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सनी अग्रवाल बर्खास्त, अमन तड़ीपार

Sun, 04 Oct 2015 01:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Sun, 04 Oct 2015 01:51 AM IST
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शहर के हाई प्रोफाइल एलेक्जेंडर क्लब में छेड़छाड़ को लेकर हुई घटना पर क्लब कार्यकारिणी ने सख्त कदम उठाया है। छेड़छाड़ के आरोपी सनी अग्रवाल को क्लब से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं दूसरे सदस्य अमन अग्रवाल पर क्लब में घुसने पर तीन माह का प्रतिबंध लगाया है।

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सुर्खियों में छाए इस प्रकरण को लेकर शनिवार को एलेक्जेंडर क्लब में कार्यकारिणी की बैठक हुई। क्लब के सचिव आलोक बंसल ने बताया कि इसमें सभी बुलाए गए सदस्यों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से आरोपी सनी अग्रवाल को क्लब से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण ने क्लब की छवि धूमिल की है। ऐसे में सनी को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। दूसरे सदस्य अमन अग्रवाल पर तीन माह का प्रतिबंध लगाया गया है।
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यह है पूरा प्रकरण
एलेक्जेंडर क्लब में बुधवार को पार्टी का आयोजन किया गया था। गोल्डन पॉम रिसॉर्ट के मालिक सनी अग्रवाल इसके सदस्य हैं। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने पार्टी से निकल रही एक बिल्डर की बहन के साथ छेड़छाड़ कर दी। मौके पर जमकर हंगामा और मारपीट हुई। मामला तूल पकड़ गया था। पुलिस भी पहुंची थी। सनी के खिलाफ थाना सिविल लाइन में छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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अमन ने की थी पार्टी की बुकिंग
क्लब के सचिव आलोक बंसल के मुताबिक उस पार्टी की बुकिंग क्लब के सदस्य अमन अग्रवाल ने की थी और वे ही पार्टी में मौजूद नहीं थे। उन्हें होना चाहिए था। जो भी पार्टी में आए वे उनके मेहमान थे। यह कृत्य पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। यही कारण है कि बैठक में अमन को भी तीन माह के लिए क्लब में प्रवेश से प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि सदस्य इस तरह बुकिंग कर खुद ही कार्यक्रम में मौजूद न हों, तो फिर कैसे चलेगा?

काम न आई समझौते की कवायद
इस प्रकरण को लेकर शुक्रवार को समझौते की कवायद की गई थी और लगभग मुहर लग गई थी। समाजसेवी दयानंद गुप्ता के आवास पर दोनों पक्ष के लोगों की मीटिंग हुई। जिसमें माफीनामा भी कराया गया। मीटिंग में मामले को निपटाने की बात चली। लेकिन नतीजा क्या हुआ, इसे लेकर दोनों पक्षों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं आया। हालांकि इंस्पेक्टर सिविल लाइन इकबाल अहमद कलीम का दावा था कि दोनों पक्षों ने उन्हें फोन कर समझौते की जानकारी दी। विवेचक को दोनों पक्षों की ओर से लिखित में समझौते का प्रार्थना पत्र भी आ गया है। इसके बावजूद क्लब प्रशासन ने सख्ती भरा रवैया अपनाया।



कार्यकारिणी को यह अधिकार नहीं है और न ही यह नियम है कि मुझे इस तरह से बर्खास्त कर दिया जाए। न मुझे बैठक की कोई सूचना दी गई। न ही कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। मुझ पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ है। ऐसे में बिना वजह मुझे कैसे टर्मिनेट किया जा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से गलत है। मैं इस बाबत कानूनी कार्रवाई करूंगा। - सनी अग्रवाल

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