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मेडिकल इमरजेंसी से तीन युवकों को उठाने पर बवाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2016 02:37 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में छात्र को देखने पहुंचे संगीत सोम
- फोटो : अमर उजाला
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रिठानी में दो समुदाय के बीच हुई मारपीट में घायल तीन युवकों को सोमवार को परतापुर पुलिस मेडिकल इमरजेंसी में डॉक्टरों को धमकाकर जबरन उठा ले गई। दिन में परिजनों ने पुलिस पर एनकाउंटर की साजिश का आरोप लगाते हुए बवाल काटा तो रात में भाजपा विधायकों ने सैकड़ों समर्थकों के साथ मेडिकल इमरजेंसी घेर ली।
भाजपा विधायक के सामने ऊंची आवाज में बोलने पर भीड़ ने एसओ परतापुर से हाथापाई कर दी। विधायक ने एसएसपी से कहा कि सत्ता के पक्ष में एकतरफा कार्रवाई की तो फिर पुलिस प्रशासन नतीजे के लिए तैयार रहे।
परतापुर के रिठानी में रविवार रात कार टकराने के बाद रिठानी निवासी सनी, सतेंद्र और हर्ष व कोतवाली निवासी इरफान, रिहान और नौशाद पक्ष के बीच मारपीट हो गई थी। सोमवार को जिला अस्पताल से सनी, हर्ष और सतेंद्र को मेडिकल इमरजेंसी में रेफर किया गया था।
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परतापुर एसओ रण सिंह यादव सोमवार सुबह 11:45 बजे तीनों आरोपियों को जबरन उठाकर ले गए। परिजनों ने पुलिस पर एनकाउंटर करने की साजिश करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।
जिसके बाद परिजनों ने ग्रामीणों के साथ भाजपा नेताओं को घटना की जानकारी दी। परिजनों ने कहा कि पुलिस सत्ता के दबाव में काम कर रही है। करीब तीन घंटे बाद परतापुर पुलिस फिर पहुंची और तीनों की डिस्चार्ज स्लिप मांगी तो चिकित्सकों से नोकझोंक हो गई।
चिकित्सकों ने साफ कह दिया कि मरीज भर्ती कराए बिना स्लिप नहीं देंगे।
रात में दक्षिण विधायक रविंद्र भड़ाना, शहर विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी मेडिकल पहुंच गए। विधायकों ने एसओ परतापुर से जवाब मांगा तो एसओ ने नियम, कानून का हवाला दे दिया। इस पर विधायक भड़क गए, भीड़ ने एसओ परताुपर और पुलिस के साथ हाथापाई कर दी।
एसओ ने खुद को घिरा देखकर पुलिस अफसरों को सूचना दी।
मामला निपटा भी नहीं था कि भाजपा विधायक संगीत सोम, भाजपा महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, संयुक्त व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष अरुण वशिष्ठ, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा और सोमेंद्र तोमर भी पहुंच गए।
जिसके बाद भाजपाइयों ने नारेबाजी, हंगामा कर दिया। विधायक संगीत सोम ने एसएसपी को फोन करते हुए कहा कि जिले में तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी। गिरफ्तारी होगी तो दोनों पक्षों की होगी। भाजपाइयों ने धरना देने की बात कही तो पुलिस अफसरों में हड़कंप मच गया।
सीओ सिविल लाइन, एसओ मेडिकल, इंस्पेक्टर नौचंदी, इंस्पेक्टर सिविल लाइन के अलावा पीएसी भी मौके पर बुला ली गई। बवाल होता देख परतापुर पुलिस ने तीनों घायलों को मेडिकल में भर्ती करा दिया।
कोर्ट ले जा रहे हैं
एसओ जब तीनों को इमरजेंसी से ले जा रहे थे तो स्टाफ के विरोध करने पर कहा कि बस तीनों को कोर्ट में बयान कराने ले जा रहे हैं। इसके बाद फिर भर्ती करा देंगे। ऐसे में परिजन कोर्ट में पहुंचे तो वहां पर किसी भी आरोपों को पेश नहीं किया गया।
शाम करीब 4:15 बजे फिर परतापुर पुलिस इमरजेंसी पहुंची और जूनियर डॉक्टरों से तीनों आरोपियों की डिस्चार्ज रसीद मांग ली। डॉक्टरों ने नियम बताए तो पुलिस वालों ने कहा कि मामला ऊपर से जुड़ा है। तीनों आरोपी कोर्ट में खड़े है। अगर कोर्ट पूछेगी तो जवाबदेही आपकी होगी।
हमें नहीं फंसना है
ईएमओ डॉ. अजीत चौधरी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि आप लोग हमारी बिना मर्जी के तीनों लोगों को कैसे लेकर गए। अगर वो तीनों स्वस्थ थे तो हम डिस्चार्ज करते। लेकिन आप जिस तरह से तीनों को उठाकर ले गए हैं, उससे आपके ऊपर संदेह खड़ा होता है।
हमें नहीं फंसना है। आप लोग बिना किसी सूचना के उन्हें ले गए हैं. इसकी सूचना थाना मेडिकल को भेज दी है।
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भाजपा विधायक के सामने ऊंची आवाज में बोलने पर भीड़ ने एसओ परतापुर से हाथापाई कर दी। विधायक ने एसएसपी से कहा कि सत्ता के पक्ष में एकतरफा कार्रवाई की तो फिर पुलिस प्रशासन नतीजे के लिए तैयार रहे।
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परतापुर के रिठानी में रविवार रात कार टकराने के बाद रिठानी निवासी सनी, सतेंद्र और हर्ष व कोतवाली निवासी इरफान, रिहान और नौशाद पक्ष के बीच मारपीट हो गई थी। सोमवार को जिला अस्पताल से सनी, हर्ष और सतेंद्र को मेडिकल इमरजेंसी में रेफर किया गया था।
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परतापुर एसओ रण सिंह यादव सोमवार सुबह 11:45 बजे तीनों आरोपियों को जबरन उठाकर ले गए। परिजनों ने पुलिस पर एनकाउंटर करने की साजिश करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया।
जिसके बाद परिजनों ने ग्रामीणों के साथ भाजपा नेताओं को घटना की जानकारी दी। परिजनों ने कहा कि पुलिस सत्ता के दबाव में काम कर रही है। करीब तीन घंटे बाद परतापुर पुलिस फिर पहुंची और तीनों की डिस्चार्ज स्लिप मांगी तो चिकित्सकों से नोकझोंक हो गई।
चिकित्सकों ने साफ कह दिया कि मरीज भर्ती कराए बिना स्लिप नहीं देंगे।
रात में दक्षिण विधायक रविंद्र भड़ाना, शहर विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी मेडिकल पहुंच गए। विधायकों ने एसओ परतापुर से जवाब मांगा तो एसओ ने नियम, कानून का हवाला दे दिया। इस पर विधायक भड़क गए, भीड़ ने एसओ परताुपर और पुलिस के साथ हाथापाई कर दी।
एसओ ने खुद को घिरा देखकर पुलिस अफसरों को सूचना दी।
मामला निपटा भी नहीं था कि भाजपा विधायक संगीत सोम, भाजपा महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, संयुक्त व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष अरुण वशिष्ठ, भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा और सोमेंद्र तोमर भी पहुंच गए।
जिसके बाद भाजपाइयों ने नारेबाजी, हंगामा कर दिया। विधायक संगीत सोम ने एसएसपी को फोन करते हुए कहा कि जिले में तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी। गिरफ्तारी होगी तो दोनों पक्षों की होगी। भाजपाइयों ने धरना देने की बात कही तो पुलिस अफसरों में हड़कंप मच गया।
सीओ सिविल लाइन, एसओ मेडिकल, इंस्पेक्टर नौचंदी, इंस्पेक्टर सिविल लाइन के अलावा पीएसी भी मौके पर बुला ली गई। बवाल होता देख परतापुर पुलिस ने तीनों घायलों को मेडिकल में भर्ती करा दिया।
कोर्ट ले जा रहे हैं
एसओ जब तीनों को इमरजेंसी से ले जा रहे थे तो स्टाफ के विरोध करने पर कहा कि बस तीनों को कोर्ट में बयान कराने ले जा रहे हैं। इसके बाद फिर भर्ती करा देंगे। ऐसे में परिजन कोर्ट में पहुंचे तो वहां पर किसी भी आरोपों को पेश नहीं किया गया।
शाम करीब 4:15 बजे फिर परतापुर पुलिस इमरजेंसी पहुंची और जूनियर डॉक्टरों से तीनों आरोपियों की डिस्चार्ज रसीद मांग ली। डॉक्टरों ने नियम बताए तो पुलिस वालों ने कहा कि मामला ऊपर से जुड़ा है। तीनों आरोपी कोर्ट में खड़े है। अगर कोर्ट पूछेगी तो जवाबदेही आपकी होगी।
हमें नहीं फंसना है
ईएमओ डॉ. अजीत चौधरी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि आप लोग हमारी बिना मर्जी के तीनों लोगों को कैसे लेकर गए। अगर वो तीनों स्वस्थ थे तो हम डिस्चार्ज करते। लेकिन आप जिस तरह से तीनों को उठाकर ले गए हैं, उससे आपके ऊपर संदेह खड़ा होता है।
हमें नहीं फंसना है। आप लोग बिना किसी सूचना के उन्हें ले गए हैं. इसकी सूचना थाना मेडिकल को भेज दी है।