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स्मार्ट एमएसटी में फर्जीवाड़ा कर लगाया चूना  

Mon, 25 Jul 2016 02:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Mon, 25 Jul 2016 02:47 AM IST
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Smart MST taxed forged lime
रिकार्ड चेक करने का लोगो। - फोटो : अमर उजाला
रोडवेज यात्रियों के लिए स्मार्ट एमएसटी कार्ड जारी करने वाली आउटसोर्स फर्मों के कर्मचारियों ने ही रोडवेज को करीब 1.10 करोड़ रुपये का फटका लगा दिया। मामले में आरोपी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए मुख्यालय के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। आरएम मनोज कुमार पुंडीर ने मुख्यालय से साइबर एक्सपर्ट की टीम द्वारा मामले की जांच कराने की मांग की है। रोडवेज इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू करते हुए मैनुअल मासिक पास की जगह करीब चार साल से स्मार्ट एमएसटी कार्ड मुहैया करा रहा है। एमएसटी कार्ड का ठेका आउटसोर्स फर्म मैसर्स ट्राइमैक्स को दिया गया है। ट्राइमैक्स ने स्टाफ मुहैया कराने का ठेका मैसर्स सार आईटी को दिया है। 
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ऐसे पकड़ में आया घपला 
आरएम
मनोज पुंडीर को एमएसटी में बड़ा घपला होने की शिकायत मिली थी। इस पर उन्होंने एमएसटी आय का मासिक विवरण चेक किया। इसमें एमएसटी तो औसतन बढ़ती जा रही थी, लेकिन आय में गिरावट आ रही थी। उन्होंने मामले को पकड़ने के लिए दो दिन के लिए एमएसटी प्रक्रिया बंद कर एमएसटी सेक्शन पर टीम लगा दी। टीम ने एमएसटी का नवीनीकरण कराने वालों की पिछली रिचार्ज रसीद लेकर जांच की तो किसी रसीद का रिकॉर्ड ही नहीं मिला तो किसी रसीद में रिचार्ज राशि से कम राशि विभाग में जमा की गई थी। 
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किराया लिया दिल्ली का दिखाया गाजियाबाद का
कंपनी
कर्मचारी फर्जीवाड़े के लिए दो कंप्यूटर आईडी और फर्जी रसीद का प्रयोग कर रहे थे। रिचार्ज कराने आने वाले यात्री से पैसा तो मेरठ से दिल्ली तक लिया जाता था लेकिन उसे कंप्यूटर में मेरठ-गाजियाबाद का दर्ज कर दिया जाता था। यात्री को रिचार्ज की फर्जी रसीद मेरठ से दिल्ली की ही दी जाती थी। इसके अलावा नए एमएसटी को किसी भी पुराने एमएसटी पर ही चढ़ा दिया जाता था। 
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1.10 करोड़ का गबन
आरएम
मनोज पुंडीर ने बताया कि टीम ने जांच की तो कर्मचारी के पास 8 हजार रुपये वास्तविक आय से ज्यादा पकड़ में आए। ट्राइमैक्स द्वारा नियोजित कर्मचारी हर्षित शर्मा ने बताया कि मास्टर माइंड स्टाफ व्यवस्थापक आशीष मित्तल है। जांच में सामने आया कि फरवरी 2015 से जुलाई 2016 तक करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये का गबन किया गया है। 


स्वैप मशीन है खराब
मनोज
पुंडीर ने बताया रोडवेज की ईटीएम में लगा कार्ड स्वैप सिस्टम एक साल से खराब पड़ा है। फर्जीवाड़ा कर रहे कर्मचारी इसका फायदा उठाते रहे। परिचालक कार्ड को स्वैप करता था तो वह नहीं होता था। इसके बाद परिचालक यात्री की रिचार्ज रसीद देखकर ही यात्रा करा देता था। 
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