फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   cleanliness survy2019, Meerut Cantt got second rank, municipal corporation still behind

स्वच्छता सर्वेक्षण 2019: सफाई में दूसरे नंबर पर मेरठ कैंट, नगर निगम अभी भी पिछड़ा

Thu, 07 Mar 2019 10:51 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 07 Mar 2019 10:51 AM IST
विज्ञापन
cleanliness survy2019, Meerut Cantt got second rank, municipal corporation still behind
मेरठ न्यूज
स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 के सर्वे में मेरठ छावनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की 62 छावनी में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। वह पिछले साल इस सर्वे में 45वें नंबर पर था। कैंट बोर्ड के सीईओ प्रसाद चव्हाण सहित अधिकारियों को दिल्ली के विज्ञान भवन में सम्मानित किया गया। वहीं, नगर निगम मेरठ सर्वे में 286वें नंबर पर रहा। प्रतियोगिता में देश के 40237 शहरों ने हिस्सा लिया। 
विज्ञापन


साफ सफाई के मामले में एक बार फिर नगर निगम फेल साबित हुआ। पिछले साल हुए सर्वेक्षण में मेरठ निगम 323वें स्थान पर था, हालांकि पिछले साल से कुछ सुधार किया गया है। वहीं निगम का दावा है उत्तर प्रदेश में उनका स्थान अंतिम-50 में है। संसाधनों को देखते हुए निगम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा। 
विज्ञापन

निगम के दावों की पोल खुली
100 शहरों में शामिल होने के नगर निगम के दावों की पोल खुल गई है। नगर निगम अधिकारी भले ही प्रदेश के 50 शहरों में मेरठ का नाम बता रहे हों, लेकिन उसके सारे दावे धड़ाम हो गए हैं। नगर निगम ने डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये से छोटे हाथी, सड़क सफाई मशीन, ट्रैक्टर आदि वाहनों की खरीद की थी। ताकि स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता मिल सके। लेकिन समय से सड़कों पर न उतारे जाने के कारण अब  किरकिरी झेलनी पड़ी है। वहीं निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी लगातार लापरवाही बरत रहे हैं, जिससे परेशानी हो रही है। 

प्रतिमाह तीन करोड़ हुए खर्च
स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता के लिए नगर निगम ने खजाने को साफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सिर्फ शहर की सफाई में लगाए गए करीब तीन हजार सफाई कर्मचारियों के वेतन पर प्रतिमाह ढाई से तीन करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। उसके  बावजूद शहर की स्वच्छता रैंकिंग में कोई खास फर्क नहीं आया। 

कूड़ा निस्तारण पर नहीं हुआ काम
निगम ने कूड़ा निस्तारण पर खूब बैठक कीं, लेकिन कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं लगवा पाया। मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी को खत्म करने के लिए कई विधियों का हवाला दिया, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। शहर को कूड़ाघरों से भी मुक्त नहीं किया। सर्वेक्षण के नाम पर खजाने की बंदरबांट हुई।

समय से नहीं करा पाए ओडीएफ
स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर औरसार्वजनिक स्थानों पर शौचालय बनने थे। निगम ने शौचालय तो बनाए, लेकिन समय का ख्याल नहीं रखा। निगम समय से ओडीएफ भी घोषित नहीं किया गया।  
विज्ञापन

जागरूकता की कमी
स्वच्छता सर्वेक्षण में असफलता के लिए सरकारी मशीनरी ही दोषी नहीं है, बल्कि जनप्रतिनिधि और शहर की जनता भी जिम्मेदार है। सर्वेक्षण के दौरान एक परीक्षा शहर की जनता की भी थी। इसमें जनता को स्वच्छता एप डाउनलोड करना था।

फोन पर स्वच्छता का फीडबैक देना था। लेकिन जनता ने रुचि नहीं दिखाई। जबकि छावनी क्षेत्र के लोगों ने इसमें बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। अपर नगरायुक्त अमित सिंह का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में सफलता के लिए पूरे प्रयास किए गए थे। जो कमियां रह गई हैं, उनको इस बार पूरा किया जाएगा।
  
स्वच्छता सर्वेक्षण में मेरठ की रैंक अच्छी न होने के लिए सीधे सीधे अधिकारी जिम्मेदार हैं। अब हम प्रयास करेंगे की अगले साल स्वच्छता सर्वेक्षण में मेरठ अच्छा करे। -सुनीता वर्मा, महापौर।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed