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अवैध कब्जों के खिलाफ मुख्यमंत्री के आदेश कागजों में हुए दफन

Mon, 25 Sep 2017 10:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Mon, 25 Sep 2017 10:30 AM IST
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Chief Minister orders against illegal occupation buried in paper
सीएम योगी आदित्यनाथ

मेरठ में सरकारी जमीनों को भू-माफिया और अवैध कब्जों से मुक्त कराना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल रहा। लेकिन जिला प्रशासन ने सीएम के आदेशों को कागजों में दफन कर दिया। योगी सरकार को छह माह हो चुके हैं, मगर शहर में अब तक एक इंच जमीन भी प्रशासन कब्जा मुक्त नहीं करा सका है। एक मामले में भी सिर्फ एमडीए ने अपने हिस्से की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जबकि प्रशासन यहां भी कब्जा लेने में असफल रहा।

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शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में सरकारी संपत्तियां मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश पर अवैध कब्जे हैं, तो नगर निगम की संपत्तियां सबसे ज्यादा है। इसके अलावा प्रशासन के प्रबंधन वाली जमीनों को लेकर भी जिला प्रशासन के पास अवैध कब्जे की कई शिकायतें मौजूद हैं। जिनकी जांच में यह पुष्टि भी हो चुकी है कि जमीन सरकारी है और कब्जा अवैध है। लेकिन प्रशासन कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई में फिसड्डी साबित हुआ।
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अवैध कब्जेदारों पर दयादृष्टि
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया तो यहां बने अवैध कांप्लेक्स को एमडीए ने ध्वस्त कर दिया। लेकिन तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर यहां जमे 93 कब्जेदारों को प्रशासन आज तक नहीं हटा पाया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के यहां यह मामला पिछले दो माह से सवाल-जवाब में ही अटका है।
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पढ़ें : योगी सरकार के छह माह में कितना पूरा हुआ जनता का सपना, एक क्लिक में पढ़ें...

मामले कई, लेकिन कार्रवाई नहीं

Chief Minister orders against illegal occupation buried in paper
सीएम योगी

1. हापुड़ रोड पर हाजी सईद होटल नजूल की भूमि में बना है, जो प्रथम दृष्टया जांच में सामने भी आ चुका है। लेकिन यहां सेटिंग के खेल में तहसील कर्मचारी रिपोर्ट देने में लेटलतीफी कर मामले को अटका रहे है।

2. आरएफसी कंपाउंड में 30 हजार वर्ग गज वक्फ की जमीन और नंगलाताशी में भी वक्फ की आधी जमीन को भूमाफियाओं ने बेच डाला। जो जांच में साबित हो चुका है, लेकिन यहां भी एक इंच भूमि अभी तक कब्जा मुक्त नहीं करायी गयी है।

3. हापुड़ रोड पर ही सरकारी जमीन पर 1947 में बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों को  तोड़कर लोगों ने आवास बनाकर कब्जा कर लिया। लेकिन  प्रशासन यहां भी कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है।

4. शहरी क्षेत्र में ही एनएच-58 के पास एक इंस्टीट्यूट ने सरकारी जमीन कब्जा रखी है। जिसकी जांच पूरी होने के बाद भी प्रशासन यहां भी कब्जा हटाकर अपना कब्जा नहीं ले पाया है।

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