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सीसीएसयू ने किया बहाल, प्रबंध समिति ने किया निलंबित
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मेरठ। कनोहरलाल महिला पीजी कॉलेज में आयोग से चयनित प्राचार्य प्रो.अलका चौधरी को मैनेजमेंट द्वारा निलंबित करने के फैसले को सीसीएसयू ने पलट दिया। जांच समिति की रिपोर्ट पर कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला ने मैनेजमेंट के फैसले को एकतरफा मानते हुए निलंबन रद्द कर दिया। विवि का यह फैसला मैनेजमेंट के लिए बड़ा झटका था, लेकिन मैनेजमेंट ने तीन घंटे में ही सीसीएसयू के फैसले को बदलकर प्राचार्य को फिर से निलंबित कर दिया है।
बता दें कि बुधवार को प्रो.अलका चौधरी कॉलेज पहुंचीं। उनके अनुसार प्राचार्य ऑफिस बंद था। उन्होंने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट दी। मैनेजमेंट ने बीते वर्ष अक्तूबर में प्रो.अलका को विभिन्न आरोपों में निलंबित कर दिया था।
कुलपति ने जांच के लिए डीएसडब्ल्यू प्रो.भूपेंद्र चौधरी के निर्देशन में आरजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो.निवेदिता मलिक, डीएन कॉलेज गुलावठी के प्राचार्य प्रो.योगेश कुमार एवं आरएसएस कॉलेज पिलखुवा की प्राचार्य प्रो. प्रेमलता की जांच समिति बनाई थी। समिति के अनुसार प्रो.अलका ने मैनेजमेंट की अनुचित वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली को विभिन्न माध्यमों से उजागर कर दिया था। इससे मैनेजमेंट और प्राचार्य में विवाद हुआ। इससे क्षुब्ध होकर निलंबन किया गया। समिति ने प्रबंध तंत्र द्वारा लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को निराधार पाया।
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समिति के अनुसार अस्थाई शिक्षिकाओं के वेतन वाउचर पर मैनेजमेंट सचिव के हस्ताक्षर हैं। ऐसे में यह उनकी परोक्ष सहमति दर्शाती है। समिति ने सोशल मीडिया पर प्रो.अलका चौधरी की पोस्ट को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार माना। सीसीएसयू की कुलपति ने प्रो. अलका के निलंबन को दुर्भावनावश माना। इसी क्रम में अक्तूबर-2024 के निलंबन के आदेश को स्थगित कर दिया।
इस मामले में अब कॉलेज प्रबंधन समिति अध्यक्ष नीरज सिंघल का कहना है कि उन्होंने रिटायर्ड जज के माध्यम से जांच कराई है। इस रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रो. अलका चौधरी ने वित्तीय अनियमितताएं की हैं। इसलिए उन्हें फिर निलंबित किया जा रहा है। अगर प्राचार्य अपनी जगह सही है तो 15 दिन में वह अपना जवाब दे सकती हैं।
निलंबन से आहत प्राचार्य ने लिखी किताब
प्रो.अलका चौधरी ने ’द कनोहरलाल फाइल्स : द ट्रूथ अनमॉस्कड’ शीर्षक से किताब लिख दी है। प्रो.अलका के अनुसार वह कॉलेज के भ्रष्टाचार, प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत और प्रबंध तंत्र के खेल को इस किताब में उजागर करेंगी। प्रो.अलका के अनुसार वह चुप बैठने वाली नहीं हैं। जीत सत्य की होती है। यह किताब मई के आखिर तक प्रकाशित होने की उम्मीद है।
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बता दें कि बुधवार को प्रो.अलका चौधरी कॉलेज पहुंचीं। उनके अनुसार प्राचार्य ऑफिस बंद था। उन्होंने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट दी। मैनेजमेंट ने बीते वर्ष अक्तूबर में प्रो.अलका को विभिन्न आरोपों में निलंबित कर दिया था।
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कुलपति ने जांच के लिए डीएसडब्ल्यू प्रो.भूपेंद्र चौधरी के निर्देशन में आरजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो.निवेदिता मलिक, डीएन कॉलेज गुलावठी के प्राचार्य प्रो.योगेश कुमार एवं आरएसएस कॉलेज पिलखुवा की प्राचार्य प्रो. प्रेमलता की जांच समिति बनाई थी। समिति के अनुसार प्रो.अलका ने मैनेजमेंट की अनुचित वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली को विभिन्न माध्यमों से उजागर कर दिया था। इससे मैनेजमेंट और प्राचार्य में विवाद हुआ। इससे क्षुब्ध होकर निलंबन किया गया। समिति ने प्रबंध तंत्र द्वारा लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को निराधार पाया।
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समिति के अनुसार अस्थाई शिक्षिकाओं के वेतन वाउचर पर मैनेजमेंट सचिव के हस्ताक्षर हैं। ऐसे में यह उनकी परोक्ष सहमति दर्शाती है। समिति ने सोशल मीडिया पर प्रो.अलका चौधरी की पोस्ट को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार माना। सीसीएसयू की कुलपति ने प्रो. अलका के निलंबन को दुर्भावनावश माना। इसी क्रम में अक्तूबर-2024 के निलंबन के आदेश को स्थगित कर दिया।
इस मामले में अब कॉलेज प्रबंधन समिति अध्यक्ष नीरज सिंघल का कहना है कि उन्होंने रिटायर्ड जज के माध्यम से जांच कराई है। इस रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रो. अलका चौधरी ने वित्तीय अनियमितताएं की हैं। इसलिए उन्हें फिर निलंबित किया जा रहा है। अगर प्राचार्य अपनी जगह सही है तो 15 दिन में वह अपना जवाब दे सकती हैं।
निलंबन से आहत प्राचार्य ने लिखी किताब
प्रो.अलका चौधरी ने ’द कनोहरलाल फाइल्स : द ट्रूथ अनमॉस्कड’ शीर्षक से किताब लिख दी है। प्रो.अलका के अनुसार वह कॉलेज के भ्रष्टाचार, प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत और प्रबंध तंत्र के खेल को इस किताब में उजागर करेंगी। प्रो.अलका के अनुसार वह चुप बैठने वाली नहीं हैं। जीत सत्य की होती है। यह किताब मई के आखिर तक प्रकाशित होने की उम्मीद है।