कमेलों को बंद नहीं किया जा सकता है। मीट आपूर्ति भी तो जरूरी है। निगम एक्ट में भी स्लाटर हाउस जरूरी है। जो पशु किसी काम के नहीं, तो उनका उपयोग क्या होगा। दूसरे मीट भी तो खाद्य का माध्यम है और एक वर्ग की जरूरत है। ऐसे में इसे बंद नहीं किया जा सकता है। -हाजी याकूब कुरैशी, चेयरमैन अल फहीम मीटेक्स

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