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विजय धामा ने गनर लेकर खेला खूनी खेल

Sun, 07 Jul 2019 04:37 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Sun, 07 Jul 2019 04:37 AM IST
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Vijay Dhama played gunner with bloody game
न्यूट्रिमा अस्पताल में विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
मेरठ। बली गांव के प्राथमिक विद्यालय में चल रहे मतदान के समय भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजय धामा ने सरकारी गनर लेकर ऐसा खूनी खेल खेला कि लखनऊ तक हड़कंप मच गया। बूथ कैप्चरिंग का विरोध करने पर स्कूल परिसर में गोली मारकर प्रधान के बेटे अनित गुर्जर की हत्या कर दी गई। दुस्साहस ऐसा कि पिस्टल से फायरिंग कर पूरी मैगजीन खाली कर दी उसके बाद दूसरी मैगजीन लोड की। पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन नाकामी छिपाने में लगा रहा।
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पहले शहर में प्रह्लाद नगर प्रकरण की शासन तक गूंज हुई। जिसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। प्रह्लाद नगर प्रकरण पूरी तरह शांत भी नहीं हो पाया था कि 30 जून को युवा सेवा समिति के बैनर तले बदर अली ने धारा 144 लागू होने के बाद पुलिस को चुनौती देते हुए पहले फैज-ए-आम कॉलेज में मीटिंग की और उसके बाद जुलूस निकाला। बवाल हुआ तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस बवाल में भाजपा नेताओं ने पुलिस अफसरों पर ठीकरा फोड़ा। जिसके बाद एसएसपी नितिन तिवारी और आईजी रेंज रामकुमार को हटाया गया।
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नवागत एसएसपी अजय साहनी ने चार्ज संभालते ही कानून व्यवस्था को सुधारने के दावे किए। लेकिन एसएसपी के दावे हवा में उड़ गये। एसएसपी के चार्ज संभालने के चौथे दिन ही देहात में ऐसा खूनी खेल हो गया, जिस पर अफसर खामोश हो गये। प्रधान पुत्र की पुलिस फोर्स के सामने स्कूल परिसर में मतदान केंद्र में गोली मारकर हत्या की घटना ने कानून व्यवस्था को चुनौती दे दी है। शहर की घटना से अफसरों ने सबक नहीं लिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि पुुलिस फोर्स की मौजूदगी में विजय धामा ने खूनी खेल को अंजाम दिया। इससे पहले भी पंचायत चुनाव में करीमपुर गांव में बूथ कैप्चरिंग की घटना पर बवाल हुआ था। ललियाना किठौर में पंचायत और जिपं के चुनाव में गोली चलने की घटनाएं हो चुकी हैं।
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सवाल यह है कि आखिर भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजय धामा को सरकारी गनर किसने दिया, इस पर अधिकारी चुप्पी साध गये। प्रधान कालूराम के परिजनों और अन्य लोगों ने भी आरोप लगाया कि खाकी वर्दी में गनर लेकर विजय धामा मतदान केंद्र पर पहुंचा था। बताया जा रहा कि यह गनर एक मुजफ्फरनगर के नेता का था, जहां सेटिंग करके विजय धामा सपा और बसपा समर्थित प्रत्याशियों पर धाक जमा सके।
दरोगा समेत सात की थी ड्यूटी
एसपी देहात अविनाश पांडेय ने बताया कि मतदान केंद्र पर दरोगा समेत सात पुलिसकर्मी थे। जबकि प्रत्याशी विजय धामा के रामनगर गांव में पीएसी लगाई गई थी। जबकि पीड़ित परिजनों का आरोप है कि मतदान केंद्र पर 18 से 20 पुलिसकर्मी थे।
ये खड़े हो रहे सवाल
चुनाव को लेकर सुरक्षा के क्यों नहीं किए गए कड़े बंदोबस्त
धारा 144 लागू है तो हथियार क्यों नहीं जमा कराए गए
आखिर मतदान केंद्र पर कैसे पहुंची अवैध पिस्टल
सपा जिलाध्यक्ष द्वारा डीएम को ज्ञापन देने पर भी हल्के में क्यों लेता रहा प्रशासन
दुस्साहसिक वारदात में थानेदार और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की क्या थी जिम्मेदारी
प्रत्याशी विजय धामा सरकारी गनर को लेकर कैसे पहुंचा


हत्या होते ही बदले भाजपाइयों के सुर  
मेरठ।
जिला पंचायत के वार्ड 34 के उपचुनाव में प्रधान के पुत्र की हत्या होने और हत्या में भाजपा समर्थित प्रत्याशी का नाम सामने आते ही भाजपाइयों के सुर बदल गए। कल तक जो भाजपाई विजय धामा के पक्ष में लगातार प्रचार करते हुए उसकी जीत सुनिश्चित कराने में लगे थे, हत्या होते ही उससे एकदम छिटककर दूर हो गए।
जिला पंचायत के वार्ड 34 में दिलशाद सठला चुनाव जीते थे। लेकिन पिछले साल उनकी दिल्ली में हत्या हो गई थी। जिस कारण इस रिक्त पद पर शनिवार को मतदान हुआ। इस उपचुनाव में भाजपा के हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक सहित हस्तिनापुर विधानसभा के तमाम भाजपाइयों ने विजय धामा को चुनाव लड़ाने पर जोर दिया था, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह अपने भाई को चुनाव लड़ाना चाहते थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेताआें ने मूक रूप से विजय धामा के नाम पर हरी झंडी दे दी। इसके बाद विधायक दिनेश खटीक सहित तमाम भाजपाइयों ने जुलूस के साथ विजय धामा का नामांकन भरवाया और बाद में अंतिम समय तक विजय के पक्ष में प्रचार भी किया।
विजय धामा ने भी सोशल मीडिया और प्रचार के लिए क्षेत्र में लगाए बैनर होर्डिंग में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित क्षेत्रीय अध्यक्ष अश्वनी त्यागी, विधायक दिनेश खटीक और जिलाध्यक्ष रविंद्र भड़ाना के भी फोटो लगाए थे। प्रचार में खुद को भाजपा समर्थित प्रत्याशी बताया। लेकिन तब किसी भी भाजपाई ने विरोध नहीं किया और न हीं विजय के भाजपा समर्थित प्रत्याशी होने का खंडन किया।

लेकिन शनिवार शाम बूथ कैप्चरिंग का प्रयास रोकने पर विजय धामा पर गांव बली के प्रधान और भाजपा नेता के पुत्र अनित गुर्जर की गोली मारकर हत्या करने के आरोप लगे तो भाजपाइयों के सुर बदल गए। भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र भड़ाना ने कहा कि हमने इस चुनाव में किसी भी प्रत्याशी का समर्थन नहीं किया था। विजय धामा भाजपा समर्थित प्रत्याशी नहीं था। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान इसका विरोध या खंडन क्यों नहीं किया गया? इसका जवाब किसी नेता के पास नहीं है।
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