40 करोड़ के कार्यों से बदलेगी सीसीएसयू की सूरत
एक जुलाई सन 1965 को मेरठ यूनिवर्सिटी की शुरुआत नौचंदी में राजस्थान के भूतपूर्व गवर्नर रघुकुल तिलक के घर प्रभात प्रेस से हुई थी। यहां पर टेंट लगाकर काम होता था। इसके बाद कैलाश प्रकाश जब उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने, तो उन्होंने डिग्गी के पास पड़ी जमीन को यूनिवर्सिटी के लिए आवंटित कराया। इसके बाद यहां करीब साल भर तक टेंट आदि लगाकर काम किया गया। कक्षाएं भी टेंट में ही चलीं। बिल्डिंग बनने के बाद यूनिवर्सिटी में काम होना शुरू हुआ। पहले कुलपति प्रो. आरके सिंह ने कैंपस में बहुत काम कराया। इसके बाद से यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों की संख्या बढ़ती चली गई। साल 1992 में मेरठ यूनिवर्र्सिटी का नाम बदलकर चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी रख दिया गया।
25 करोड़ लागत से बन रहा अत्याधुनिक मूल्यांकन भवन
यूनिवर्सिटी से संबद्ध मेरठ और सहारनपुर मंडल के जिलों में 66 एडेड-राजकीय कॉलेज और एक हजार से ज्यादा सेल्फ फाइनेंस कॉलेज हैं। प्रदेश में सर्वाधिक नैक ग्रेडिंग वाले कॉलेज सीसीएसयू में हैं। यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में छह लाख के करीब छात्र-छात्राएं हैं। इन सभी की 25 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कैंपस में आठ-नौ जगह बनाए गए सेंटरों पर होता है। मूल्यांकन में तमाम समस्याएं आती हैं। ऐसे में कैंपस में छह मंजिला मूल्यांकन भवन के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। इस अत्याधुनिक भवन में उत्तर पुस्तिकाओं को रखने से लेकर मूल्यांकन के बाद उनके नंबर कंप्यूटर में फीडिंग का कार्य भी होगा। पूरी बिल्डिंग सीसीटीवी से लैस होगी। करीब 25 करोड़ की लागत से बनने वाले इस भवन के लिए बाउंड्री का काम शुरू हो गया है।
छह विभागों की बिल्डिंग का विस्तार
कैंपस में इस समय विभिन्न विषयों में एमए, एमएससी कोर्स हैं। बीटेक, बीए-एलएलबी, बीकॉम-ऑनर्स, एमकॉम (सीबीसीएस) पीजी डिप्लोमा इन योग, एमफिल-पीएचडी इन जर्नलिज्म सहित तमाम कोर्स चल रहे हैं। पिछले कई सालों में कई नए कोर्स खुले हैं। ऐसे में कई बिल्डिंग में पूरी कक्षाएं नहीं हो पा रही थीं। इसको देखते हुए नए भवनों का निर्माण शुरू हो गया है। सांख्यिकी विभाग के पीछे कई करोड़ रुपये की लागत से बिल्डिंग बनाई जा रही है। इसके अलावा एलएलबी, कॉमर्स, हिंदी और एमबीए एवं मास कम्यूनिकेशन विभाग का विस्तार करते हुए इनके भवनों का निर्माण भी शुरू हो गया है। कई करोड़ की लागत से लाइब्रेरी बनाने का कार्य आधे से ज्यादा पूरा हो चुका है।
चार सरकारी एजेंसी करा रहीं कार्य
करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से कराए जाने वाले ये कार्य चार सरकारी एजेंसी करा रही हैं। इनमें राजकीय निर्माण निगम, आवास विकास परिषद, समाज कल्याण निर्माण इकाई और यूपीपीसीएल अलग-अलग बिल्डिंग बनाने का काम करा रही हैं।
रूसा के काम कराने में यूनिवर्सिटी अव्वल
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान - रूसा के अंतर्गत केंद्र सरकार से जो फंड मिला था, उसे प्रपोजल बनाकर जारी कराने में विश्वविद्यालय ने प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ दिया है।
सभी विभागों से भवन विस्तार को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। कार्य परिषद की बैठकों में पास होने के बाद इन भवनों के निर्माण पर मुहर लगी थी।
- प्रो. एनके तनेजा, कुलपति