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महिला लिपिक की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट से रोक
Updated Wed, 18 Jul 2018 02:40 AM IST
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मेरठ। एमडीए के फर्जी रजिस्ट्री के मामले में फरार महिला लिपिक की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट इलाहाबाद ने चार्जशीट दाखिल होने तक रोक लगा दी है।
तत्कालीन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार के आदेश पर एमडीए के संयुक्त सचिव अजय कुमार ने 21 जून को महिला लिपिक सहित तीन लोगों पर फर्जी रजिस्ट्री के मामले में थाना सिविल लाइन पर धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें लिपिक शिव गोपाल वाजपेयी व रिटायर्ड लिपिक तारा सिंह को उसी दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन आरोपी महिला लिपिक फरार चल रही थी। आरोपी महिला रजनी कनौजिया के अधिवक्ता नगेंद्र कुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि महिला लिपिक रजनी कनौजिया पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। जिसके चलते रजनी कनौजिया पर केस नहीं बनता, इसलिए उन पर दर्ज कराई गई एफआईआर को निरस्त व खंडित करने की मांग की। इस पर शासकीय अपर महाअधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एफआईआर सही है। आरोप गलत नहीं हैं। एफआईआर निरस्त नहीं होनी चाहिए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी महिला है और उसकी क्रिमिनल हिस्ट्री भी नहीं है। इसलिए इन सब को देखते हुए उसे तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, जब तक की पुलिस रिपोर्ट नहीं देती। न्यायालय ने आदेश में यह भी कहा कि आरोपी महिला को पुलिस की जांच में जरूरत पड़ने पर सहयोग करना होगा। आदेश की तारीख से तीन माह के भीतर पुलिस को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करनी होगी।
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तत्कालीन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार के आदेश पर एमडीए के संयुक्त सचिव अजय कुमार ने 21 जून को महिला लिपिक सहित तीन लोगों पर फर्जी रजिस्ट्री के मामले में थाना सिविल लाइन पर धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें लिपिक शिव गोपाल वाजपेयी व रिटायर्ड लिपिक तारा सिंह को उसी दिन पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन आरोपी महिला लिपिक फरार चल रही थी। आरोपी महिला रजनी कनौजिया के अधिवक्ता नगेंद्र कुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि महिला लिपिक रजनी कनौजिया पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। जिसके चलते रजनी कनौजिया पर केस नहीं बनता, इसलिए उन पर दर्ज कराई गई एफआईआर को निरस्त व खंडित करने की मांग की। इस पर शासकीय अपर महाअधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एफआईआर सही है। आरोप गलत नहीं हैं। एफआईआर निरस्त नहीं होनी चाहिए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी महिला है और उसकी क्रिमिनल हिस्ट्री भी नहीं है। इसलिए इन सब को देखते हुए उसे तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, जब तक की पुलिस रिपोर्ट नहीं देती। न्यायालय ने आदेश में यह भी कहा कि आरोपी महिला को पुलिस की जांच में जरूरत पड़ने पर सहयोग करना होगा। आदेश की तारीख से तीन माह के भीतर पुलिस को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करनी होगी।
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