कोर्ट ने सौतेले पिता को सुनाई उम्रकैद की सजा, दो सगी बहनों से किया था दुष्कर्म
यूपी के बागपत में दो सगी बहनों से यौन उत्पीड़न के मामले में सौतेले पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। एडीजे प्रथम एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट शैलेंद्र पांडेय की कोर्ट में फैसला सुनाया। बाल कल्याण न्यायपीठ के आदेश पर महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
एडीजीसी राजीव तोमर और सुरेंद्र यादव ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की एक महिला की शादी बीस साल पहले दोघट थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति से हुई। महिला को दो बेटी और एक बेटा पैदा हुआ। कुछ साल बाद पति-पत्नी में विवाद रहने लगा। तलाक लेकर महिला तीनों बच्चों के साथ अपने मायके में आकर रहने लगी। वर्ष 2001 में महिला ने नौलथा जनपद पानीपत हरियाणा निवासी महेंद्र से शादी कर ली। महिला तीनों बच्चों को लेकर दूसरे पति के पास रहने लगी। वर्ष 2014 में महिला की मौत हो गई। उसकी मौत के कुछ महीनों बाद सौतेले पिता ने 15 वर्षीय बड़ी बेटी को नशे की गोली खिलाकर दुष्कर्म करना शुरू कर दिया। धमकी दी कि यदि किसी से शिकायत की तो जान से मार दूंगा। बड़ी बेटी यौन उत्पीड़न झेलती रही।
इसके बाद वह 13 वर्षीय छोटी बेटी को भी हवस का शिकार बनाने लगा। छपरौली थाना क्षेत्र के यमुना खादर में रेत की खान में दोनों को रखा और अपने साथियों से भी दुष्कर्म कराया। दोनों बहनों ने यौन उत्पीड़न से परेशान होकर बाल कल्याण न्यायपीठ में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। वर्ष 2018 में बाल कल्याण न्यायपीठ के आदेश पर महिला थाने में सौतेले पिता महेंद्र के खिलाफ धारा 323, 376, 506 आईपीसी एवं धारा 5/6 व 7/8 लैंगिक अपराधों से बालिका संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया। यह मुकदमा एडीजे प्रथम एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट शैलेंद्र पांडेय की कोर्ट में चल रहा था। अभियोजन पक्ष की तरफ से सात गवाह पेश किए। बुधवार को सजा के प्रश्न पर सुनवाई हुई। अभियुक्त को आजीवन कारावास एवं 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा होने की दशा में 30 हजार रुपये प्रथम पीड़ित और 10 हजार रुपये द्वितीय पीड़ित को दिए जाएंगे। अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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मकान हड़पने के लिए पत्नी के भाई ने झूठा फंसाया
आरोपी महेंद्र बोला कि वर्ष 2001 में यमुना नदी के खादर में ट्रैक्टर चला रहा था। इसी समय एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ यमुना नदी में कूदकर आत्महत्या करने लगी। उसने महिला व तीनों बच्चों को बचाया था। उसकी दुखभरी कहानी सुनकर उसने महिला से मंदिर में शादी कर ली थी। तीनों बच्चों को अपने साथ रखा। उनकी परवरिश की। पत्नी की टीबी से मौत हो गई। जिसके बाद पत्नी के भाई ने उसका मकान हड़पने के लिए तीनों बच्चों को बहला फुसला कर उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। वह बेगुनाह है, उसने किसी से दुष्कर्म नहीं किया।
जेल जाते हुए कहा, कर दूंगा हत्या
कोर्ट से हवालात जाते समय अभियुक्त महेंद्र बोला कि जिस दिन वह जेल से छूटकर बाहर आएगा, सबसे पहले पत्नी के भाई की गर्दन काटकर हत्या कर देगा। उसने उसका परिवार बर्बाद कर दिया है। उसने यह भी कहा कि जब तक अपने दुश्मन की हत्या नहीं कर देगा, वह दाढ़ी नहीं कटवाएगा। उसने दाढ़ी भी बढ़ा रखी है।
मामा के पास रहती हैं दोनों बहनें
एडीजीसी सुरेंद्र यादव ने बताया कि दोनों बहने अपने मामा के पास रहती हैं। मामा ने ही आरोपी को सजा दिलाने के लिए कोर्ट में पैरवी की। वह हर तारीख पर कोर्ट आता था, लेकिन जिस दिन सजा सुनाई गई, वह कोर्ट नहीं पहुंचा।
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