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250 कर्मचारियों का नहीं तैनाती रिकॉर्ड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Mar 2017 02:06 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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घोटालों के स्वास्थ्य विभाग में अब प्रत्येक कर्मचारी का बायोमैट्रिक डाटा संकलित होने पर करोड़ों का गड़बड़झाला सामने आ रहा है। 1176 लोगों के स्टाफ में से 250 ऐसे चिकित्सक से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं, जो हर माह वेतन तो बराबर ले रहे हैं, लेकिन उनकी तैनाती का कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा। हैरानी की बात यह है कि सीएमओ कार्यालय ने इस पूरे खेल पर पल्ला झाड़ते हुए कह दिया है कि हमने तो सभी का बायोमैट्रिक रिकॉर्ड मुहैया करा दिया है। इस प्रकरण की जांच शुरू हो गई है।
यह है मामला
शासन के आदेश पर प्रत्येक सरकारी विभाग में बायोमैट्रिक हाजिरी लगाने की कवायद शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग में भी इसके चलते सभी जिलों में चिकित्सकों और फार्मेसिस्ट से लेकर हर श्रेणी के कर्मचारी का बाटोमैट्रिक डाटा लिया गया। स्थानीय जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, एडी कार्यालय, रीजनल फैमिली वेलफेयर ट्रेनिंग सेंटर से लेकर सीएमओ के अधीन संचालित पीएचसी, सीएचसी और उपकेंद्रों पर तैनात स्टाफ का बायोमैट्रिक डाटा इकट्ठा किया गया।
लखनऊ में फूटा भांडा
लंबी चौड़ी कवायद के बाद जब जिले का यह बायोमैट्रिक डाटा लखनऊ मुख्यालय में मिलान के लिए भेजा गया तो भांडा फूट गया। चौंकाने वाली जानकारी मिली कि शासन से जिले में तैनात 1176 लोगों को सैलरी दी जा रही है। लेकिन सीएमओ कार्यालय से केवल 926 लोगों का डाटा मुहैया कराया गया। ऐसे में उन 250 कर्मचारियों का दोबारा से बायोमैट्रिक डाटा मांगा गया, जो इस सूची में गड़बड़ थे। लेकिन सीएमओ कार्यालय की तरफ से कहा गया कि हमारी तरफ से पूरे स्टाफ का बायोमैट्रिक रिकॉर्ड मुहैया करा दिया गया है।
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वेतन के नाम पर करोड़ों का खेल
शासन से जारी होने वाली सैलरी और जिले से मुहैया कराए गए डाटा में बड़ा अंतर सामने आने पर सीधे-सीधे करोड़ों रुपये के घोटाले की सुगबुगाहट है। क्योंकि बड़ा सवाल यहां यह है कि वे 250 कर्मचारी कौन हैं, जिनका शासन से तो वेतन रिलीज हो रहा है और इनमें काफी स्टाफ जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर तैनात दिखाया गया। लेकिन इनका बायोमैट्रिक रिकॉर्ड गायब है। यदि यह कर्मचारी काम कर रहे हैं तो फिर इनका रिकार्ड कहां हैं?
ज्वाइन किया, आए नहीं
बताया गया कि अधिकांश स्टाफ संविदा से जुड़ा है। वहीं, इनमें कुछ स्थायी चिकित्सक भी शामिल हैं, जो ज्वाइन करने के बाद कभी आए ही नहीं। अब मामला पकड़े जाने के डर से ये लापता हो गए हैं। ऐसे में यह सारा खेल करोड़ों के घोटाले का हो सकता है। जिला स्वास्थ्य विभाग से शासन तक मचे इस हड़कंप के बीच अब इसकी जांच शुरू हो गई है।
हर कर्मचारी का होगा सत्यापन
लखनऊ मुख्यालय की तरफ से ऐसे हर कर्मचारी का सत्यापन शुरू करा दिया गया है, जिनका बायोमैट्रिक डाटा मिल चुका है। उनका भी फोन कॉल कर सत्यापन किया जा रहा है। उनका नाम, स्थायी पता, आधार नंबर से लेकर पद व वरिष्ठता नंबर तक पूछा जा रहा है। ऐसे में वास्तविक तस्वीर सही तरह से सत्यापन का काम पूरा होने के बाद ही सामने आ पाएगी। बताया जा रहा है कि शासन से एक टीम इन कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन करने के लिए मेरठ आने की तैयारी कर रही है।
लखनऊ से यह कहा गया है कि जब वेतन ज्यादा कर्मचारियों का दिया जा रहा है तो डाटा कम कर्मचारियों का क्यों भेजा है? इस बाबत हम जांच कर रहे हैं। सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों का वेरिफिकेशन भी शुरू किया गया है - डा. गोपाल सिंह डिप्टी सीएमओ एवं प्रभारी मानव संपदा
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यह है मामला
शासन के आदेश पर प्रत्येक सरकारी विभाग में बायोमैट्रिक हाजिरी लगाने की कवायद शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग में भी इसके चलते सभी जिलों में चिकित्सकों और फार्मेसिस्ट से लेकर हर श्रेणी के कर्मचारी का बाटोमैट्रिक डाटा लिया गया। स्थानीय जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, एडी कार्यालय, रीजनल फैमिली वेलफेयर ट्रेनिंग सेंटर से लेकर सीएमओ के अधीन संचालित पीएचसी, सीएचसी और उपकेंद्रों पर तैनात स्टाफ का बायोमैट्रिक डाटा इकट्ठा किया गया।
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लखनऊ में फूटा भांडा
लंबी चौड़ी कवायद के बाद जब जिले का यह बायोमैट्रिक डाटा लखनऊ मुख्यालय में मिलान के लिए भेजा गया तो भांडा फूट गया। चौंकाने वाली जानकारी मिली कि शासन से जिले में तैनात 1176 लोगों को सैलरी दी जा रही है। लेकिन सीएमओ कार्यालय से केवल 926 लोगों का डाटा मुहैया कराया गया। ऐसे में उन 250 कर्मचारियों का दोबारा से बायोमैट्रिक डाटा मांगा गया, जो इस सूची में गड़बड़ थे। लेकिन सीएमओ कार्यालय की तरफ से कहा गया कि हमारी तरफ से पूरे स्टाफ का बायोमैट्रिक रिकॉर्ड मुहैया करा दिया गया है।
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वेतन के नाम पर करोड़ों का खेल
शासन से जारी होने वाली सैलरी और जिले से मुहैया कराए गए डाटा में बड़ा अंतर सामने आने पर सीधे-सीधे करोड़ों रुपये के घोटाले की सुगबुगाहट है। क्योंकि बड़ा सवाल यहां यह है कि वे 250 कर्मचारी कौन हैं, जिनका शासन से तो वेतन रिलीज हो रहा है और इनमें काफी स्टाफ जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर तैनात दिखाया गया। लेकिन इनका बायोमैट्रिक रिकॉर्ड गायब है। यदि यह कर्मचारी काम कर रहे हैं तो फिर इनका रिकार्ड कहां हैं?
ज्वाइन किया, आए नहीं
बताया गया कि अधिकांश स्टाफ संविदा से जुड़ा है। वहीं, इनमें कुछ स्थायी चिकित्सक भी शामिल हैं, जो ज्वाइन करने के बाद कभी आए ही नहीं। अब मामला पकड़े जाने के डर से ये लापता हो गए हैं। ऐसे में यह सारा खेल करोड़ों के घोटाले का हो सकता है। जिला स्वास्थ्य विभाग से शासन तक मचे इस हड़कंप के बीच अब इसकी जांच शुरू हो गई है।
हर कर्मचारी का होगा सत्यापन
लखनऊ मुख्यालय की तरफ से ऐसे हर कर्मचारी का सत्यापन शुरू करा दिया गया है, जिनका बायोमैट्रिक डाटा मिल चुका है। उनका भी फोन कॉल कर सत्यापन किया जा रहा है। उनका नाम, स्थायी पता, आधार नंबर से लेकर पद व वरिष्ठता नंबर तक पूछा जा रहा है। ऐसे में वास्तविक तस्वीर सही तरह से सत्यापन का काम पूरा होने के बाद ही सामने आ पाएगी। बताया जा रहा है कि शासन से एक टीम इन कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन करने के लिए मेरठ आने की तैयारी कर रही है।
लखनऊ से यह कहा गया है कि जब वेतन ज्यादा कर्मचारियों का दिया जा रहा है तो डाटा कम कर्मचारियों का क्यों भेजा है? इस बाबत हम जांच कर रहे हैं। सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों का वेरिफिकेशन भी शुरू किया गया है - डा. गोपाल सिंह डिप्टी सीएमओ एवं प्रभारी मानव संपदा