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गुरु
Updated Tue, 31 Oct 2017 03:06 AM IST
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गुरुग्राम पुलिस लेकर आई शव, जिंदा निकला छोटू
मेरठ। सोमवार को शहर में अजीब केस सामने आया। खुद को गुरुग्राम पुलिस बताकर सादी वर्दी में तीन युवक एंबुलेंस से जली कोठी पहुंचे। एंबुलेंस में छोटू नाम के एक युवक का शव था। परिजनों में शव देखते ही कोहराम मच गया। इस बीच किसी परिचित ने गुरुग्राम फोन लगाया तो छोटू जिंदा निकला। यह सुनते ही यह तथाकथित गुरुग्राम पुलिस शव को आनन-फानन में लेकर निकल गई। हैरानी की बात यह रही कि न तो लोकल पुलिस से संपर्क किया गया और न किसी अधिकारी से।
खुली आंखों से हुआ धोखा
लोगों के मुताबिक शव लाने वाली पुलिस ने बताया कि दो दिन पूर्व हादसे में युवक की मौत हुई थी। युवक की एक आंख खराब थी। पता चला था कि जलीकोठी का एक युवक वहां नौकरी करने आया था। वहीं, छोटू की भी एक आंख खराब है। वह भी काम करने मेरठ से गुरुग्राम गया था। इसलिए उसके परिजन एक बार को मान गए कि यह शव छोटू का है। लेकिन फोन कॉल से छोटू के जिंदा होने का पता चला तो वे युवक शव को तुरंत एंबुलेंस में डालकर ले गए।
आखिर किसका शव लाई पुलिस
अमूमन पुलिस परिजनों के साथ ही शव छोड़ने कहीं पहुंचती है। लेकिन यहां मामला दूसरा था। शव लेकर पहुंचने का इन युवकों का क्या मकसद था, इसको लेकर इलाके में चर्चा होती रही। इस बात की जानकारी लगने पर देहली गेट पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन उससे पहले वह युवक शव लेकर जा चुके थे।
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गले नहीं उतरा
शव लाने वाले युवक वर्दी में नहीं थे। खुद को गुरुग्राम पुलिस से बताया। लेकिन जिस एंबुलेंस में शव था, उसकी नंबर प्लेट पर लिखे रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर वह ज्योतिबा फुले नगर की थी। शव छोटू का बताना, फिर पहचान न होने पर बिना कुछ कहे या लोकल पुलिस या अधिकारी को बताए वापस लौटना संदेह पैदा करता है। वहीं, एसपी सिटी मान सिंह चौहान का कहना है कि तीन युवक एंबुलेंस में शव लेकर जली कोठी में आए थे। पहचान न होने पर वापस ले गए। पुलिस ऐसे किसका शव लेकर लाई, इसकी जांच कराई जा रही है। लोकल पुलिस को कोई जानकारी नहीं है।
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मेरठ। सोमवार को शहर में अजीब केस सामने आया। खुद को गुरुग्राम पुलिस बताकर सादी वर्दी में तीन युवक एंबुलेंस से जली कोठी पहुंचे। एंबुलेंस में छोटू नाम के एक युवक का शव था। परिजनों में शव देखते ही कोहराम मच गया। इस बीच किसी परिचित ने गुरुग्राम फोन लगाया तो छोटू जिंदा निकला। यह सुनते ही यह तथाकथित गुरुग्राम पुलिस शव को आनन-फानन में लेकर निकल गई। हैरानी की बात यह रही कि न तो लोकल पुलिस से संपर्क किया गया और न किसी अधिकारी से।
खुली आंखों से हुआ धोखा
लोगों के मुताबिक शव लाने वाली पुलिस ने बताया कि दो दिन पूर्व हादसे में युवक की मौत हुई थी। युवक की एक आंख खराब थी। पता चला था कि जलीकोठी का एक युवक वहां नौकरी करने आया था। वहीं, छोटू की भी एक आंख खराब है। वह भी काम करने मेरठ से गुरुग्राम गया था। इसलिए उसके परिजन एक बार को मान गए कि यह शव छोटू का है। लेकिन फोन कॉल से छोटू के जिंदा होने का पता चला तो वे युवक शव को तुरंत एंबुलेंस में डालकर ले गए।
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आखिर किसका शव लाई पुलिस
अमूमन पुलिस परिजनों के साथ ही शव छोड़ने कहीं पहुंचती है। लेकिन यहां मामला दूसरा था। शव लेकर पहुंचने का इन युवकों का क्या मकसद था, इसको लेकर इलाके में चर्चा होती रही। इस बात की जानकारी लगने पर देहली गेट पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन उससे पहले वह युवक शव लेकर जा चुके थे।
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गले नहीं उतरा
शव लाने वाले युवक वर्दी में नहीं थे। खुद को गुरुग्राम पुलिस से बताया। लेकिन जिस एंबुलेंस में शव था, उसकी नंबर प्लेट पर लिखे रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर वह ज्योतिबा फुले नगर की थी। शव छोटू का बताना, फिर पहचान न होने पर बिना कुछ कहे या लोकल पुलिस या अधिकारी को बताए वापस लौटना संदेह पैदा करता है। वहीं, एसपी सिटी मान सिंह चौहान का कहना है कि तीन युवक एंबुलेंस में शव लेकर जली कोठी में आए थे। पहचान न होने पर वापस ले गए। पुलिस ऐसे किसका शव लेकर लाई, इसकी जांच कराई जा रही है। लोकल पुलिस को कोई जानकारी नहीं है।