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सेंट्रल मार्केट : सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं व्यापारियों की निगाहें, 27 को होगी सुनवाई
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मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। एक ओर जहां शासन की नई भवन एवं विकास उपविधि से व्यापारियों में राहत की उम्मीद जगी है वहीं दूसरी ओर आरटीआई कार्यकर्ता की आपत्तियों ने मामले को कानूनी पेचीदगियों में उलझा दिया है। खुराना ने इस नियमितीकरण के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री व सुप्रीम कोर्ट में पत्र भेजा है। अब इस पूरे प्रकरण पर 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी तय है।
बृहस्पतिवार को आवास एवं विकास परिषद की टीम ने बाजार के कुछ हिस्सों में पहुंचकर निशान लगाने का काम किया। शासन के सकारात्मक रुख को देखते हुए व्यापारियों का मानना है कि नई उपविधि के तहत बाजार का नियमितीकरण जनहित में होगा। यदि आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को मान्यता मिल जाती है तो क्षेत्र के 1468 आवासीय भवनों में चल रहे कॉम्प्लेक्स और दुकानों से जुड़े करीब एक लाख परिवारों का रोजगार सुरक्षित हो जाएगा।
विधानसभा में गूंजा मामला: क्या बदलेगा भू-उपयोग
सरधना विधायक अतुल प्रधान द्वारा विधानसभा में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया था कि क्षेत्र का भू-उपयोग बदला जा सकता है। इससे आवासीय भवनों में बनाए गए काम्प्लेक्स, दुकान आदि को मान्य करार दिया जाएगा। हालांकि मंत्री ने यह भी साफ किया कि 120 भूखंड ऐसे हैं, जिनका भू-उपयोग किसी भी स्थिति में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। शेष संपत्तियों को राहत मिलने की प्रबल संभावना है।
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सेंट्रल मार्केट के मामले में 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। न्याय मूर्ति जेबी पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता द्वारा इस प्रकरण में 6 हफ्ते में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के तहत मुख्यमंत्री और सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति पत्र दाखिल किया। लोकेश खुराना ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 141 एवं 144 के अंतर्गत पत्र प्रेषित कर सेंट्रल मार्केट सहित आवास विकास परिषद के क्षेत्रांतर्गत सभी कॉलोनियों के उपयोग परिवर्तनीय अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण के खिलाफ प्रत्यावेदन प्रस्तुत करते हुए आपत्ति व्यक्त की गई है। इसको सप्लीमेंट्री एफिडेविट के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में 27 फरवरी को सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत किया जाएगा
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बृहस्पतिवार को आवास एवं विकास परिषद की टीम ने बाजार के कुछ हिस्सों में पहुंचकर निशान लगाने का काम किया। शासन के सकारात्मक रुख को देखते हुए व्यापारियों का मानना है कि नई उपविधि के तहत बाजार का नियमितीकरण जनहित में होगा। यदि आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को मान्यता मिल जाती है तो क्षेत्र के 1468 आवासीय भवनों में चल रहे कॉम्प्लेक्स और दुकानों से जुड़े करीब एक लाख परिवारों का रोजगार सुरक्षित हो जाएगा।
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विधानसभा में गूंजा मामला: क्या बदलेगा भू-उपयोग
सरधना विधायक अतुल प्रधान द्वारा विधानसभा में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया था कि क्षेत्र का भू-उपयोग बदला जा सकता है। इससे आवासीय भवनों में बनाए गए काम्प्लेक्स, दुकान आदि को मान्य करार दिया जाएगा। हालांकि मंत्री ने यह भी साफ किया कि 120 भूखंड ऐसे हैं, जिनका भू-उपयोग किसी भी स्थिति में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। शेष संपत्तियों को राहत मिलने की प्रबल संभावना है।
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सेंट्रल मार्केट के मामले में 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। न्याय मूर्ति जेबी पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता द्वारा इस प्रकरण में 6 हफ्ते में ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने नई भवन निर्माण एवं विकास उपविधि के तहत मुख्यमंत्री और सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति पत्र दाखिल किया। लोकेश खुराना ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 141 एवं 144 के अंतर्गत पत्र प्रेषित कर सेंट्रल मार्केट सहित आवास विकास परिषद के क्षेत्रांतर्गत सभी कॉलोनियों के उपयोग परिवर्तनीय अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण के खिलाफ प्रत्यावेदन प्रस्तुत करते हुए आपत्ति व्यक्त की गई है। इसको सप्लीमेंट्री एफिडेविट के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में 27 फरवरी को सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत किया जाएगा