{"_id":"58fa5c4c4f1c1bbf068b4652","slug":"50-crore-land-sold-in-15-crore","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेरठ: 50 करोड़ की वक्फ बोर्ड की जमीन 15 करोड़ में बेची","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मेरठ: 50 करोड़ की वक्फ बोर्ड की जमीन 15 करोड़ में बेची
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 22 Apr 2017 02:38 PM IST
विज्ञापन
वक्फ बोर्ड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वक्फ बोर्ड की पचास करोड़ से भी ज्यादा रकम की जमीन को फर्जी ढंग से 15 करोड़ में बेच दिया गया। आरोप है कि इस गड़बड़झाले में उप्र शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड चेयरमैन वसीम रिजवी तथा अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत रही। ये लोग फर्जी मुतवल्ली बने और सारा खेल रचा। योगी सरकार से शिकायत हुई जिस पर जिलाधिकारी को निर्देश देकर गहन जांच कराई गई। इस पर सारे खेल का भंडाफोड़ हो गया। इस प्रकरण में थाना कंकरखेड़ा में वक्फ बोर्ड वसीम रिजवी, सब रजिस्ट्रार चतुर्थ समेत 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
ये है मामला
थाना कोतवाली क्षेत्र के इमामबाड़ा निवासी शहजाद अब्बास नकवी ने बताया कि सन 1939 में उसके दादा मरहूम सैय्यद असगर हुसैन ने सरधना रोड स्थित नंगलाताशी गांव में खसरा संख्या 15/1 की अपनी करीब 42 बीघा जमीन अपने बेटे करबलाई अब्बास नकवी के नाम से वक्फ की थी। आरोप है कि वक्फ बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी ने कागजातों में हेराफेरी करके वक्फ इंस्पेक्टर मुंतजिर के साथ मिलकर जिया अब्बास को मुत्तवली नियुक्त किया था। उक्त आरोपियों ने भूमाफिया व सपा नेताओं के साथ मिलकर जमीन के कागजातों में बड़ी हेराफेरी की और 15 अप्रैल को 50 करोड़ रुपए की जमीन को मात्र 15 करोड़ रुपए में बेच दिया। हैरत की बात यह है कि बैनामे के दौरान मात्र 50 लाख रुपए की कीमत दर्शायी गई।
सीएम के आदेश पर हुई जांच
शहजाद दो दिन पूर्व लखनऊ जाकर सीएम आदित्य नाथ योगी से मिले और पूरे मामले से अवगत कराया। जिस पर सीएम ने वक्फ बोर्ड के राज्यमंत्री को तत्काल गंभीरता से मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री ने जिलाधिकारी मेरठ से बात की तो उन्होंने एसडीएम अरविंद कुमार को मौके पर भेजकर सारे प्रकरण की जांच कराई। जांच में सामने आ गया कि मुत्तवली जिया अब्बास ने अपने ससुर दानिश अब्बास के साथ मिलकर 50 करोड़ रुपए की जमीन को औने पौने दामों में बेच डाला। लगभग 15 करोड़ में जमीन बेची गई पर दस्तावेज में मात्र 50 लाख रुपए कीमत दर्शाकर अमर एंटरप्राइजेज निवासी कंकरखेड़ा व उसके पार्टनर अब्दुल वाहिद पुत्र अब्दुल सलाम व मौबीन पुत्र युनुश कुरैशी को बेच दी है। रिपोर्ट के आधार पर कंकरखेड़ा थाने में वक्फ बोर्ड चेयरमैन वसीम रिजवी, इंस्पेक्टर मुंतजिर, मुत्तवली जिया अब्बास, अख्तर अब्बास, दानिश अब्बास, अमर इंटरप्राइजेज, अब्दुल वाहिद, मोबीन कुरैशी, गुलाम सैयदेन रिजवी कथित प्रशासनिक अधिकारी वक्फ बोर्ड, उत्सव, राहुल, दस्तावेज लेखक मूलचंद मित्तल तथा सब रजिस्ट्रार चतुर्थ विकास शर्मा के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 में मुकदमा दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर प्रशांत कपिल के मुताबिक आरोपियाें की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
सपा के नेता भी रहे शामिल
इस प्रकरण में सपा के एक कददावर नेता भी शामिल रहे। जिसके खिलाफ जांच शुरु हो गई है। वहीं युनुस कुरैशी जिसके खिलाफ केस दर्ज हुआ है। वह सपा महानगर उपाध्यक्ष है। सपा नेताओं का संरक्षण था और साजिश में हाथ था इसलिए ही पुलिस ने अब तक कार्रवाई नहीं की। पिछले तीन साल से मामले की जांच ही चलती रही। भाजपा सरकार ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराई है।
सड़क तक बन गई
इस संपत्ति पर लगातार खरीद फरोख्त का क्रम जारी था। अवैध रुप से निर्माण कर बिल्डिंग और सड़क बनवा दी। मामले में पिछले काफी दिनों से जमीन का मालिक शिकायत करता आ रहा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बाबत संयुक्त निदेशक एसएन पांडे ने छामारी कर यहां निर्माण रुकवाया था और खंभे तक तुड़वाए थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट पेश की थी। एसडीएम ने अपनी जांच में लिखा है कि संयुक्त निदेशक ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि इस खरीद फरोख्त में वक्फ बोर्ड अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।
विज्ञापन
ये है मामला
थाना कोतवाली क्षेत्र के इमामबाड़ा निवासी शहजाद अब्बास नकवी ने बताया कि सन 1939 में उसके दादा मरहूम सैय्यद असगर हुसैन ने सरधना रोड स्थित नंगलाताशी गांव में खसरा संख्या 15/1 की अपनी करीब 42 बीघा जमीन अपने बेटे करबलाई अब्बास नकवी के नाम से वक्फ की थी। आरोप है कि वक्फ बोर्ड के चैयरमैन वसीम रिजवी ने कागजातों में हेराफेरी करके वक्फ इंस्पेक्टर मुंतजिर के साथ मिलकर जिया अब्बास को मुत्तवली नियुक्त किया था। उक्त आरोपियों ने भूमाफिया व सपा नेताओं के साथ मिलकर जमीन के कागजातों में बड़ी हेराफेरी की और 15 अप्रैल को 50 करोड़ रुपए की जमीन को मात्र 15 करोड़ रुपए में बेच दिया। हैरत की बात यह है कि बैनामे के दौरान मात्र 50 लाख रुपए की कीमत दर्शायी गई।
विज्ञापन
सीएम के आदेश पर हुई जांच
शहजाद दो दिन पूर्व लखनऊ जाकर सीएम आदित्य नाथ योगी से मिले और पूरे मामले से अवगत कराया। जिस पर सीएम ने वक्फ बोर्ड के राज्यमंत्री को तत्काल गंभीरता से मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री ने जिलाधिकारी मेरठ से बात की तो उन्होंने एसडीएम अरविंद कुमार को मौके पर भेजकर सारे प्रकरण की जांच कराई। जांच में सामने आ गया कि मुत्तवली जिया अब्बास ने अपने ससुर दानिश अब्बास के साथ मिलकर 50 करोड़ रुपए की जमीन को औने पौने दामों में बेच डाला। लगभग 15 करोड़ में जमीन बेची गई पर दस्तावेज में मात्र 50 लाख रुपए कीमत दर्शाकर अमर एंटरप्राइजेज निवासी कंकरखेड़ा व उसके पार्टनर अब्दुल वाहिद पुत्र अब्दुल सलाम व मौबीन पुत्र युनुश कुरैशी को बेच दी है। रिपोर्ट के आधार पर कंकरखेड़ा थाने में वक्फ बोर्ड चेयरमैन वसीम रिजवी, इंस्पेक्टर मुंतजिर, मुत्तवली जिया अब्बास, अख्तर अब्बास, दानिश अब्बास, अमर इंटरप्राइजेज, अब्दुल वाहिद, मोबीन कुरैशी, गुलाम सैयदेन रिजवी कथित प्रशासनिक अधिकारी वक्फ बोर्ड, उत्सव, राहुल, दस्तावेज लेखक मूलचंद मित्तल तथा सब रजिस्ट्रार चतुर्थ विकास शर्मा के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 में मुकदमा दर्ज किया गया है। इंस्पेक्टर प्रशांत कपिल के मुताबिक आरोपियाें की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
सपा के नेता भी रहे शामिल
इस प्रकरण में सपा के एक कददावर नेता भी शामिल रहे। जिसके खिलाफ जांच शुरु हो गई है। वहीं युनुस कुरैशी जिसके खिलाफ केस दर्ज हुआ है। वह सपा महानगर उपाध्यक्ष है। सपा नेताओं का संरक्षण था और साजिश में हाथ था इसलिए ही पुलिस ने अब तक कार्रवाई नहीं की। पिछले तीन साल से मामले की जांच ही चलती रही। भाजपा सरकार ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराई है।
सड़क तक बन गई
इस संपत्ति पर लगातार खरीद फरोख्त का क्रम जारी था। अवैध रुप से निर्माण कर बिल्डिंग और सड़क बनवा दी। मामले में पिछले काफी दिनों से जमीन का मालिक शिकायत करता आ रहा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बाबत संयुक्त निदेशक एसएन पांडे ने छामारी कर यहां निर्माण रुकवाया था और खंभे तक तुड़वाए थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट पेश की थी। एसडीएम ने अपनी जांच में लिखा है कि संयुक्त निदेशक ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि इस खरीद फरोख्त में वक्फ बोर्ड अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।