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Chhath Puja 2024: नहाय-खाय के साथ छठ पूजा आज से, नारी सशक्तिकरण का भी संदेश देता है सूर्य उपासना का यह पर्व
Tue, 05 Nov 2024 12:10 PM IST
डिंपल सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: डिंपल सिरोही
Updated Tue, 05 Nov 2024 12:10 PM IST
सार
हिंदू धर्म में छठ पर्व का बड़ा महत्व है। मुख्यतौर पर छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। हालांकि अब छठ पर्व बड़े पैमाने पर देशभर के विभिन्न राज्यों में भी मनाया जाता है।
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छठ पूजा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व नहाय खाय के साथ आज से शुरू हो रहा है। इसमें छठ मैया की पूजा के साथ भगवान भास्कर की उपासना की जाती है। महिलाएं बच्चों के स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु के लिए 36 घंटे तक कठिन उपवास करती हैं। यहां भी पूर्वांचल के लोग बड़े उत्साह से यह पर्व मनाते हैं। यह पर्व पांच से आठ नवंबर तक चलेगा।
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आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि छठ पूजा में पानी में खड़े होकर स्नान, उपवास, और सूर्य को अर्घ्य देना शामिल है। प्रकृति का छठे अंश होने के कारण इस देवी का नाम षष्ठी देवी रखा गया। यह देवी बालकों की रक्षा और आयु प्रदान करती हैं। स्कंद पुराण में इन्हें ही देवी कात्यायनी कहा गया है। षष्ठी तिथि शिशुओं के संरक्षण व संवर्धन की देवी हैं।
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छठ पर्व को लेकर सजी दुकानें व खरीदारी करते लोग।
पांच नवंबर : नहाय खाय
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि पहले दिन सूर्योदय 06:45 बजे और सूर्यास्त शाम 05:27 बजे होगा। व्रती महिलाएं नदी में स्नान के बाद नए वस्त्र धारण कर भोजन ग्रहण करेंगी। इस दिन व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि पहले दिन सूर्योदय 06:45 बजे और सूर्यास्त शाम 05:27 बजे होगा। व्रती महिलाएं नदी में स्नान के बाद नए वस्त्र धारण कर भोजन ग्रहण करेंगी। इस दिन व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही घर के बाकी सदस्य भोजन ग्रहण करते हैं।
छह नवंबर : खरना
दूसरे दिन बुधवार को खरना होगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 06:46 बजे और सूर्यास्त शाम 05:26 बजे होगा। इस दिन व्रती एक समय मीठा भोजन करते हैं। इस दिन गुड़ से बनी चावल की खीर खाई जाती है।
दूसरे दिन बुधवार को खरना होगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 06:46 बजे और सूर्यास्त शाम 05:26 बजे होगा। इस दिन व्रती एक समय मीठा भोजन करते हैं। इस दिन गुड़ से बनी चावल की खीर खाई जाती है।
छठ पूजन के पूर्व सूप और दउरा की खरीदारी करतीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
सात नवंबर : डूबते सूर्य को अर्घ्य
तीसरे दिन गुरुवार को संध्या समय में नदी या सरोवर के घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इससे पहले व्रती महिलाएं सूर्य उदय होने से पहले रात को मिश्री डालकर पानी पीती हैं। फिर शाम के समय सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। भगवान सूर्य देव की उपासना के लिए इस दिन तरह तरह के पकवान जिसमें ठेकुआ और मौसमी फल आदि अर्पित किए जाते हैं। डूबते सूर्य को अर्ध्य देने का समय शाम 5:27 बजे तक रहेगा।
तीसरे दिन गुरुवार को संध्या समय में नदी या सरोवर के घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इससे पहले व्रती महिलाएं सूर्य उदय होने से पहले रात को मिश्री डालकर पानी पीती हैं। फिर शाम के समय सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। भगवान सूर्य देव की उपासना के लिए इस दिन तरह तरह के पकवान जिसमें ठेकुआ और मौसमी फल आदि अर्पित किए जाते हैं। डूबते सूर्य को अर्ध्य देने का समय शाम 5:27 बजे तक रहेगा।
छठ पूजा के लिए मिट्टी के चूल्हे
- फोटो : अमर उजाला
आठ नवंबर : उगते सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सूर्य देव को अर्घ्य देते समय संतान और परिवार की सुख शांति बनाए रखने की कामना की जाती है। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है और व्रत का समापन होता है। उगते सूर्य को अर्घ्य सूर्योदय सुबह 06:47 बजे होगा। इसके बाद ही 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है।
छठ पूजा के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सूर्य देव को अर्घ्य देते समय संतान और परिवार की सुख शांति बनाए रखने की कामना की जाती है। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है और व्रत का समापन होता है। उगते सूर्य को अर्घ्य सूर्योदय सुबह 06:47 बजे होगा। इसके बाद ही 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है।
छठ पूजा के लिए मिट्टी के चूल्हे
- फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्ष देवता हैं सूर्य नारायण
सूर्यनारायण प्रत्यक्ष देवता हैं। इनका वर्तमान युग में भी साक्षात दर्शन किया जाता है। वैदिक ऋषियों ने सूर्य की दो प्रकार की स्थिति का अनुभव किया। पहला दृश्य और दूसरा अदृश्य। पहली स्थिति में सूर्यदेवता आंखों से दिखते हैं। दूसरी स्थिति में ज्ञान चक्षुओं से सूर्य का अनुभव किया जाता है। सूर्य का अदृश्य प्रभाव सारी चराचर वस्तुओं में समाया है। यह सर्वव्यापी है। छठ पूजा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी है।
सूर्यनारायण प्रत्यक्ष देवता हैं। इनका वर्तमान युग में भी साक्षात दर्शन किया जाता है। वैदिक ऋषियों ने सूर्य की दो प्रकार की स्थिति का अनुभव किया। पहला दृश्य और दूसरा अदृश्य। पहली स्थिति में सूर्यदेवता आंखों से दिखते हैं। दूसरी स्थिति में ज्ञान चक्षुओं से सूर्य का अनुभव किया जाता है। सूर्य का अदृश्य प्रभाव सारी चराचर वस्तुओं में समाया है। यह सर्वव्यापी है। छठ पूजा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी है।