{"_id":"59c95a4b4f1c1bb6538b465f","slug":"21506368075-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"57 सौ करोड़ की ठगी में कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
57 सौ करोड़ की ठगी में कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट
Updated Tue, 26 Sep 2017 01:04 AM IST
विज्ञापन
मेरठ। 3700 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में सोमवार को सीजेएम गाजियाबाद की कोर्ट में 1650 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई है। करोड़ों रुपये की ठगी का यह मुकदमा गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज हुआ था। केस की विवेचना साइबर सेल मेरठ के प्रभारी कर्मवीर सिंह कर रहे हैं। जेल में बंद दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
कर्मवीर सिंह के मुताबिक, कानपुर नगर के नसीरपुर निवासी निधि कटियार पुत्री ओमप्रकाश ने दो मार्च 2017 को इंदिरापुरम थाने में सोशल ट्रेड डॉट बिज के नाम पर धोखाधड़ी करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और एसटीएफ भी जुटी थी। पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर सुनील मित्तल निवासी पिलखुवा, हापुड़ और महेश दयाल निवासी मथुरा (कंपनी में आईटी टेक्निशियन) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सुनील मित्तल नोएडा और महेश दयाल गाजियाबाद जेल में बंद हैं। इस केस में सुनील मित्तल के बेटे अनुभव मित्तल, अनुभव मित्तल की पत्नी आयुषि अग्रवाल, कंपनी के सीओओ श्रीधर पी. और प्रमोटर गौरव शर्मा भी नामजद हैं, इन चारों की विवेचना अभी चल रही है। लाइक के नाम पर ठगी के अन्य मामले दूसरे थानों में भी दर्ज हैं।
अभी तक 37 सौ करोड़ की ठगी
विवेचक के अनुसार अभी तक जांच में सामने आया कि कंपनी ने 3700 करोड़ रुपये की ठगी की है। नाइजीरिया के 57 लोगों से भी ठगी की गई है। छह लाख 23 हजार लोगों को कंपनी ने अपना मेंबर बनाया है। मेंबरशिप के नाम पर उनकी आईडी लेकर उनसे अलग-अलग अकाउंट में पैसा डलवाया गया और पुराने मेंबरों को पैसा भी दिया गया। पुलिस की जांच के मुताबिक कंपनी के डायरेक्टर सुनील मित्तल, उनके बेटे अनुभव और पुत्रवधू आयुषि जो की सह डायरेक्टर है। इन सभी ने प्रमोटर के माध्यम से विज्ञापन दिखाकर लोगों को करोड़पति बनने के सपने में उलझाकर सोशल ट्रेड की स्कीम तैयार की।
विज्ञापन
ऐसे करते थे अपराध
एक व्यक्ति 57 हजार 250 रुपये और आईडी जमा कर मेंबर बना। जबकि कागजों में मेंबर को पांच या दस प्रतिशत रुपये कम दर्शाए गए। इसका कोई कोेई कारण दर्ज नहीं किया। एक आईडी पर 125 लाइक प्रतिदिन क्लिक करने होते थे। स्कीम सप्ताह में पांच दिन यानी सोमवार से शुक्रवार तक रहती थी। पांच रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 625 रुपये बनते थे। यहां भी जिन मेंबरों को पैसा दिया गया, उन्हें कम दिया गया। एक मेंबर को छह हजार लिंक पूरा करने पर उसे अलग से पैसे का भी लालच दिया गया। कंपनी ने मेंबर बनाने के नाम पर जनता से ठगी की गई। उसी धनराशि से पुराने मेंबरों जिनकी संख्या करीब पांच या दस प्रतिशत है उन्हें फायदा पहुंचाया गया। बाकी पैसा कंपनी ने अलग-अलग खातों से निकाल लिया।
चार इंस्पेक्टर समेत 24 गवाह
करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में चार इंस्पेक्टर समेत 24 गवाह हैं। जिनमें अधिकांश पुलिसकर्मी हैं। पेमेंट गेटवे के मैनेजिंग डायरेक्टर भी इस केस में गवाह हैं।
गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, कानपुर समेत अन्य सभी केंद्रों के लिए
सोशल ट्रेड डॉट बिज के नाम पर की गई थी करोड़ों की ठगी
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा
साइबर सेल मेरठ के प्रभारी कर रहे हैं केस की विवेचना
विज्ञापन
कर्मवीर सिंह के मुताबिक, कानपुर नगर के नसीरपुर निवासी निधि कटियार पुत्री ओमप्रकाश ने दो मार्च 2017 को इंदिरापुरम थाने में सोशल ट्रेड डॉट बिज के नाम पर धोखाधड़ी करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और एसटीएफ भी जुटी थी। पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर सुनील मित्तल निवासी पिलखुवा, हापुड़ और महेश दयाल निवासी मथुरा (कंपनी में आईटी टेक्निशियन) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सुनील मित्तल नोएडा और महेश दयाल गाजियाबाद जेल में बंद हैं। इस केस में सुनील मित्तल के बेटे अनुभव मित्तल, अनुभव मित्तल की पत्नी आयुषि अग्रवाल, कंपनी के सीओओ श्रीधर पी. और प्रमोटर गौरव शर्मा भी नामजद हैं, इन चारों की विवेचना अभी चल रही है। लाइक के नाम पर ठगी के अन्य मामले दूसरे थानों में भी दर्ज हैं।
विज्ञापन
अभी तक 37 सौ करोड़ की ठगी
विवेचक के अनुसार अभी तक जांच में सामने आया कि कंपनी ने 3700 करोड़ रुपये की ठगी की है। नाइजीरिया के 57 लोगों से भी ठगी की गई है। छह लाख 23 हजार लोगों को कंपनी ने अपना मेंबर बनाया है। मेंबरशिप के नाम पर उनकी आईडी लेकर उनसे अलग-अलग अकाउंट में पैसा डलवाया गया और पुराने मेंबरों को पैसा भी दिया गया। पुलिस की जांच के मुताबिक कंपनी के डायरेक्टर सुनील मित्तल, उनके बेटे अनुभव और पुत्रवधू आयुषि जो की सह डायरेक्टर है। इन सभी ने प्रमोटर के माध्यम से विज्ञापन दिखाकर लोगों को करोड़पति बनने के सपने में उलझाकर सोशल ट्रेड की स्कीम तैयार की।
विज्ञापन
ऐसे करते थे अपराध
एक व्यक्ति 57 हजार 250 रुपये और आईडी जमा कर मेंबर बना। जबकि कागजों में मेंबर को पांच या दस प्रतिशत रुपये कम दर्शाए गए। इसका कोई कोेई कारण दर्ज नहीं किया। एक आईडी पर 125 लाइक प्रतिदिन क्लिक करने होते थे। स्कीम सप्ताह में पांच दिन यानी सोमवार से शुक्रवार तक रहती थी। पांच रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 625 रुपये बनते थे। यहां भी जिन मेंबरों को पैसा दिया गया, उन्हें कम दिया गया। एक मेंबर को छह हजार लिंक पूरा करने पर उसे अलग से पैसे का भी लालच दिया गया। कंपनी ने मेंबर बनाने के नाम पर जनता से ठगी की गई। उसी धनराशि से पुराने मेंबरों जिनकी संख्या करीब पांच या दस प्रतिशत है उन्हें फायदा पहुंचाया गया। बाकी पैसा कंपनी ने अलग-अलग खातों से निकाल लिया।
चार इंस्पेक्टर समेत 24 गवाह
करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में चार इंस्पेक्टर समेत 24 गवाह हैं। जिनमें अधिकांश पुलिसकर्मी हैं। पेमेंट गेटवे के मैनेजिंग डायरेक्टर भी इस केस में गवाह हैं।
गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, कानपुर समेत अन्य सभी केंद्रों के लिए
सोशल ट्रेड डॉट बिज के नाम पर की गई थी करोड़ों की ठगी
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा
साइबर सेल मेरठ के प्रभारी कर रहे हैं केस की विवेचना