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दिल्ली और हरियाणा में भी फैला है फर्जी कंपनी का नेटवर्क
Updated Mon, 12 Mar 2018 02:36 AM IST
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दिल्ली और हरियाणा में भी फैला है फर्जी कंपनी का नेटवर्क
- ठगी के शिकार और लोगों ने किया पुलिस से संपर्क
- लाइक के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला
- एसपी क्राइम ने कहा फर्जी तरह से खोले गये बैंक खातों की हो रही जांच
मेरठ। लाइक के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम ने बैंक खातों की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस की जांच पड़ताल में सभी बैंक खातों को संदिग्ध तरीके से खुलावाया गया और जमा करने और रकम निकालने की गतिविधि भी संदेह के दायरे में है।
एसपी क्राइम ने शनिवार को प्रेसवार्ता के दौरान एस्टोनिस डिजिटल एडवरटाईजिंग सर्विस लिमिटेड के नाम से लाइक के नाम पर ठगी करने वाली फर्जी कंपनी का खुलासा किया था। रविवार को पुलिस ने प्रदीप सिंघल निवासी मुरादनगर को जेल भेज दिया। पूछताछ के आधार पर उससे कई और खुलासे हुए हैं, फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस सेे ठगी के शिकार कुछ अन्य लोगों ने भी संपर्क किया है।
पुलिस के अनुसार ये कंपनी लालच देखकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुकी है। एसपी क्राइम शिवराम यादव का कहना है कि अभी तक जांच पड़ताल में सामने आया कि कंपनी ने हरियाणा और दिल्ली में भी अपना नेटवर्क खड़ा किया था, जबकि सदस्य अन्य राज्यों से भी बनाए गये। एक आरोपी संदेह के घेरे में दिल्ली का भी है। जिसने 2016 में गाजियाबाद में एक फ्लैट में कंपनी का ऑफिस खुलवाया था।
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दिसंबर 2017 में फर्जी कंपनी के नाम से खोला गया ऑफिस बंद कर दिया। इस मामले में क्राइम ब्रांच के अलावा साइबर सेल की टीम भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में दो महिला समेत जो भी आरोपी हैं उनकी तलाश में क्राइम ब्रांच दबिश दे रही है। जल्द ही फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ठगी के आरोप में पकड़े गये प्रदीप ने पूछताछ में बताया था कि उनके दिल्ली और हरियाणा में ऑफिस खोला गया था। तीन से चार माह में ही ऑफिस बंद कर दूसरी जगह खोले जाते थे।
एसपी क्राइम का कहना है कि इसमें रविवार को 11 अलग अलग लोगों ने भी फोन पर अपने साथ लाखों रुपये की ठगी होने के लिए संपर्क किया है। जिनमें गाजियाबाद निवासी एक बिल्डर भी शामिल हैं, जिनसे ठगी की गई है। जबकि मेरठ के कुछ लोगों ने फोन किया है। एसपी क्राइम का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कुछ महत्वपूर्ण तथ्य समाने आयेंगे। जिसके बाद पता चल सकेगा कि कंपनी ने कितने लोेगों से ठगी की है।
बैंकों में जाकर की जाएगी जांच
एसपी क्राइम का कहना है कि जिन जिन बैंकों की अलग अलग शाखाओं में खाते खुलवाकर पैसा डलवाया गया है। उन बैंकों में जाकर पुलिस टीम जांच करेगी। बैंक में खाता किसकी आईडी पर खोला गया है। पुलिस का कहना है कि यह भी सामने आ रही है कि लालच देकर कुछ लोगों के प्रमाण पत्रों पर अलग अलग बैंक में खाते खुलवाए गये हैं। बैंक खातों की जांच के लिए एक इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई है।
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- ठगी के शिकार और लोगों ने किया पुलिस से संपर्क
- लाइक के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला
- एसपी क्राइम ने कहा फर्जी तरह से खोले गये बैंक खातों की हो रही जांच
मेरठ। लाइक के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की टीम ने बैंक खातों की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस की जांच पड़ताल में सभी बैंक खातों को संदिग्ध तरीके से खुलावाया गया और जमा करने और रकम निकालने की गतिविधि भी संदेह के दायरे में है।
एसपी क्राइम ने शनिवार को प्रेसवार्ता के दौरान एस्टोनिस डिजिटल एडवरटाईजिंग सर्विस लिमिटेड के नाम से लाइक के नाम पर ठगी करने वाली फर्जी कंपनी का खुलासा किया था। रविवार को पुलिस ने प्रदीप सिंघल निवासी मुरादनगर को जेल भेज दिया। पूछताछ के आधार पर उससे कई और खुलासे हुए हैं, फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस सेे ठगी के शिकार कुछ अन्य लोगों ने भी संपर्क किया है।
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पुलिस के अनुसार ये कंपनी लालच देखकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुकी है। एसपी क्राइम शिवराम यादव का कहना है कि अभी तक जांच पड़ताल में सामने आया कि कंपनी ने हरियाणा और दिल्ली में भी अपना नेटवर्क खड़ा किया था, जबकि सदस्य अन्य राज्यों से भी बनाए गये। एक आरोपी संदेह के घेरे में दिल्ली का भी है। जिसने 2016 में गाजियाबाद में एक फ्लैट में कंपनी का ऑफिस खुलवाया था।
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दिसंबर 2017 में फर्जी कंपनी के नाम से खोला गया ऑफिस बंद कर दिया। इस मामले में क्राइम ब्रांच के अलावा साइबर सेल की टीम भी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में दो महिला समेत जो भी आरोपी हैं उनकी तलाश में क्राइम ब्रांच दबिश दे रही है। जल्द ही फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ठगी के आरोप में पकड़े गये प्रदीप ने पूछताछ में बताया था कि उनके दिल्ली और हरियाणा में ऑफिस खोला गया था। तीन से चार माह में ही ऑफिस बंद कर दूसरी जगह खोले जाते थे।
एसपी क्राइम का कहना है कि इसमें रविवार को 11 अलग अलग लोगों ने भी फोन पर अपने साथ लाखों रुपये की ठगी होने के लिए संपर्क किया है। जिनमें गाजियाबाद निवासी एक बिल्डर भी शामिल हैं, जिनसे ठगी की गई है। जबकि मेरठ के कुछ लोगों ने फोन किया है। एसपी क्राइम का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कुछ महत्वपूर्ण तथ्य समाने आयेंगे। जिसके बाद पता चल सकेगा कि कंपनी ने कितने लोेगों से ठगी की है।
बैंकों में जाकर की जाएगी जांच
एसपी क्राइम का कहना है कि जिन जिन बैंकों की अलग अलग शाखाओं में खाते खुलवाकर पैसा डलवाया गया है। उन बैंकों में जाकर पुलिस टीम जांच करेगी। बैंक में खाता किसकी आईडी पर खोला गया है। पुलिस का कहना है कि यह भी सामने आ रही है कि लालच देकर कुछ लोगों के प्रमाण पत्रों पर अलग अलग बैंक में खाते खुलवाए गये हैं। बैंक खातों की जांच के लिए एक इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई है।