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किशोरों ने आरोप लगाए, लोगों ने सुनाई खरीखोटी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2016 02:02 AM IST
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राजकीय किशोर संप्रेक्षण गृह में टूटा सामान
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम बुधवार को सूरजकुंड स्थित राजकीय किशोर संप्रेक्षण गृह में जांच और निरीक्षण करने पहुंची। इस दौरान उन्होंने किशोरों और कर्मचारियों से अलग-अलग वार्ता करते हुए बवाल के कारणों की विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान किशोरों ने जहां संप्रेक्षण गृह के अफसरों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए तो स्थानीय लोगों ने सदस्यों को घेरकर खरीखोटी सुना दी। किशोरों की हरकतों से आजिज आ चुके स्थानीय लोगों और महिलाओं ने सदस्यों से कह दिया कि किशोरों को सुधारने की ज्यादा चिंता है तो यहां आकर रहो।
‘हमारा होता है यहां उत्पीड़न’
किशोरों ने टीम के सदस्यों को बताया कि उनका यहां उत्पीड़न किया जाता है। खाने की उचित व्यवस्था नहीं है और सख्ती होती है। लेकिन सबसे ज्यादा शिकायत किशोरों को इस बात से थी कि किशोर न्यायालय बोर्ड में उनकी पैरवी उचित ढंग से नहीं होती है। लगातार तारीखें मिलती रहती हैं। यदि समय रहते उनकी जमानत या केस का निस्तारण हो जाए तो उन्हें न्याय मिले। किशोरों ने कहा कि यहां उन्हें किसी कैदी की तरह रखा जाता है।
‘कौशल विकास मिशन से जोड़ें किशोर’
सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इन किशोरों के आधार कार्ड व बैंक खाते आदि बनवायें जाने की जानकारी ली गई है। इन किशोरों को संप्रेक्षण गृह में कौशल विकास मिशन के अंतर्गत उनकी रुचि के अनुसार उन्हें तकनीकी ट्रेडों में प्रशिक्षण दिलाना चाहिए। सदस्य यशवंत जैन ने बताया कि संरक्षण गृह में घटित घटना के संबंध में एक-एक किशोर से वार्ता कर विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई है, जिसके आधार पर कानून व मानकों के अनुरूप कार्यवाही हेतु रिपोर्ट दी जायेगी। इस दौरान एसीएम सिविल लाइन ज्योति राय, सीओ सिविल लाइन बीएस बीर कुमार, डीपीओ पुष्पेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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इसे सुधार गृह बनाएं
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस दौरान कहा कि संप्रेक्षण गृह को जेल नहीं, बल्कि सुधार गृह बनाएं। दोपहर करीब 3:30 बजे पहुंची इस पांच सदस्यीय टीम में सदस्य यशवंत जैन, राकेश भाटिया और दो एक्सपर्ट शेफाली अवस्थी व हिमानी नौटियाल शामिल थे।
‘जांच में हमारा दर्द भी तो करो शामिल’
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के सदस्यों को निरीक्षण से पहले ही स्थानीय लोगों ने घेरकर खरीखोटी सुना दी।
आक्रोश जताते हुए कहा कि यहां कानूनी नहीं, व्यावहारिक रूप से जांच करो। जांच में हमारी समस्याएं और दर्द को भी शामिल किया जाए।संप्रेक्षण गृह के आसपास रहने वाले दर्जनों लोगों ने आक्रोश जताते हुए आयोग के सदस्यों के सामने सवालों की बौछार कर दी।
लोगों ने संप्रेक्षण गृह के किशोरों द्वारा रोजाना की जाने वाली हरकतों को सदस्यों के समक्ष रखा तो सभी चुप्पी साध गए। काफी हंगामे के बाद आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि ये किशोर हैं, इन्हें सुधारने के लिए यहां लाया जाता है।
ऐसे में इन पर सख्ती से ये बिगड़ सकते हैं। यह जवाब सुनते ही लोगों ने खरी खोटी सुनानी शुरू कर दी। महिलाओं ने कहा कि यदि आप लोगों को इन्हें सुधारने की इतनी ही चिंता है तो खुद यहां आकर रहो। तब पता चलेगा कि यहां क्या-क्या होता है।
आए दिन घरों पर पथराव के साथ गालियां और अश्लील हरकतें झेलनी पड़ रही हैं। वृद्ध महिलाएं तक घरों से बाहर नहीं निकल पाती हैं। इस सुधार गृह में रोजाना नशा होता है। कॉलोनीवासियों के आक्रोश और सवालों की बौछारों में घिरी टीम चुप्पी साधकर चुपके से निकल गयी।
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‘हमारा होता है यहां उत्पीड़न’
किशोरों ने टीम के सदस्यों को बताया कि उनका यहां उत्पीड़न किया जाता है। खाने की उचित व्यवस्था नहीं है और सख्ती होती है। लेकिन सबसे ज्यादा शिकायत किशोरों को इस बात से थी कि किशोर न्यायालय बोर्ड में उनकी पैरवी उचित ढंग से नहीं होती है। लगातार तारीखें मिलती रहती हैं। यदि समय रहते उनकी जमानत या केस का निस्तारण हो जाए तो उन्हें न्याय मिले। किशोरों ने कहा कि यहां उन्हें किसी कैदी की तरह रखा जाता है।
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‘कौशल विकास मिशन से जोड़ें किशोर’
सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इन किशोरों के आधार कार्ड व बैंक खाते आदि बनवायें जाने की जानकारी ली गई है। इन किशोरों को संप्रेक्षण गृह में कौशल विकास मिशन के अंतर्गत उनकी रुचि के अनुसार उन्हें तकनीकी ट्रेडों में प्रशिक्षण दिलाना चाहिए। सदस्य यशवंत जैन ने बताया कि संरक्षण गृह में घटित घटना के संबंध में एक-एक किशोर से वार्ता कर विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई है, जिसके आधार पर कानून व मानकों के अनुरूप कार्यवाही हेतु रिपोर्ट दी जायेगी। इस दौरान एसीएम सिविल लाइन ज्योति राय, सीओ सिविल लाइन बीएस बीर कुमार, डीपीओ पुष्पेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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इसे सुधार गृह बनाएं
आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस दौरान कहा कि संप्रेक्षण गृह को जेल नहीं, बल्कि सुधार गृह बनाएं। दोपहर करीब 3:30 बजे पहुंची इस पांच सदस्यीय टीम में सदस्य यशवंत जैन, राकेश भाटिया और दो एक्सपर्ट शेफाली अवस्थी व हिमानी नौटियाल शामिल थे।
‘जांच में हमारा दर्द भी तो करो शामिल’
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के सदस्यों को निरीक्षण से पहले ही स्थानीय लोगों ने घेरकर खरीखोटी सुना दी।
आक्रोश जताते हुए कहा कि यहां कानूनी नहीं, व्यावहारिक रूप से जांच करो। जांच में हमारी समस्याएं और दर्द को भी शामिल किया जाए।संप्रेक्षण गृह के आसपास रहने वाले दर्जनों लोगों ने आक्रोश जताते हुए आयोग के सदस्यों के सामने सवालों की बौछार कर दी।
लोगों ने संप्रेक्षण गृह के किशोरों द्वारा रोजाना की जाने वाली हरकतों को सदस्यों के समक्ष रखा तो सभी चुप्पी साध गए। काफी हंगामे के बाद आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि ये किशोर हैं, इन्हें सुधारने के लिए यहां लाया जाता है।
ऐसे में इन पर सख्ती से ये बिगड़ सकते हैं। यह जवाब सुनते ही लोगों ने खरी खोटी सुनानी शुरू कर दी। महिलाओं ने कहा कि यदि आप लोगों को इन्हें सुधारने की इतनी ही चिंता है तो खुद यहां आकर रहो। तब पता चलेगा कि यहां क्या-क्या होता है।
आए दिन घरों पर पथराव के साथ गालियां और अश्लील हरकतें झेलनी पड़ रही हैं। वृद्ध महिलाएं तक घरों से बाहर नहीं निकल पाती हैं। इस सुधार गृह में रोजाना नशा होता है। कॉलोनीवासियों के आक्रोश और सवालों की बौछारों में घिरी टीम चुप्पी साधकर चुपके से निकल गयी।