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हत्यारोपियों पर मेहरबान क्यों नौचंदी पुलिस
Updated Sun, 11 Mar 2018 02:48 AM IST
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हत्यारोपियों पर नौचंदी पुलिस मेहरबान
मेरठ। शास्त्रीनगर में पीएसी के दरोगा की पत्नी सुमन की हत्या के मामले में आरोपियों पर पुलिस मेहरबान क्यों है। इसे लेकर नौचंदी थाना पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने आरोपी पक्ष से 1.35 लाख रुपये ले लिए हैं। अब पुलिस सुबह नामजद आरोपियों को बुलाती है और शाम को छोड़ देती है। पिछले पांच दिन से यह सिलसिला चल रहा है।
शास्त्रीनगर के ब्लॉक में एक मार्च को होली की पूर्व संध्या पर दरोगा बृजपाल सिंह की पत्नी सुमन की हत्या कुख्यात अर्जुन राणा ने शराब के लिए पांच सौ रुपये न देने पर की थी। दरोगा के बेटे कविंद्र को भी गोली मार दी थी। 25 हजार के इनामी अर्जुन को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दरोगा ने बहन सविता की हत्या मेें गवाही से रोकने के लिए सुमन की हत्या बताकर प्रताप, जितेंद्र और ओमपाल को भी नामजद किया था।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने तीनों नामजद आरोपियों से एक लाख 35 हजार रुपये लिए हैं। इसमें उनको राहत दी है कि वे सुबह आए और शाम को घर चले जाएं। पुलिस ने जांच में कुछ नहीं किया। नामजद आरोपियों को पुलिस न जेल भेजती है और न क्लीन चिट दे रही है। कई दिनों से यह सिलसिला चला है। जिसको लेकर पीड़ित परिवार में आक्रोश है। इस मामले की उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई है। वहीं एसपी सिटी मानसिंह चौहान का कहना है कि मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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खास बातें:
दरोगा की पत्नी की हत्या का मामला, परिजन बोले, आरोपियों से पुलिस ने लिए पैसे
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मेरठ। शास्त्रीनगर में पीएसी के दरोगा की पत्नी सुमन की हत्या के मामले में आरोपियों पर पुलिस मेहरबान क्यों है। इसे लेकर नौचंदी थाना पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने आरोपी पक्ष से 1.35 लाख रुपये ले लिए हैं। अब पुलिस सुबह नामजद आरोपियों को बुलाती है और शाम को छोड़ देती है। पिछले पांच दिन से यह सिलसिला चल रहा है।
शास्त्रीनगर के ब्लॉक में एक मार्च को होली की पूर्व संध्या पर दरोगा बृजपाल सिंह की पत्नी सुमन की हत्या कुख्यात अर्जुन राणा ने शराब के लिए पांच सौ रुपये न देने पर की थी। दरोगा के बेटे कविंद्र को भी गोली मार दी थी। 25 हजार के इनामी अर्जुन को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दरोगा ने बहन सविता की हत्या मेें गवाही से रोकने के लिए सुमन की हत्या बताकर प्रताप, जितेंद्र और ओमपाल को भी नामजद किया था।
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परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने तीनों नामजद आरोपियों से एक लाख 35 हजार रुपये लिए हैं। इसमें उनको राहत दी है कि वे सुबह आए और शाम को घर चले जाएं। पुलिस ने जांच में कुछ नहीं किया। नामजद आरोपियों को पुलिस न जेल भेजती है और न क्लीन चिट दे रही है। कई दिनों से यह सिलसिला चला है। जिसको लेकर पीड़ित परिवार में आक्रोश है। इस मामले की उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई है। वहीं एसपी सिटी मानसिंह चौहान का कहना है कि मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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