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मार्कशीट और डिग्री में बढे़ंगे सिक्योरिटी फीचर
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sun, 05 Jun 2016 02:07 AM IST
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सीसीएसयू लोगो
- फोटो : अमर उजाला
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सीसीएसयू की असली की तरह फर्जी मार्कशीट बनना आसान नहीं होगा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट में सिक्योरिटी फीचर बढ़ाने जा रहा है। आधुनिक तकनीक और सिक्योरिटी फीचर को विवि अपने सर्टिफिकेट में जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। विदेश जाने वाले डॉक्यूमेंट ट्रांसक्रिप्ट अब साधारण लेटर पैड पर नहीं बनेगा। सिक्योर कागज पर यह छात्र को दी जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है।
फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले रैकेटों ने विवि का नाम कई बार बदनाम किया है। इसके मद्देनजर विवि मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट में सिक्योरिटी फीचर बढ़ाने जा रहा है। अभी भी इन कागजात में सिक्योरिटी फीचर हैं, लेकिन नई तकनीक से ओर इजाफा करने की तैयारी है।
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विवि की मार्कशीट में आठ सिक्योरिटी फीचर हैं। जिनमें बारकोड और इंक आदि शामिल हैं। इसी तरह डिग्री में भी सिक्योरिटी फीचर हैं। कागज से लेकर इंक तक और होलोग्राम सिक्योरिटी का फीचर हैं। सालों से यह फीचर चले आ रहे हैं। अब विवि इनमें बढ़ोतरी करने जा रहा है। योजना क्यूआर्क कोड लागू करने की है। यह थ्री डी इमेज में होगा। इस कोड में मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट के डाटा की इमेज होगी। वह देखा जा सकेगा। खास बात यह होगी कि इसे हटाकर दूसरी जगह नहीं लगाया जा सकता। सुरक्षा के मामलों में इस कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है। एकेडमिक्स में इसकी शुरुआत अभी नहीं हुई है। सीसीएसयू पहली यूनिवर्सिटी हो सकती है।
ट्रांसक्रिप्ट में भी सिक्योरिटी फीचर
विदेश नौकरी करने और पढ़ाई के लिए जाने वाले विवि के छात्रों को ट्रांसक्रिप्ट की जरूरत पड़ती है। यह ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसमें छात्र की डिग्री के सभी वर्ष और सेमेस्टर के नंबर एक साथ लिखे जाते हैं। कहने का मतलब छात्र का एकेडमिक रिकॉर्ड होता है। जिसे विवि प्रमाणित करके देती है। अभी तक ट्रांसक्रिप्ट विवि के लेटर पैड पर दी जा रही है। अब ट्रांसक्रिप्ट सिक्योर कागज पर प्रिंट की जाएगी। अलग से इसका फार्मेट होगा।
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जल्द ही इस पर फैसला हो जाएगा। विदेश जाने वाले डॉक्यूमेंट ट्रांसक्रिप्ट अब साधारण लेटर पैड पर नहीं बनेगा। सिक्योर कागज पर यह छात्र को दी जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है।
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फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले रैकेटों ने विवि का नाम कई बार बदनाम किया है। इसके मद्देनजर विवि मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट में सिक्योरिटी फीचर बढ़ाने जा रहा है। अभी भी इन कागजात में सिक्योरिटी फीचर हैं, लेकिन नई तकनीक से ओर इजाफा करने की तैयारी है।
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विवि की मार्कशीट में आठ सिक्योरिटी फीचर हैं। जिनमें बारकोड और इंक आदि शामिल हैं। इसी तरह डिग्री में भी सिक्योरिटी फीचर हैं। कागज से लेकर इंक तक और होलोग्राम सिक्योरिटी का फीचर हैं। सालों से यह फीचर चले आ रहे हैं। अब विवि इनमें बढ़ोतरी करने जा रहा है। योजना क्यूआर्क कोड लागू करने की है। यह थ्री डी इमेज में होगा। इस कोड में मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट के डाटा की इमेज होगी। वह देखा जा सकेगा। खास बात यह होगी कि इसे हटाकर दूसरी जगह नहीं लगाया जा सकता। सुरक्षा के मामलों में इस कोड का इस्तेमाल किया जा रहा है। एकेडमिक्स में इसकी शुरुआत अभी नहीं हुई है। सीसीएसयू पहली यूनिवर्सिटी हो सकती है।
ट्रांसक्रिप्ट में भी सिक्योरिटी फीचर
विदेश नौकरी करने और पढ़ाई के लिए जाने वाले विवि के छात्रों को ट्रांसक्रिप्ट की जरूरत पड़ती है। यह ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसमें छात्र की डिग्री के सभी वर्ष और सेमेस्टर के नंबर एक साथ लिखे जाते हैं। कहने का मतलब छात्र का एकेडमिक रिकॉर्ड होता है। जिसे विवि प्रमाणित करके देती है। अभी तक ट्रांसक्रिप्ट विवि के लेटर पैड पर दी जा रही है। अब ट्रांसक्रिप्ट सिक्योर कागज पर प्रिंट की जाएगी। अलग से इसका फार्मेट होगा।