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पब्लिक ने दरोगा को दौड़ाया, बमुश्किल बची जान
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 10 Dec 2015 01:38 AM IST
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चुनावी फायरिंग में घायल युवक के परिजनों के कोरे कागज पर साइन लेने को लेकर दरोगा को जान बचानी मुश्किल भारी पड़ गई। मारपीट से बचने के लिए भागे दरोगा को लोगों ने अस्पताल से लेकर डिफेंस एंकलेव के गेट तक दौड़ा लिया। बाद में पुलिस अफसरों ने पहुंचकर मामले को संभाला।
पुलिस के अनुसार सरधना के गांव झिटकरी में प्रधानी के चुनाव में हुई फायरिंग में एक समर्थक गोली लगने से घायल हो गया था। उसे स्थानीय कैलाशी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में घायल के परिजनों के अलावा काफी लोग जमा थे। आरोप है कि इस दौरान वहां पहुंचे सरधना थाने के दरोगा संजीव कुमार ने पूछताछ के दौरान परिजनों से कोरे कागज पर साइन करवाने शुरू कर दिए। जिस पर परिजन भड़क गए।
जबकि जबकि दरोगा का कहना था कि वह तो घायल के साथ आए लोगों के साइन करवा रहा था। गुस्साए लोगों ने दरोगा से मारपीट का प्रयास किया तो चिकित्सक बीच में आ गए। और दरोगा को पीछे वाले रास्ते से बाहर निकाल दिया। उसके बाद लोग दरोगा के पीछे भाग लिए। खुद को घिरता देख दरोगा ने अपनी पिस्टल निकालकर लोगों को चेतावनी भी दी लेकिन वे नहीं रुके। दरोगा भागता भागता सरधना रोड स्थित डिफेंस एंकलेव में आकर छिप गया। दरोगा की सूचना पर हड़कंप मच गया। एसपी देहात, सीओ और इंस्पेक्टर दौराला फोर्स लेकर पहुंचे तो पब्लिक भाग गई।
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अंधेरे ने बचा ली जान ली
अफसर जब पहुंचे तो दरोगा काफी सहमा हुआ था। बोला कि साहब अगर रात न होकर दिन होता तो पब्लिक उसे जान से मार देती। अंधेरे की वजह से उसकी जान बची। इंस्पेक्टर एसके राणा का कहना है कि ऑन ड्यूटी दरोगा पर लोगों ने जानलेवा हमले का प्रयास किया है। हमलावरों की पहचान कराकर गिरफ्तारी की जाएगी।
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पुलिस के अनुसार सरधना के गांव झिटकरी में प्रधानी के चुनाव में हुई फायरिंग में एक समर्थक गोली लगने से घायल हो गया था। उसे स्थानीय कैलाशी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में घायल के परिजनों के अलावा काफी लोग जमा थे। आरोप है कि इस दौरान वहां पहुंचे सरधना थाने के दरोगा संजीव कुमार ने पूछताछ के दौरान परिजनों से कोरे कागज पर साइन करवाने शुरू कर दिए। जिस पर परिजन भड़क गए।
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जबकि जबकि दरोगा का कहना था कि वह तो घायल के साथ आए लोगों के साइन करवा रहा था। गुस्साए लोगों ने दरोगा से मारपीट का प्रयास किया तो चिकित्सक बीच में आ गए। और दरोगा को पीछे वाले रास्ते से बाहर निकाल दिया। उसके बाद लोग दरोगा के पीछे भाग लिए। खुद को घिरता देख दरोगा ने अपनी पिस्टल निकालकर लोगों को चेतावनी भी दी लेकिन वे नहीं रुके। दरोगा भागता भागता सरधना रोड स्थित डिफेंस एंकलेव में आकर छिप गया। दरोगा की सूचना पर हड़कंप मच गया। एसपी देहात, सीओ और इंस्पेक्टर दौराला फोर्स लेकर पहुंचे तो पब्लिक भाग गई।
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अंधेरे ने बचा ली जान ली
अफसर जब पहुंचे तो दरोगा काफी सहमा हुआ था। बोला कि साहब अगर रात न होकर दिन होता तो पब्लिक उसे जान से मार देती। अंधेरे की वजह से उसकी जान बची। इंस्पेक्टर एसके राणा का कहना है कि ऑन ड्यूटी दरोगा पर लोगों ने जानलेवा हमले का प्रयास किया है। हमलावरों की पहचान कराकर गिरफ्तारी की जाएगी।