फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   हाईकोर्ट के बाद भी नहीं कराई गवाही, कैसे मिलेगा इंसाफ

हाईकोर्ट के बाद भी नहीं कराई गवाही, कैसे मिलेगा इंसाफ

Thu, 24 May 2018 02:28 AM IST
Updated Thu, 24 May 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
हाईकोर्ट के बाद भी नहीं कराई गवाही, कैसे मिलेगा इंसाफ
मेरठ। अपनों की मौत का गम और उनको इंसाफ दिलाने की खातिर लोग कोर्ट में चक्कर काट रहे हैं। हर बार तारीख लगती है। लेकिन सुनवाई नहीं होती। वजह है पुलिस का नकारापन। हाईकोर्ट के दो बार आदेश होने के बाद भी विवेचक गवाही देने कोर्ट नहीं पहुंचे रहे। पांच साल से विवेचक की गवाही न होने के चलते कोर्ट की कार्यवाही रुकी हुई है। कोर्ट ने विवेचक के खिलाफ वारंट जारी किया है।
विज्ञापन

खरखौदा के सलेमपुर गांव निवासी चांद मोहम्मद पुत्र सिराजुद्दीन ने 22 अगस्त 2011 को थाना खरखौदा में एफआईआर दर्ज करायी था। आरोप कि 21 अगस्त 2011 को उसके बेटे जुनैद उर्फ जॉनी पर आरोपी निलेश, सचिन, संदीप पुत्र सुशील, सुशील पुत्र जगराम, दीपक पुत्र अशोक ने एक राय होकर चाकू से हमला कर दिया। जिससे जुनैद की मौत हो गई जबकि सारिक गंभीर रूप से घायल हो गया।
विज्ञापन

पुलिस ने घटना की विवेचना कर 26 सितंबर 2011 को सभी आरोपियों के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमला, हत्या सहित संबंधित धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की। आरोपियों पर मुकदमा चलाकर दंडित किए जाने का आग्रह किया। उक्त चार्जशीट में पुलिस ने वादी चांद मोहम्मद, घायल सारिक सहित कुल 17 गवाहों की लिस्ट दाखिल की। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए माह जनवरी 2012 में सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराआें में आरोप तय कर दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

पत्रावली वास्ते साक्ष्य नियत कर दी। इसके तुरंत बाद पीड़ित पक्ष ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली और उक्त मुकदमे के शीघ्र निस्तारण की गुहार लगायी। उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 8 मई 2012 को आदेश पारित करते हुए उक्त मुकदमे को शीघ्र निस्तारित करने के आदेश दिए तथा बेवजह स्थगन प्रार्थना पत्र को स्वीकार न करने की हिदायत दी। इसके पश्चात पुन: उच्च न्यायालय द्वारा 10 अगस्त 2017 को उक्त मुकदमे को शीघ्र निस्तारित करने के आदेश दिए।

इसी दौरान उक्त मुकदमे की पैरवी कर रहे वादी चांद मोहम्मद बेटे को न्याय दिलाए बिना इस दुनिया से चल बसे। मुकदमा वर्तमान में न्यायालय अपर जिला जज कोर्ट-सात की अदालत में विचाराधीन है, जिसमें अभी तक कुल सात गवाहों की गवाही पूर्ण हुई है तथा पत्रावली काफी लंबे समय सेे इस घटना के विवेचक रहे दरोगा भगवत सिंह की गवाही में विचाराधीन है। जिसकी वजह से उक्त पत्रावली में वर्ष 2013 से अब तक गवाही की कार्यवाही आगे नही बढ़ पायी है।

खास बातें:
- छह साल में गवाही भी नहीं करा सकी पुलिस
- कोर्ट में गवाही न देने पर विवेचक का वारंट जारी
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed