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एसएसपी के गुस्से पर लाल हुए भाजपाई
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:36 AM IST
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एसएसपी आवास पर भाजपाइयों और एसएसपी में होती नोकझोंक।
- फोटो : अमर उजाला
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बेगमपुल पर भारत की जीत का जश्न मनाते सिख युवक कुलदीप सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में भाजपाइयों ने सोमवार शाम एसएसपी आवास पर जमकर हंगामा काटा और नारेबाजी की। इस दौरान कैंप ऑफिस में वार्ता के दौरान एसएसपी के गुस्सा होने के विरोध में भाजपा के कैंट विधायक और महापौर सहित तमाम नेता ऑफिस के बाहर धरने पर बैठ गए। विधायक ने जब एसएसपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत भेजने की तैयारी की तो भनक पड़ते ही बैकफुट पर आए एसएसपी विधायक को किसी तरह मनाकर अंदर ले गए। इस बीच सरधना विधायक ठा. संगीत सोम भी वहां पहुंच गए।
इससे पहले सोमवार शाम गुरुद्वारा थापर नगर में सिख समाज की बैठक में भाजपाई भी मौजूद रहे। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि पुलिस ने पहले सिख युवक से अभद्रता की और फिर उत्पीड़न करते हुए उसे जेल भेज दिया। बैठक के बाद कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और राष्ट्रीय सिख संगत के महानगर महामंत्री ललित नागदेव के नेतृत्व में सिख समाज और भाजपाई शाम करीब सात बजे एसएसपी आवास पहुंचे।
वार्ता के दौरान एसएसपी डीसी दूबे और भाजपा नेता कमलदत्त शर्मा के बीच गरमागरमी हो गयी। जिस पर एसएसपी ने उन्हें बाहर जाने को कह दिया। इस पर कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और महापौर हरिकांत अहलूवालिया भी सभी के साथ बाहर आ गए। विधायक ने आरोप लगाया कि एसएसपी ने उन्हें बाहर जाने को कहा है। वहीं, एसएसपी का कहना था कि उन्होंने अभद्रता कर रहे कमल दत्त को बाहर जाने के लिए कहा था, लेकिन भाजपाई इसे नहीं माने और एसएसपी आवास पर ही धरना देकर बैठ गये। सूचना पाकर महानगर से तमाम कार्यकर्ताओं के साथ ही पूर्व विधायक अमित अग्रवाल भी पहुंच गये और जमकर नारेबाजी हुई।
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काफी देर तक चले हंगामे के बीच पूर्व विधायक अमित अग्रवाल ने कैंट विधायक से कहा कि आप अभी विशेषाधिकार हनन के तहत शिकायत करें कि एसएसपी ने उन्हें कार्यालय से बाहर निकालने को कह दिया है। इसकी चर्चा होते ही वहां मौजूद एलआईयू सीओ ने एसएसपी से जाकर पूरी बात बतायी। इसके बाद एसएसपी तुरंत कैंट विधायक के पास पहुंचे और किसी तरह उन्हें मनाकर अपने साथ ऑफिस में ले गए। इस बीच पहले विधायक संगीत सोम और सबसे अंत में सांसद राजेंद्र अग्रवाल एसएसपी आवास पहुंचे।
बखेड़े के बाद यह हुआ तय
इस बखेड़े के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और एसएसपी के बीच पूरे मामले पर वार्ता हुई। जिसमें तय हुआ कि सिख युवक के मामले की जांच एसपी क्राइम करेंगे। उनके साथ सिख समाज के पांच लोग रहेंगे, जो बेगमपुल घटना की सारी फुटेज देखेंगे। इसके बाद सभी तय करेंगे कि किसकी गलती है। यदि कुलदीप पर आरोप नहीं बनता है तो उसके ऊपर लगी धाराओं को हटा दिया जाएगा।
पकड़ा पहले, ईंट बाद में लगी
कैंट विधायक और आबूलेन व्यापार संघ के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र सिंह ने एसएसपी से कहा कि कुलदीप को पुलिस पहले पकड़कर ले गयी। जब इंस्पेक्टर सदर वार्ता कर रहे थे और उन्हें ईंट लगी तो वह घटना कुलदीप को हिरासत में लेने के 15 मिनट बाद की है। ऐसे में कुलदीप इंस्पेक्टर को ईंट कैसे मार सकता है।
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इससे पहले सोमवार शाम गुरुद्वारा थापर नगर में सिख समाज की बैठक में भाजपाई भी मौजूद रहे। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि पुलिस ने पहले सिख युवक से अभद्रता की और फिर उत्पीड़न करते हुए उसे जेल भेज दिया। बैठक के बाद कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और राष्ट्रीय सिख संगत के महानगर महामंत्री ललित नागदेव के नेतृत्व में सिख समाज और भाजपाई शाम करीब सात बजे एसएसपी आवास पहुंचे।
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वार्ता के दौरान एसएसपी डीसी दूबे और भाजपा नेता कमलदत्त शर्मा के बीच गरमागरमी हो गयी। जिस पर एसएसपी ने उन्हें बाहर जाने को कह दिया। इस पर कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और महापौर हरिकांत अहलूवालिया भी सभी के साथ बाहर आ गए। विधायक ने आरोप लगाया कि एसएसपी ने उन्हें बाहर जाने को कहा है। वहीं, एसएसपी का कहना था कि उन्होंने अभद्रता कर रहे कमल दत्त को बाहर जाने के लिए कहा था, लेकिन भाजपाई इसे नहीं माने और एसएसपी आवास पर ही धरना देकर बैठ गये। सूचना पाकर महानगर से तमाम कार्यकर्ताओं के साथ ही पूर्व विधायक अमित अग्रवाल भी पहुंच गये और जमकर नारेबाजी हुई।
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काफी देर तक चले हंगामे के बीच पूर्व विधायक अमित अग्रवाल ने कैंट विधायक से कहा कि आप अभी विशेषाधिकार हनन के तहत शिकायत करें कि एसएसपी ने उन्हें कार्यालय से बाहर निकालने को कह दिया है। इसकी चर्चा होते ही वहां मौजूद एलआईयू सीओ ने एसएसपी से जाकर पूरी बात बतायी। इसके बाद एसएसपी तुरंत कैंट विधायक के पास पहुंचे और किसी तरह उन्हें मनाकर अपने साथ ऑफिस में ले गए। इस बीच पहले विधायक संगीत सोम और सबसे अंत में सांसद राजेंद्र अग्रवाल एसएसपी आवास पहुंचे।
बखेड़े के बाद यह हुआ तय
इस बखेड़े के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और एसएसपी के बीच पूरे मामले पर वार्ता हुई। जिसमें तय हुआ कि सिख युवक के मामले की जांच एसपी क्राइम करेंगे। उनके साथ सिख समाज के पांच लोग रहेंगे, जो बेगमपुल घटना की सारी फुटेज देखेंगे। इसके बाद सभी तय करेंगे कि किसकी गलती है। यदि कुलदीप पर आरोप नहीं बनता है तो उसके ऊपर लगी धाराओं को हटा दिया जाएगा।
पकड़ा पहले, ईंट बाद में लगी
कैंट विधायक और आबूलेन व्यापार संघ के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र सिंह ने एसएसपी से कहा कि कुलदीप को पुलिस पहले पकड़कर ले गयी। जब इंस्पेक्टर सदर वार्ता कर रहे थे और उन्हें ईंट लगी तो वह घटना कुलदीप को हिरासत में लेने के 15 मिनट बाद की है। ऐसे में कुलदीप इंस्पेक्टर को ईंट कैसे मार सकता है।