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सीसीएसयू : सस्पेंड कर्मचारियों को नोटिस, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज पर उठे सवाल
Sun, 26 Jul 2020 01:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2020 01:39 AM IST
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सीसीएसयू
सीसीएसयू में 28 महीने पहले हुए एमबीबीएस कॉपी घोटाले में आरोपी छात्रों का रिजल्ट जारी करने वाले चारों सस्पेंड कर्मचारियों को शनिवार को नोटिस जारी कर दिए गए। छात्रों के रिजल्ट को कैंसिल करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भी पत्र लिखा गया है। पूरे मामले में मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की जानकारी होने के बावजूद आखिर वहां से परीक्षा फार्म विवि के लिए कैसे फॉरवर्ड कर दिए गए। इस मामले में कॉलेज को भी नोटिस जारी किया जा रहा है।
17 मार्च 2018 को एसटीएफ ने सीसीएसयू में एमबीबीएस की कॉपियों की अदला-बदला किए जाने का खुलासा किया था। पूरे गोरखधंधे में विवि के एक छात्र नेता कविराज एवं विवि के कर्मचारी पवन कुमार, संदीप, कपिल एवं रिटायर कर्मचारी चंद्रप्रकाश और सलेखचंद्र को जेल भेजा था। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के जिन छात्रों आयुष और स्वर्णजीत ने कॉपी बदलवाने का प्रयास किया था, उनको भी जेल भेजा गया था।
विवि ने उनको यूएफएम श्रेणी में डाल दिया था। लेकिन रिजल्ट रोके जाने के आदेशों के बाद भी प्रोफेशनल सेक्सन में तैनात रहे चार कर्मचारी कार्यालय अधीक्षक अमित कौशिक, प्रभारी हर्ष गुप्ता, प्रभारी राजकुमार गौतम और वरिष्ठ सहायक तृप्ति रस्तोगी इनका रिजल्ट ऑनलाइन जारी करते रहे। 20 फरवरी 2020 को दोनों का फाइनल ईयर का रिजल्ट जारी कर दिया गया था। चारों कर्मचारियों को सस्पेंड किए जाने के बाद शनिवार को नोटिस जारी किया गया है कि उन्होंने यूएफएम श्रेणी के बाद भी रिजल्ट कैैसे जारी किया।
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17 मार्च 2018 को एसटीएफ ने सीसीएसयू में एमबीबीएस की कॉपियों की अदला-बदला किए जाने का खुलासा किया था। पूरे गोरखधंधे में विवि के एक छात्र नेता कविराज एवं विवि के कर्मचारी पवन कुमार, संदीप, कपिल एवं रिटायर कर्मचारी चंद्रप्रकाश और सलेखचंद्र को जेल भेजा था। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के जिन छात्रों आयुष और स्वर्णजीत ने कॉपी बदलवाने का प्रयास किया था, उनको भी जेल भेजा गया था।
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विवि ने उनको यूएफएम श्रेणी में डाल दिया था। लेकिन रिजल्ट रोके जाने के आदेशों के बाद भी प्रोफेशनल सेक्सन में तैनात रहे चार कर्मचारी कार्यालय अधीक्षक अमित कौशिक, प्रभारी हर्ष गुप्ता, प्रभारी राजकुमार गौतम और वरिष्ठ सहायक तृप्ति रस्तोगी इनका रिजल्ट ऑनलाइन जारी करते रहे। 20 फरवरी 2020 को दोनों का फाइनल ईयर का रिजल्ट जारी कर दिया गया था। चारों कर्मचारियों को सस्पेंड किए जाने के बाद शनिवार को नोटिस जारी किया गया है कि उन्होंने यूएफएम श्रेणी के बाद भी रिजल्ट कैैसे जारी किया।
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परीक्षा समिति तक नहीं पहुंचा आदेश
दोनों छात्रों का रिजल्ट यूएफएम में डाले जाने के संबंध में तत्कालीन रजिस्ट्रार ने परीक्षा नियंत्रक को आदेश किए थे। परीक्षा नियंत्रक ने उप कुलसचिव को पत्र भेज दिया था। उन्होंने प्रोफेशनल सेक्शन में भेज दिया। परीक्षा समिति में मामले को नहीं रखा गया।
दब जाते हैं मामले
एमबीबीएस के जब भी मामले आए दबकर रह गए। नौ जुलाई 2019 को एमबीबीएस की सेमेस्टर एवं सप्लीमेंट्री परीक्षा के दौरान मुजफ्फरनगर शहर के जैन कन्या डिग्री कॉलेज में 12 मुन्ना भाई सामूहिक नकल करते पकड़े गए। ये सभी अंडरगारमेंट और विग में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपाकर नकल कर रहे थे। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉयड द्वारा नकल पकड़े जाने पर हंगामा भी हुआ।
बात इतनी बढ़ गई थी कि विवि के अधिकारियों को मुजफ्फरनगर पुलिस के आला अधिकारियों को फोन करना पड़ा था। सेंटर पर मीडिया को रोकने की कोशिश की गई थी। पूरा मामला सुर्खियों में आया तो मुजफ्फरनगर की शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
इन सभी 12 छात्रों को विवि प्रशासन ने यूएफएम की श्रेणी में डाल दिया। लेकिन ये बीए-बीएससी-बीकॉम या एलएलबी के छात्रों की तरह नहीं थे। ये कोर्ट गए और पेपर देने के आदेश ले आए। शायद ये पहला ऐसा मामला है जब सामूहिक नकल के मामले के बावजूद पेपर दिए गए हों। जिस सेंटर पर ये नकल करते पकड़े गए उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
एसटीएफ भी नहीं कर पाई कुछ
एसटीएफ ने जहां एमबीबीएस में कॉपियों की अदला-बदली में आठ लोग जेल भेजे, वहीं पेपर आउट होने के मामले में वह भी कुछ नहीं कर पाई। क्योंकि पूरा मामला मेडिकल पुलिस के पास था। पुलिस ने इस मामले में एक भी कदम आगे बढ़ने की जरूरत नहीं समझी। क्योंकि यह मामला बड़े लोगों से जुड़ा हुआ था।
दोनों छात्रों का रिजल्ट यूएफएम में डाले जाने के संबंध में तत्कालीन रजिस्ट्रार ने परीक्षा नियंत्रक को आदेश किए थे। परीक्षा नियंत्रक ने उप कुलसचिव को पत्र भेज दिया था। उन्होंने प्रोफेशनल सेक्शन में भेज दिया। परीक्षा समिति में मामले को नहीं रखा गया।
दब जाते हैं मामले
एमबीबीएस के जब भी मामले आए दबकर रह गए। नौ जुलाई 2019 को एमबीबीएस की सेमेस्टर एवं सप्लीमेंट्री परीक्षा के दौरान मुजफ्फरनगर शहर के जैन कन्या डिग्री कॉलेज में 12 मुन्ना भाई सामूहिक नकल करते पकड़े गए। ये सभी अंडरगारमेंट और विग में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपाकर नकल कर रहे थे। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉयड द्वारा नकल पकड़े जाने पर हंगामा भी हुआ।
बात इतनी बढ़ गई थी कि विवि के अधिकारियों को मुजफ्फरनगर पुलिस के आला अधिकारियों को फोन करना पड़ा था। सेंटर पर मीडिया को रोकने की कोशिश की गई थी। पूरा मामला सुर्खियों में आया तो मुजफ्फरनगर की शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
इन सभी 12 छात्रों को विवि प्रशासन ने यूएफएम की श्रेणी में डाल दिया। लेकिन ये बीए-बीएससी-बीकॉम या एलएलबी के छात्रों की तरह नहीं थे। ये कोर्ट गए और पेपर देने के आदेश ले आए। शायद ये पहला ऐसा मामला है जब सामूहिक नकल के मामले के बावजूद पेपर दिए गए हों। जिस सेंटर पर ये नकल करते पकड़े गए उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
एसटीएफ भी नहीं कर पाई कुछ
एसटीएफ ने जहां एमबीबीएस में कॉपियों की अदला-बदली में आठ लोग जेल भेजे, वहीं पेपर आउट होने के मामले में वह भी कुछ नहीं कर पाई। क्योंकि पूरा मामला मेडिकल पुलिस के पास था। पुलिस ने इस मामले में एक भी कदम आगे बढ़ने की जरूरत नहीं समझी। क्योंकि यह मामला बड़े लोगों से जुड़ा हुआ था।