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संकट: बजट के अभाव में लटके 178 बिजली उपकेन्द्र

Tue, 01 Nov 2022 02:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 02:21 AM IST
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Crisis: 178 power substations hanging due to lack of budget
संकट: बजट के अभाव में लटके 178 बिजली उपकेन्द्र
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3403 करोड़ रुपये की है जरूरत, शासन में अटकी है फाइल
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मंडल में 178 उपकेन्द्र बनाए जाने का बजट प्रस्ताव शासन में अटक गया है। इन उपकेन्द्रों का निर्माण रिवैंप योजना के माध्यम से होना था। मार्च 2023 मार्च तक यह कार्य पूरा किया जाना था।
हर साल उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लाइनों और बिजलीघरों पर विद्युत लोड भी बढ़ता रहा है। इस लोड को कम करने के उद्देश्य से पीवीवीएनएल की ओर से बीते वर्ष नए उपकेन्द्र बनाए जाने और क्षमता वृद्घि का प्रस्ताव बनाया गया था। इनमें पश्चिमांचल वितरण निगम लिमिटेड के तहत पूरे मंडल में 3403 करोड़ रुपये खर्च कर 178 उपकेन्द्र नए बनाए जाने थे व जर्जर तारों को बदला जाना था। इनमें क्षमता वृद्घि का भी कार्य इसी में शामिल है। यह सभी कार्य रीवैंप स्कीम के तहत किए जाने थे। इनके लेकर ऊर्जा महोत्सव के दौरान भी पावर एमडी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने जल्द ही इनका कार्य शुरू होने की बात भी कही थी, लेकिन यह कार्य रुका पड़ा है।
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मेरठ में प्रस्तावित हैं 15 बिजली उपकेंद्र
बजोट, चुड़ियाला, गंगोल रोड, ढिडोला मोहिउद्दीनपुर, रासाना, किनौनी, सिवाल खास, फैथपुर नारायण, बदोली, लिसाड़ी क्षेत्र, मलियाना समेत कई क्षेत्रों में उपकेन्द्रों का निर्माण होना था। इन उपकेन्द्रों के निर्माण से काजीपुर, गंगोल, महिउद्दीनपुर, उद्योगपुरम, रोहटा, कैवार आदि बिजली घरों से लोड कम होता और फाल्ट होने की समस्या भी कम होती, लेकिन अभी सिर्फ यह कार्य प्रस्ताव तक सीमित रह गया है। अधिकारियों की मानें तो इसके लिए अभी तक बजट पास नहीं हो सका है।
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यहां होनी है क्षमता वृद्घि
जागृति विहार में 100 केवी से 250 केवी, शास्त्रीनगर डी ब्लॉक, मंगलपांडे नगर, सैनिक विहार, रामलीला ग्राउंड, ज्वाला नगर में 250 से 400 केवी क्षमता वृद्घि की जानी है। इसके अलावा और भी कई ऐसी जगहें हैं जहां क्षमता वृद्घि के प्रस्ताव बनाए जाने हैं। यह कार्य भी बजट के अभाव में लटके हैं।

पैसा जुटाने की कवायद तेज
उपकेन्द्रों का निर्माध रिवैंप स्कीम से होना है। अभी बजट की कमी के चलते कार्य अटका हुआ है। इसलिए राजस्व वसूली पर फोकस किया जा रहा है ताकि नए कार्य हो सकें। राजेन्द्र बहादुर, अधीक्षण अभियंता शहर
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