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पुलिस लाइन के सामने लुटेरों से भिड़ी शिक्षिका
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 13 Sep 2015 02:19 AM IST
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पुलिस लाइन गेट के सामने अकेली शिक्षिका लुटेरों से जूझती रही। लेकिन, उसे बचाने के लिए पुलिस का कोई नुमाइंदा बाहर तक नहीं निकला। हालांकि, महिला की हिम्मत के आगे बदमाश लूट में नाकाम रहे, पर छीनाझपटी में वह रिक्शे से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। महिला की तरह पुलिस या आसपास के लोग भी हिम्मत जुटाते तो शायद बदमाश दबोच लिए जाते। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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शनिवार दोपहर 2:30 बजे शिक्षिका मोनिका पत्नी नवीन विश्नोई निवासी सुभाष नगर, सिविल लाइन कमिश्नर आवास चौराहे से रिक्शा से लौट रही थी। डीआईजी ऑफिस के सामने पीछे से पल्सर बाइक सवार दो बदमाशों ने झपट्टा मारकर शिक्षिका से पर्स छीनने की कोशिश की। महिला ने पर्स नहीं छोड़ा और वह रिक्शे से गिरकर बाइक के साथ घिसट गई। इस पर बदमाशों की बाइक असंतुलित होकर फिसल गई।
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महिला ने बदमाशों से मुकाबला किया और पर्स नहीं छोड़ा। रिक्शे से गिरने के कारण उसके सिर और नाक से खून बहने लगा। महिला बेहोश हो गई तो बदमाश उसे छोड़कर फरार हो गए। यह घटनाक्रम दो मिनट तक चला, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी ने मौके पर आना मुनासिब नहीं समझा। जबकि, डीआईजी ऑफिस के सामने और चंद कदमों की दूरी पर सर्किट हाउस पर पुलिस थी। बाद में महिला को लोगों ने सुशीला जसवंत राय हॉस्पिटल में भर्ती कराया।
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सिर में आई गंभीर चोट
महिला की हालत देखकर डॉक्टरों ने उसे न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती किया। डॉक्टरों ने बताया महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, जिससे उसकी नाक से खून आया है। अस्पताल कर्मचारियों ने इसकी जानकारी शिक्षिका के परिजनों को दी। नवीन विश्नोई ने बताया उनकी पत्नी मोनिका हस्तिनापुर के सेठ कर्मचंद स्कूल में शिक्षिका है।
वारदात ने खोली पुलिस की पोल
पुलिस लाइन जैसे इलाके में वारदात कर लुटेरों ने बड़े-बड़े दावे करने वाले पुलिस की पोल खोल दी। अकेली महिला लुटेरों से जूझती रही और पुलिस तमाशबीन बनी रह गई। इस वारदात में पुलिसकर्मियों की लापरवाही सबने देखी। लेकिन, थाना सिविल लाइन पुलिस भी कम जिम्मेदार नहीं है, जो घटना की सूचना के आठ घंटे बाद भी महिला की खबर लेने अस्पताल तक नहीं पहुंची।
इस क्षेत्र में डीआईजी ऑफिस पर 24 घंटे पुलिस का पहरा होता है। पुलिसकर्मी दिनभर सर्किट हाउस के सामने चाय की चुस्की भी लेते रहे है। इसके बावजूद बदमाश दिनदहाडे़ पुलिस के सामने दुस्साहसिक वारदात कर आसानी से भाग जाएं तो पुलिस के लिए इससे ज्यादा शर्म की बात क्या होगी। बहादुरी तो महिला ने दिखाई, जिसने बदमाशों का डटकर मुकाबला किया। हद तो तब हो गई, जब वारदात के बाद भी पुलिस की नींद नहीं टूटी।
बदमाश आसानी से भाग निकले और पुलिस देखती रही। पुलिसकर्मियों से घटनाक्रम के बारे में पूछा गया तो साफ इनकार किया। लोगों ने सिविल लाइन पुलिस को फोन पर सूचना दी, फिर भी कोई अस्पताल तक नहीं पहुंचा।
लूट हुई तो थाने आकर तहरीर दो
कार्यवाहक एसओ सिविल लाइन का कहना है कि महिला से लूट की सूचना तो आई थी। फैंटम भी भेजी गई थी, लेकिन मौके पर कोई नहीं मिला। जिस महिला से लूटपाट हुई, वह थाने आकर तहरीर तो देती। यह मामला झूठा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि गंभीर रूप से घायल महिला के परिजन उसका इलाज कराएं या पुलिस के चक्कर लगाते फिरें।