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कुख्यात योगेश भदौड़ा की पत्नी सुमन भदौड़ा ने कोर्ट में किया सरेंडर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2016 02:37 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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कुख्यात योगेश भदौड़ा की पत्नी सुमन भदौड़ा ने बुधवार को पुलिस से सेटिंग कर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। दो साल पहले कचहरी में हुई नितिन गंजा की हत्या में सुमन नामजद है। वहीं छह माह पहले सुमन पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की बीच में आकर कलक्ट्रेट में खुलेआम जिला पंचायत अध्यक्ष को वोट देकर गई थी।
5 सितंबर 2014 को भरी कचहरी में बागपत के वजीदपुर गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर नितिन गंजा का मर्डर हुआ था। जिसमें योगेश भदौड़ा और उसकी पत्नी सुमन भदौड़ा समेत 15 लोग नामजद हुए थे। वांछित सुमन भदौड़ा ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। बुधवार को सुमन भदौड़ा कचहरी पहुंची और उसने सीजेएम की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
योगेश भदौड़ा की पत्नी के सरेंडर की सूचना लगते ही पुलिस फोर्स कचहरी पहुंची। पुलिस को अंदेशा था कि सुमन के साथ योगेश के शूटर आए होंगे। पुलिस ने कचहरी में चेकिंग कराई, लेकिन कोई नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि इस मामले में गवाहों और वादी ने सुमन भदौडा के पक्ष में शपथपत्र दिए थे, लेकिन पुलिस ने अपनी विवेचना में सुमन को हत्या में आरोपी बनाकर चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
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14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा
पुलिस की चार्जशीट में सुमन भदौड़ा को नितिन गंजा की हत्या का आरोपी माना गया है। जिसके आधार पर कोर्ट ने सुमन का सरेंडर प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उसे 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
सत्ताधारी नेता ने कराई सेटिंग
सुमन भदौड़ा के सरेंडर के मामले में चर्चा है कि एक सत्ताधारी नेता द्वारा पुलिस से सेटिंग कराई गई है। बता दें कि सात जनवरी 2016 को कलक्ट्रेट में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। जिला पंचायत सदस्य सुमन भदौड़ा अध्यक्ष प्रत्याशी सीमा प्रधान के साथ कलक्ट्रेट पर पहुंचीं और मतदान कर गाड़ी में बैठकर लौट गई। सवाल है कि अगर सुमन नितिन गंजा की हत्या में वांछित थी तो पुलिस ने उसको उस वक्त क्यों गिरफ्तार नहीं किया।
पुलिस अधिकारियाें ने बताया था कि सुमन भदौड़ा की नामजदगी गलत हुई है। सुमन के पक्ष में पीड़ित परिवार शपथपत्र लगा चुका है। बुधवार को सुमन ने अचानक कोर्ट में सरेंडर कर दिया। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस अधिकारी सुमन की नामजदगी गलत मानते हैं तो उन्होंने उसको क्लीन चिट क्यों नहीं दी। चार्जशीट में उसका नाम शामिल क्यों किया।
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5 सितंबर 2014 को भरी कचहरी में बागपत के वजीदपुर गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर नितिन गंजा का मर्डर हुआ था। जिसमें योगेश भदौड़ा और उसकी पत्नी सुमन भदौड़ा समेत 15 लोग नामजद हुए थे। वांछित सुमन भदौड़ा ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। बुधवार को सुमन भदौड़ा कचहरी पहुंची और उसने सीजेएम की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
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योगेश भदौड़ा की पत्नी के सरेंडर की सूचना लगते ही पुलिस फोर्स कचहरी पहुंची। पुलिस को अंदेशा था कि सुमन के साथ योगेश के शूटर आए होंगे। पुलिस ने कचहरी में चेकिंग कराई, लेकिन कोई नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि इस मामले में गवाहों और वादी ने सुमन भदौडा के पक्ष में शपथपत्र दिए थे, लेकिन पुलिस ने अपनी विवेचना में सुमन को हत्या में आरोपी बनाकर चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
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14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा
पुलिस की चार्जशीट में सुमन भदौड़ा को नितिन गंजा की हत्या का आरोपी माना गया है। जिसके आधार पर कोर्ट ने सुमन का सरेंडर प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उसे 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
सत्ताधारी नेता ने कराई सेटिंग
सुमन भदौड़ा के सरेंडर के मामले में चर्चा है कि एक सत्ताधारी नेता द्वारा पुलिस से सेटिंग कराई गई है। बता दें कि सात जनवरी 2016 को कलक्ट्रेट में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। जिला पंचायत सदस्य सुमन भदौड़ा अध्यक्ष प्रत्याशी सीमा प्रधान के साथ कलक्ट्रेट पर पहुंचीं और मतदान कर गाड़ी में बैठकर लौट गई। सवाल है कि अगर सुमन नितिन गंजा की हत्या में वांछित थी तो पुलिस ने उसको उस वक्त क्यों गिरफ्तार नहीं किया।
पुलिस अधिकारियाें ने बताया था कि सुमन भदौड़ा की नामजदगी गलत हुई है। सुमन के पक्ष में पीड़ित परिवार शपथपत्र लगा चुका है। बुधवार को सुमन ने अचानक कोर्ट में सरेंडर कर दिया। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस अधिकारी सुमन की नामजदगी गलत मानते हैं तो उन्होंने उसको क्लीन चिट क्यों नहीं दी। चार्जशीट में उसका नाम शामिल क्यों किया।