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एएचटीयू ने पकड़ीं दो सेक्स वर्कर
Tue, 30 Apr 2019 03:30 AM IST
Gaurav sharma
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Gaurav sharma
Updated Tue, 30 Apr 2019 03:30 AM IST
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कबाड़ी बाजार मेरठ
- फोटो : अमर उजाला
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तमाम बंदिशों के बावजूद कबाड़ी बाजार में सेक्स वर्करों की मौजूदगी देखने को मिल रही है। एएचटीयू ने सोमवार को कबाड़ी बाजार स्थित रेड लाइट एरिया से राजस्थान की दो सेक्स वर्कर पकड़ी हैं। हालांकि पुलिस ने दोनों सेक्स वर्करों को माधवपुरम से गिरफ्तार होना दर्शाया है। ये सेक्स वर्कर ऐसे मौके पर पकड़ी गई हैं जबकि हाईकोर्ट में चल रहे रेड लाइट एरिया प्रकरण में आज मंगलवार को एसएसपी मेरठ नितिन तिवारी को जवाब दाखिल करना है।
गौरतलब है कि कबाड़ी बाजार स्थित रेड लाइट एरिया का मामला सुर्खियों में आते ही पिछले चार से पांच दिनों में यहां से सेक्स वर्करों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया गया था। पुलिस सूत्रों की ही मानें तो रविवार को ही सामने आया कि पिछले दो से तीन दिनों में मेरठ से सौ से ज्यादा सेक्स वर्करों को दिल्ली के रेड लाइट एरिया में शिफ्ट किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या राजस्थान, नेपाल, मध्यप्रदेश आदि राज्यों की लड़कियों की है। बताया गया कि यह सब कवायद कोठों पर पुलिस-प्रशासन की छापामार कार्रवाई से बचने के लिए हो रही है। सोमवार को जो सेक्स वर्कर पकड़ी गई हैं वे मेरठ से बाहर की बताई गईं। इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी रघुराज सिंह का कहना है कि दोनों सेक्स वर्कर राजस्थान की हैं, जो रेड लाइट एरिया से भागकर माधवपुरम इलाके में आकर छिपी हुई थीं। मुखबिर की सूचना पर उन्हें सोमवार को एएचटीयू की पुलिस के साथ रेस्क्यू कराया गया। बता दें कि हाईकोर्ट में पुलिस की तरफ से बताया गया था कि कबाड़ी बाजार के रेड लाइट एरिया में देह व्यापार नहीं चल रहा है।
कबाड़ी बाजार मामले में आज होगी सुनवाई
मेरठ। कबाड़ी बाजार में चल रहे कोठों को लेकर आज हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के रुख के बाद अब आगे की कार्रवाई भी तय होगी। लेकिन इस पूरे प्रकरण में पुलिस-प्रशासन द्वारा जारी नोटिस को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। क्योंकि इस नोटिस के आधार पर भवन मालिक कोठा संचालिकाओं से मिलकर अब कोर्ट जाने की तैयारी में लग गए हैं।
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कबाड़ी बाजार के रेड लाइट एरिया में कोठों पर देह व्यापार चलने की शिकायतों पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी। जिस पर 26 अप्रैल को सुनवाई के दौरान पुलिस-प्रशासन की काफी किरकिरी हुई थी। क्योंकि सीएमओ और पुलिस की रिपोर्ट में विरोधाभास था। सीएमओ की रिपोर्ट जहां यहां देह व्यापार होना पुष्ट कर रही है, तो पुलिस इससे इंकार कर रही है। जिस पर हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने सभी को कड़ी फटकार लगाते हुए 30 अप्रैल को जवाब देने का निर्देश दिया था।
इस मामले में शनिवार शाम पुलिस-प्रशासन ने मिलकर 50 नोटिस जारी किये। लेकिन यह नोटिस कोठा संचालिकाओं के बजाय जिस भवन में कोठे चल रहे हैं, उनके मालिकों को जारी किए गए। यह रिकॉर्ड पुलिस-प्रशासन ने नगर निगम के भवन कर रिकॉर्ड से प्राप्त किया। इन नोटिसों के तामील होने के बाद अब नोटिस प्राप्त करने वाले आधा दर्जन से ज्यादा लोगोें ने हाईकोर्ट का रुख किया है। इस मामले में विधि विशेषज्ञों के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद यह मामला फंस सकता है। क्योंकि भवन मालिक इस नोटिस को आधार बनाकर स्टे ले सकते हैं।
आज होगा रुख तय
हाईकोर्ट में पुलिस विभाग अपना हलफनामा पेश करेगा। इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर कोठों को लेकर आगे की कार्रवाई का रुख तय होगा।
कार्रवाई को मांगा दो माह का समय
कोर्ट ने लापरवाह और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। लेकिन पुलिस-प्रशासन की तरफ से इस कार्रवाई के लिए सोमवार को दाखिल आवेदन में दो माह का समय मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार जिला उद्धार अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों पर इस मामले में गाज गिर सकती है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच खिंची तलवार
मेरठ। कबाड़ी बाजार मामले में पुलिस की जो किरकिरी हुई है, अब उसका ठीकरा स्वास्थ्य विभाग पर फोड़ने की तैयारी हो रही है। इसका आधार भी बहुत सोच समझकर बनाया गया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग से उस सूची को तलब किए जाने की तैयारी हो रही है, जहां पर उन्होंने कंडोम बांटे हैं।
कबाड़ी बाजार प्रकरण में पुलिस-प्रशासन सीएमओ द्वारा दी गई उस रिपोर्ट के कारण फंसा है, जिसमें सीएमओ ने एक एनजीओ के सर्वे और कोठों पर 20 हजार कंडोम बांटने के साथ वहां एचआईवी पीड़ित युवतियों के होने की बात कही। जबकि पुलिस कोठों पर देह व्यापार जैसा अनैतिक काम होने से पूरी तरह इंकार कर चुकी है। इसी पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जमकर हड़काया था।
अब पुलिस-प्रशासन ने नगर निगम के भवन कर विभाग से कबाड़ी बाजार के भवन मालिकों की सूची तलब की है। इस सूची के आधार पर जहां पर कोठे संचालित हैं, उन भवनों को चिह्नित किया गया। इन भवन के मालिक भी निगम रिकॉर्ड में व्यापारी ही निकले। इसी को आधार बनाकर अब स्वास्थ्य विभाग को घेरने की तैयारी हो रही है। सूत्रों की मानें तो एक अधिकारी ने सीएमओ को नोटिस भेजे जाने की तैयारी चलने की बात कही है। अधिकारी का कहना है कि सीएमओ से वह सूची तलब की जाएगी, जहां-जहां पर कबाड़ी बाजार में कंडोम वितरित किए गए हैं।
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गौरतलब है कि कबाड़ी बाजार स्थित रेड लाइट एरिया का मामला सुर्खियों में आते ही पिछले चार से पांच दिनों में यहां से सेक्स वर्करों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया गया था। पुलिस सूत्रों की ही मानें तो रविवार को ही सामने आया कि पिछले दो से तीन दिनों में मेरठ से सौ से ज्यादा सेक्स वर्करों को दिल्ली के रेड लाइट एरिया में शिफ्ट किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या राजस्थान, नेपाल, मध्यप्रदेश आदि राज्यों की लड़कियों की है। बताया गया कि यह सब कवायद कोठों पर पुलिस-प्रशासन की छापामार कार्रवाई से बचने के लिए हो रही है। सोमवार को जो सेक्स वर्कर पकड़ी गई हैं वे मेरठ से बाहर की बताई गईं। इंस्पेक्टर ब्रह्मपुरी रघुराज सिंह का कहना है कि दोनों सेक्स वर्कर राजस्थान की हैं, जो रेड लाइट एरिया से भागकर माधवपुरम इलाके में आकर छिपी हुई थीं। मुखबिर की सूचना पर उन्हें सोमवार को एएचटीयू की पुलिस के साथ रेस्क्यू कराया गया। बता दें कि हाईकोर्ट में पुलिस की तरफ से बताया गया था कि कबाड़ी बाजार के रेड लाइट एरिया में देह व्यापार नहीं चल रहा है।
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कबाड़ी बाजार मामले में आज होगी सुनवाई
मेरठ। कबाड़ी बाजार में चल रहे कोठों को लेकर आज हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के रुख के बाद अब आगे की कार्रवाई भी तय होगी। लेकिन इस पूरे प्रकरण में पुलिस-प्रशासन द्वारा जारी नोटिस को लेकर सवाल खड़ा हो गया है। क्योंकि इस नोटिस के आधार पर भवन मालिक कोठा संचालिकाओं से मिलकर अब कोर्ट जाने की तैयारी में लग गए हैं।
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कबाड़ी बाजार के रेड लाइट एरिया में कोठों पर देह व्यापार चलने की शिकायतों पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी। जिस पर 26 अप्रैल को सुनवाई के दौरान पुलिस-प्रशासन की काफी किरकिरी हुई थी। क्योंकि सीएमओ और पुलिस की रिपोर्ट में विरोधाभास था। सीएमओ की रिपोर्ट जहां यहां देह व्यापार होना पुष्ट कर रही है, तो पुलिस इससे इंकार कर रही है। जिस पर हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने सभी को कड़ी फटकार लगाते हुए 30 अप्रैल को जवाब देने का निर्देश दिया था।
इस मामले में शनिवार शाम पुलिस-प्रशासन ने मिलकर 50 नोटिस जारी किये। लेकिन यह नोटिस कोठा संचालिकाओं के बजाय जिस भवन में कोठे चल रहे हैं, उनके मालिकों को जारी किए गए। यह रिकॉर्ड पुलिस-प्रशासन ने नगर निगम के भवन कर रिकॉर्ड से प्राप्त किया। इन नोटिसों के तामील होने के बाद अब नोटिस प्राप्त करने वाले आधा दर्जन से ज्यादा लोगोें ने हाईकोर्ट का रुख किया है। इस मामले में विधि विशेषज्ञों के अनुसार नोटिस जारी होने के बाद यह मामला फंस सकता है। क्योंकि भवन मालिक इस नोटिस को आधार बनाकर स्टे ले सकते हैं।
आज होगा रुख तय
हाईकोर्ट में पुलिस विभाग अपना हलफनामा पेश करेगा। इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर कोठों को लेकर आगे की कार्रवाई का रुख तय होगा।
कार्रवाई को मांगा दो माह का समय
कोर्ट ने लापरवाह और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। लेकिन पुलिस-प्रशासन की तरफ से इस कार्रवाई के लिए सोमवार को दाखिल आवेदन में दो माह का समय मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार जिला उद्धार अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों पर इस मामले में गाज गिर सकती है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच खिंची तलवार
मेरठ। कबाड़ी बाजार मामले में पुलिस की जो किरकिरी हुई है, अब उसका ठीकरा स्वास्थ्य विभाग पर फोड़ने की तैयारी हो रही है। इसका आधार भी बहुत सोच समझकर बनाया गया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग से उस सूची को तलब किए जाने की तैयारी हो रही है, जहां पर उन्होंने कंडोम बांटे हैं।
कबाड़ी बाजार प्रकरण में पुलिस-प्रशासन सीएमओ द्वारा दी गई उस रिपोर्ट के कारण फंसा है, जिसमें सीएमओ ने एक एनजीओ के सर्वे और कोठों पर 20 हजार कंडोम बांटने के साथ वहां एचआईवी पीड़ित युवतियों के होने की बात कही। जबकि पुलिस कोठों पर देह व्यापार जैसा अनैतिक काम होने से पूरी तरह इंकार कर चुकी है। इसी पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जमकर हड़काया था।
अब पुलिस-प्रशासन ने नगर निगम के भवन कर विभाग से कबाड़ी बाजार के भवन मालिकों की सूची तलब की है। इस सूची के आधार पर जहां पर कोठे संचालित हैं, उन भवनों को चिह्नित किया गया। इन भवन के मालिक भी निगम रिकॉर्ड में व्यापारी ही निकले। इसी को आधार बनाकर अब स्वास्थ्य विभाग को घेरने की तैयारी हो रही है। सूत्रों की मानें तो एक अधिकारी ने सीएमओ को नोटिस भेजे जाने की तैयारी चलने की बात कही है। अधिकारी का कहना है कि सीएमओ से वह सूची तलब की जाएगी, जहां-जहां पर कबाड़ी बाजार में कंडोम वितरित किए गए हैं।