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इकलौते चिराग में जिंदगी की आस
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 08 Oct 2015 02:33 AM IST
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ब्रह्मपुरी निवासी व्यापारी के इकलौते पुत्र की सोमवार तड़के डेंगू से मौत हो गई। घर का इकलौता चिराग असमय बुझने से परिवार में कोहराम मच गया। महज 11 साल के इस बच्चे के शव को सूरजकुंड स्थित शमशान घाट पर ले जाया गया। जहां पर अजीबोगरीब घटनाक्रम हुआ। एक युवक बोला कि यह बच्चा तो 52 साल की उम्र तक जिंदा रहेगा।
यह अभी नहीं मर सकता। किसी चमत्कार की उम्मीद से परिजन शव को वापस ले आए। दो दिन से घर में पूजा-पाठ चल रहा है। परिजनों को अभी भी बच्चे में प्राण लौटने की आशा है। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना है।
दरअसल, बच्चे को बुखार के चलते निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों ने उसको डेंगू होने की पुष्टि की थी। उपचार के दौरान बच्चे की सोमवार तड़के करीब पांच बजे मौत हो गई। रोते-बिलखते परिजन बच्चे के शव को घर ले आए थे। परिजनों और रिश्तेदारों में कोहराम मच गया।
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परिजन बच्चे का अंतिम संस्कार करने सूरजकुंड पर ले गए। यहां ऐसा कुछ हुआ कि परिजन अंतिम संस्कार करने के बजाए शव को वापस घर ले आए। जानकारी के अनुसार शमशान घाट में मौजूद एक युवक ने बच्चे का चेहरा देखकर कह दिया कि यह बच्चा अभी नहीं मर सकता। यह तो 52 साल की उम्र लेकर आया है। अभी तो 11 साल ही हुए हैं। परिवार के लोगों को उक्त युवक ने घर पर ले जाकर 72 घंटे तक पूजापाठ करने की सलाह दे दी।
इसे अंधविश्वास कहें या फिर किसी चमत्कार की आशा। हर तरफ से निराश हो चुके परिजनों को उम्मीद की एक किरण नजर आई। वे तुरंत बच्चे के शव को घर वापस ले आए। जहां सोमवार से बुधवार देर रात तक पूजा पाठ चलता रहा। परिजनों को उम्मीद है कि 72 घंटे में उनके इकलौते चिराग में जान जरूर आएगी। इस मामले को लेकर आसपास के लोग भी हैरान है। सूचना पाकर थाना ब्रह्मपुरी पुलिस की फैंटम भी पहुंची। लेकिन इसे धार्मिक मान्यता से जोड़कर परिजनों से बात कर वापस लौट गई।
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यह अभी नहीं मर सकता। किसी चमत्कार की उम्मीद से परिजन शव को वापस ले आए। दो दिन से घर में पूजा-पाठ चल रहा है। परिजनों को अभी भी बच्चे में प्राण लौटने की आशा है। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना है।
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दरअसल, बच्चे को बुखार के चलते निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों ने उसको डेंगू होने की पुष्टि की थी। उपचार के दौरान बच्चे की सोमवार तड़के करीब पांच बजे मौत हो गई। रोते-बिलखते परिजन बच्चे के शव को घर ले आए थे। परिजनों और रिश्तेदारों में कोहराम मच गया।
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परिजन बच्चे का अंतिम संस्कार करने सूरजकुंड पर ले गए। यहां ऐसा कुछ हुआ कि परिजन अंतिम संस्कार करने के बजाए शव को वापस घर ले आए। जानकारी के अनुसार शमशान घाट में मौजूद एक युवक ने बच्चे का चेहरा देखकर कह दिया कि यह बच्चा अभी नहीं मर सकता। यह तो 52 साल की उम्र लेकर आया है। अभी तो 11 साल ही हुए हैं। परिवार के लोगों को उक्त युवक ने घर पर ले जाकर 72 घंटे तक पूजापाठ करने की सलाह दे दी।
इसे अंधविश्वास कहें या फिर किसी चमत्कार की आशा। हर तरफ से निराश हो चुके परिजनों को उम्मीद की एक किरण नजर आई। वे तुरंत बच्चे के शव को घर वापस ले आए। जहां सोमवार से बुधवार देर रात तक पूजा पाठ चलता रहा। परिजनों को उम्मीद है कि 72 घंटे में उनके इकलौते चिराग में जान जरूर आएगी। इस मामले को लेकर आसपास के लोग भी हैरान है। सूचना पाकर थाना ब्रह्मपुरी पुलिस की फैंटम भी पहुंची। लेकिन इसे धार्मिक मान्यता से जोड़कर परिजनों से बात कर वापस लौट गई।