{"_id":"57e033514f1c1ba269a82a26","slug":"chutki-me-hal","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुटकी में गणित के सवाल हल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुटकी में गणित के सवाल हल
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 20 Sep 2016 02:27 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भूत की तरह डराने वाले गणित के सवाल अब चुटकी बजाकर हल किए जा रहे हैं। छात्र जोड़, घटाने, गुणा और भाग पलक झपकते ही कर रहे हैं। अबेकस और वैदिक मैथ की क्रियाओं ने गणित को आसान बना दिया है। बच्चे खेल-खेल में कठिन सवालों को सॉल्व कर रहे हैं। अंगूठे और हाथ की पहली अंगुली से बड़ी से बड़ी गुणा की जा रही है, वहीं वैदिक मैथ के सूत्रों के जरिये फिजिक्स, केमिस्ट्री को आसान बनाया जा रहा है। शहर में अबेकस की कक्षाएं चल रही हैं, पैरेंट्स भी बच्चे को एक्सपर्ट बनाने के लिए इन कक्षाओं का सहारा ले रहे हैं।
यह है अबेकस
अबेकस गणित के सवालों को हल करने की प्राचीन पद्धति है। इस प्रक्रिया में बीट्स के बने अबेकस किट की मदद से बच्चे चुटकियों में गणित का हर तरह का कैलकुलेशन कर लेते हैं। प्लस, माइनस, डिवाइड, मल्टीपल, रुट, स्कवायर और प्वाइंट से जुड़े कितने भी बड़े सवाल हों, उसे बच्चा पलक झपकते ही हल कर देता है। पिछले दो सालों में अबेकस का रुझान काफी बढ़ा है।
ऐसे सीखते हैं अबेकस
अबेकस की शुरुआत अबेकस किट (मोतियों की बनी होती है) से होती है। अबेकस किट में प्वाइंट लाइन और एक नंबर के चार बीड्स ऊपर, व पांच नंबर का एक बीड नीचे होती है। अंगूठे और हाथ की पहली अंगुली के जरिये यह किट हैंडल की जाती है। शुरुआत में इसी किट की मदद से छात्रों को जोड़, घटाना सिखाते हैं। धीरे-धीरे अबेकस किट को हटाकर हवा में ही हल सिखाया जाता है। यूकेजी से लेकर 7वीं कक्षा के छात्र अबेकस सीख सकते हैं। सुपर जूनियर, जूनियर और सीनियर तीन लेवल होते हैं। सुपर जूनियर में यूकेजी से पहली कक्षा, जूनियर में दूसरी से चौथी कक्षा व सीनियर में पांचवीं से सातवीं के छात्र प्रशिक्षण लेते हैं। सुपर जूनियर छह महीने का कोर्स तीन लेवल में होता है। जूनियर में 18 महीने छह लेवल होते हैं। सीनियर ग्रुप में 30 महीने का कोर्स 10 लेवल में पूरा होता है। छात्र नियमित इसके टच में रहे तो भविष्य में कभी भी इसे नहीं भूलते। लगातार प्रैक्टिस के बाद छात्रों को गणित कै लकुलेशन के लिए कैलकुलेटर, पेन, कागज या कॉपी की जरूरत नहीं होती।
विज्ञापन
यह है वैदिक गणित
वैदिक गणित, वेदों से ली गई एक गणना प्रक्रिया है। जिसका जिक्र हमारे वेदों में भी है। वेदों से ही वैदिक गणित गणना प्रक्रिया को दोबारा समाज में लाया गया है। इसकी मदद से अर्थमेटिक्स, त्रिकोणमिति (ट्रिगनॉमेट्री) और अलजेबरा तीनों के केलकुलेशन चुटकियों में होते हैं। वैदिक गणित में 16 फार्मूलों की मदद ली जाती है। इन फार्मूलों की मदद से सारे सवालों के आंसर सिंगल लाइन सॉल्यूशन में आ जाते हैं। सवाल चाहे कितना ही बड़ा हो या उसमें कितनी बड़ी संख्या हो लेकिन वैदिक गणित की मदद से केवल एक लाइन में उसका हल चुटकियों में हो जाता है। यह गणना प्रक्रिया विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए उपयोगी है। 10वीं कक्षा से लेकर सिविल सर्विसेज, कांपटेटिव एग्जाम की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं इस प्रक्रिया को सीखते हैं।
चुटकी में हल करते हैं मैथ्स
अबेकस हो या वैदिक गणित, दोनों ही गणित की उलझन को रुचिकर तरीके से सुलझाने वाली प्रक्रियाएं हैं। जिन्हें सीखकर छात्र गणित के कठिन से कठिन सवालों को चुटकियों में हल कर देते हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि इन तरीकों को सीखने वाले छात्र कैलकुलेटर से 5 गुना अधिक तेजी से सवाल को हल करने में माहिर होते हैं।
गणित सिखाने का शहर में बड़ा कारोबार
हवा में गणित के सवालों क ो सुलझाना, चुटकियों में बड़े से बड़ा सवाल हल कर देने क ा मंत्र देने के लिए शहर में बड़ा कारोबार चल रहा है। शहर में पिछले दो सालों में कई नई एकेडमी और प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स खुले हैं, जो अबेकस, वैदिक मैथ्स का प्रशिक्षण दे रहे हैं। एक महीने में प्रति रविवार इनकी कक्षाएं होती हैं। महीने में केवल चार कक्षाएं लेते हैं। एक महीने की फीस 500 रुपये होती है।
गर्मियों की छुट्टी में लगती भीड़
निजी अबेकस एकेडमियों में रुटीन के अलावा गर्मियों में अच्छी खासी भीड़ होती है। अभिभावक बच्चे को हर हुनर में माहिर बनाने के लिए अबेकस एकेडमी में प्रवेश कराते हैं। अबेकस प्रशिक्षकों के अनुसार गर्मियों में अधिक बच्चे कक्षाएं लेते हैं।
स्कूलों में भी चल रहीं क्लासेस
शहर में सीबीएसई के स्कूलों में समय-समय पर वैदिक गणित और अबेकस की कार्यशालाएं कराई जा रही हैं। कुछ स्कूलों ने तो परमानेंट टीचर केवल अबेकस और वैदिक मैथ्स के लिए अपाइंट किया है, जो छात्रों को चुटकी में गणित सिखाता है। स्कूल इस सुविधा के लिए प्रति छात्र 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं। स्कूलों में समर कैंप में भी अबेकस को स्थान दिया है।
सीखने के हैं कई लाभ
बिना कॉपी, पेन, कैलकुलेटर के हवा में हल करते सवाल
चुटकियों में कर लेते हैं सवाल हल
गणित को लेकर जो डर है वो कम होता है
गणित फोबिया खत्म होकर रुचिकर बनता है
पर्सनेलिटी इंप्रूव होती है
कासंट्रेशन और लिसनिंग पावर बढ़ती है
ब्रेन एक्टिवेशन और मेमोरी स्ट्रांग होती है
पढ़ाई और परीक्षा में सफलता के चांस बढ़ते हैं
दूसरे बच्चों या लोगों के सामने स्मार्टनेस बढ़ने से कांफिडेंस भी बढ़ता है
मैथ्स को लेकर इंटरेस्ट भी पैदा होता है
प्रतियोगी परीक्षाओं क ी तैयारी के लिए है बहुत अच्छा
एडिक्शन नहीं, हेल्प है अबेकस
अबेकस या वैदिक मैथ्स दोनों ही ब्रेन को स्पीडली फंग्शनिंग की मैथ्ड्स हैं। जिसमें हमारा दिमाग तेजी से काम करने लगता है। इससे बच्चे को कोेई नुकसान नहीं और न ही ये प्रक्रिया बच्चे को एडिक्ट बनाती है। बल्कि बच्चे का कांसट्रेशन बढ़ता है। माइंड पावर भी इंप्रूव होती है। - डॉ. पूनम देवदत्त, सीबीएसई काउंसलर
विज्ञापन
यह है अबेकस
अबेकस गणित के सवालों को हल करने की प्राचीन पद्धति है। इस प्रक्रिया में बीट्स के बने अबेकस किट की मदद से बच्चे चुटकियों में गणित का हर तरह का कैलकुलेशन कर लेते हैं। प्लस, माइनस, डिवाइड, मल्टीपल, रुट, स्कवायर और प्वाइंट से जुड़े कितने भी बड़े सवाल हों, उसे बच्चा पलक झपकते ही हल कर देता है। पिछले दो सालों में अबेकस का रुझान काफी बढ़ा है।
विज्ञापन
ऐसे सीखते हैं अबेकस
अबेकस की शुरुआत अबेकस किट (मोतियों की बनी होती है) से होती है। अबेकस किट में प्वाइंट लाइन और एक नंबर के चार बीड्स ऊपर, व पांच नंबर का एक बीड नीचे होती है। अंगूठे और हाथ की पहली अंगुली के जरिये यह किट हैंडल की जाती है। शुरुआत में इसी किट की मदद से छात्रों को जोड़, घटाना सिखाते हैं। धीरे-धीरे अबेकस किट को हटाकर हवा में ही हल सिखाया जाता है। यूकेजी से लेकर 7वीं कक्षा के छात्र अबेकस सीख सकते हैं। सुपर जूनियर, जूनियर और सीनियर तीन लेवल होते हैं। सुपर जूनियर में यूकेजी से पहली कक्षा, जूनियर में दूसरी से चौथी कक्षा व सीनियर में पांचवीं से सातवीं के छात्र प्रशिक्षण लेते हैं। सुपर जूनियर छह महीने का कोर्स तीन लेवल में होता है। जूनियर में 18 महीने छह लेवल होते हैं। सीनियर ग्रुप में 30 महीने का कोर्स 10 लेवल में पूरा होता है। छात्र नियमित इसके टच में रहे तो भविष्य में कभी भी इसे नहीं भूलते। लगातार प्रैक्टिस के बाद छात्रों को गणित कै लकुलेशन के लिए कैलकुलेटर, पेन, कागज या कॉपी की जरूरत नहीं होती।
विज्ञापन
यह है वैदिक गणित
वैदिक गणित, वेदों से ली गई एक गणना प्रक्रिया है। जिसका जिक्र हमारे वेदों में भी है। वेदों से ही वैदिक गणित गणना प्रक्रिया को दोबारा समाज में लाया गया है। इसकी मदद से अर्थमेटिक्स, त्रिकोणमिति (ट्रिगनॉमेट्री) और अलजेबरा तीनों के केलकुलेशन चुटकियों में होते हैं। वैदिक गणित में 16 फार्मूलों की मदद ली जाती है। इन फार्मूलों की मदद से सारे सवालों के आंसर सिंगल लाइन सॉल्यूशन में आ जाते हैं। सवाल चाहे कितना ही बड़ा हो या उसमें कितनी बड़ी संख्या हो लेकिन वैदिक गणित की मदद से केवल एक लाइन में उसका हल चुटकियों में हो जाता है। यह गणना प्रक्रिया विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए उपयोगी है। 10वीं कक्षा से लेकर सिविल सर्विसेज, कांपटेटिव एग्जाम की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएं इस प्रक्रिया को सीखते हैं।
चुटकी में हल करते हैं मैथ्स
अबेकस हो या वैदिक गणित, दोनों ही गणित की उलझन को रुचिकर तरीके से सुलझाने वाली प्रक्रियाएं हैं। जिन्हें सीखकर छात्र गणित के कठिन से कठिन सवालों को चुटकियों में हल कर देते हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि इन तरीकों को सीखने वाले छात्र कैलकुलेटर से 5 गुना अधिक तेजी से सवाल को हल करने में माहिर होते हैं।
गणित सिखाने का शहर में बड़ा कारोबार
हवा में गणित के सवालों क ो सुलझाना, चुटकियों में बड़े से बड़ा सवाल हल कर देने क ा मंत्र देने के लिए शहर में बड़ा कारोबार चल रहा है। शहर में पिछले दो सालों में कई नई एकेडमी और प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स खुले हैं, जो अबेकस, वैदिक मैथ्स का प्रशिक्षण दे रहे हैं। एक महीने में प्रति रविवार इनकी कक्षाएं होती हैं। महीने में केवल चार कक्षाएं लेते हैं। एक महीने की फीस 500 रुपये होती है।
गर्मियों की छुट्टी में लगती भीड़
निजी अबेकस एकेडमियों में रुटीन के अलावा गर्मियों में अच्छी खासी भीड़ होती है। अभिभावक बच्चे को हर हुनर में माहिर बनाने के लिए अबेकस एकेडमी में प्रवेश कराते हैं। अबेकस प्रशिक्षकों के अनुसार गर्मियों में अधिक बच्चे कक्षाएं लेते हैं।
स्कूलों में भी चल रहीं क्लासेस
शहर में सीबीएसई के स्कूलों में समय-समय पर वैदिक गणित और अबेकस की कार्यशालाएं कराई जा रही हैं। कुछ स्कूलों ने तो परमानेंट टीचर केवल अबेकस और वैदिक मैथ्स के लिए अपाइंट किया है, जो छात्रों को चुटकी में गणित सिखाता है। स्कूल इस सुविधा के लिए प्रति छात्र 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं। स्कूलों में समर कैंप में भी अबेकस को स्थान दिया है।
सीखने के हैं कई लाभ
बिना कॉपी, पेन, कैलकुलेटर के हवा में हल करते सवाल
चुटकियों में कर लेते हैं सवाल हल
गणित को लेकर जो डर है वो कम होता है
गणित फोबिया खत्म होकर रुचिकर बनता है
पर्सनेलिटी इंप्रूव होती है
कासंट्रेशन और लिसनिंग पावर बढ़ती है
ब्रेन एक्टिवेशन और मेमोरी स्ट्रांग होती है
पढ़ाई और परीक्षा में सफलता के चांस बढ़ते हैं
दूसरे बच्चों या लोगों के सामने स्मार्टनेस बढ़ने से कांफिडेंस भी बढ़ता है
मैथ्स को लेकर इंटरेस्ट भी पैदा होता है
प्रतियोगी परीक्षाओं क ी तैयारी के लिए है बहुत अच्छा
एडिक्शन नहीं, हेल्प है अबेकस
अबेकस या वैदिक मैथ्स दोनों ही ब्रेन को स्पीडली फंग्शनिंग की मैथ्ड्स हैं। जिसमें हमारा दिमाग तेजी से काम करने लगता है। इससे बच्चे को कोेई नुकसान नहीं और न ही ये प्रक्रिया बच्चे को एडिक्ट बनाती है। बल्कि बच्चे का कांसट्रेशन बढ़ता है। माइंड पावर भी इंप्रूव होती है। - डॉ. पूनम देवदत्त, सीबीएसई काउंसलर