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Meerut News: सीसीएसयू को आज मिल सकता है ग्रेड, ए प्लस प्लस की उम्मीद
Tue, 07 Mar 2023 08:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Tue, 07 Mar 2023 08:23 AM IST
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मेरठ। 58 साल पहले शुरू हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी परीक्षा नैक का मंगलवार को रिजल्ट जारी हो सकता है। जिस तरह से विश्वविद्यालय में कार्य हुए हैं, उससे ए प्लस प्लस ग्रेड की उम्मीद है। ये ग्रेड मिला तो सीसीएसयू देश के नामचीन विश्वविद्यालयों में शामिल हो जाएगा।
चमचमाते चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की शुरुआत बेहद मुश्किल परिस्थितियों में हुई थी। एक जुलाई सन 1965 को मेरठ यूनिवर्सिटी की शुरुआत नौचंदी में राजस्थान के पूर्व गवर्नर रघुकुल तिलक के घर प्रभात प्रेस से हुई थी। यहां पर टेंट लगाकर काम होता था। कैलाश प्रकाश जब उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने तो उन्होंने डिग्गी के पास पड़ी जमीन को विवि के लिए आवंटित कराया। 222 एकड़ में फैले विवि की पहली कक्षा टेंट-बल्ली लगाकर चलाई गई थी। करीब साल भर तक टेंट आदि लगाकर ही काम किया गया। कक्षाएं भी टेंट में ही चलीं। पहले कुलपति प्रो. आरके सिंह ने कैंपस में बहुत कार्य कराए। वर्ष 1994 में मेरठ विवि का नाम पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर हो गया। 90 के दशक जहां सीसीएसयू के अंतर्गत 50 कॉलेज ही आते थे वहीं, अब इनकी संख्या पांच सौ के करीब हो गई है। साढ़े चार लाख छात्र-छात्राएं सीसीएसयू के कॉलेजों में शिक्षा लेते हैं।
एक समय था जब सीसीएसयू की डिग्री का नाम आते ही छात्र-छात्राओं को दूसरे प्रदेशों में संदेह की नजरों से देखा जाता था, लेकिन अब विवि प्रदेश में सबसे ज्यादा नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र दे रहा है। कुछ वर्षों में खुले यूजी कोर्सों को छोड़ दें तो यहां पर पीजी, एमफिल और पीएचडी करने वाले अधिकतर छात्र-छात्राओं को अपने क्षेत्र में कामयाबी मिली है। डिग्री कॉलेजों में सबसे ज्यादा शिक्षक यहीं के छात्र-छात्राएं चयनित हो रहे हैं।
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नैक से पहले बहुत हुए कार्य
कैंपस में नैक निरीक्षण से पहले कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने बहुत से नए कार्य कराए। शोध को बढ़ावा देने से लेकर दर्जनों नए काेर्स शुरू कराए गए। कैंपस का इतना सुंदरीकरण पहले कभी नहीं हुआ। जिसके चलते नैक टीम ने हर बिंदु पर सीसीएसयू की प्रशंसा की। ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने से सीसीएसयू देश के गिनती के विश्वविद्यालयों में शामिल हो जाएगा।
पढ़ाई के साथ पर्यावरण बचाने की शिक्षा
सीसीएसयू कैंपस में पढ़ाई के साथ ही प्रकृति बचाने की भी पहल की जा रही है। 222 एकड़ में फैले विवि का 80 फीसदी क्षेत्र हरियाली से घिरा है। यहां पर साढ़े पांच सौ प्रजाति के 13 हजार से ज्यादा पेड़ हैं। हरियाली की वजह से यहां पर दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां है। घूमने के लिए तपोवन के भीतर खूबसूरत ट्रैक बना है, यहां पर मोरों का कुनबा भी देखा जा सकता है। पानी को संजोने के लिए 50 से अधिक रेन वाटर हार्वेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं। 70 फीसदी बिजली की खपत सोलर ऊर्जा प्लांट से हो रही है। कूड़ा निस्तारण प्लांट भी लगा है।
कोरोना काल में सब कुछ हुआ ऑनलाइन
कोरोना से पहले तक सीसीएसयू में मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन, प्रोविजनल सर्टिफिकेट आदि बनवाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। कोरोना के चलते लॉकडाउन लगा तो छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए जाने का कार्य जारी रहा। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने खुद खड़े होकर प्रमाण पत्र दिलवाए। इसके बाद पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया। अब डिग्री, मार्कशीट, माइग्रेशन और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए छात्र सीसीएसयू की वेबसाइट www.ccsu.ac.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रमाण पत्र डाक द्वारा खुद भेजे जाते हैं।
नंबरों में छू रहे आसमान
दीक्षांत समारोह में यूजी-पीजी के तमाम कोर्सों में छात्र-छात्राएं 95 फीसदी तक भी नंबर ला रहे हैं। छात्राओं का प्रतिशत भी यहां पर छात्रों से ज्यादा है।
आज नैक टीम रिपोर्ट ओपन कर सकती है। विवि के सभी शिक्षकों-कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं को ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने की उम्मीद है। सभी बेहद उत्साहित हैं। सीसीएसयू को ए प्लस प्लस ग्रेड मिल जाए तो ये हमारे लिए होली की सबसे बड़ी बधाई होगी। - प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति
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चमचमाते चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की शुरुआत बेहद मुश्किल परिस्थितियों में हुई थी। एक जुलाई सन 1965 को मेरठ यूनिवर्सिटी की शुरुआत नौचंदी में राजस्थान के पूर्व गवर्नर रघुकुल तिलक के घर प्रभात प्रेस से हुई थी। यहां पर टेंट लगाकर काम होता था। कैलाश प्रकाश जब उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने तो उन्होंने डिग्गी के पास पड़ी जमीन को विवि के लिए आवंटित कराया। 222 एकड़ में फैले विवि की पहली कक्षा टेंट-बल्ली लगाकर चलाई गई थी। करीब साल भर तक टेंट आदि लगाकर ही काम किया गया। कक्षाएं भी टेंट में ही चलीं। पहले कुलपति प्रो. आरके सिंह ने कैंपस में बहुत कार्य कराए। वर्ष 1994 में मेरठ विवि का नाम पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर हो गया। 90 के दशक जहां सीसीएसयू के अंतर्गत 50 कॉलेज ही आते थे वहीं, अब इनकी संख्या पांच सौ के करीब हो गई है। साढ़े चार लाख छात्र-छात्राएं सीसीएसयू के कॉलेजों में शिक्षा लेते हैं।
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एक समय था जब सीसीएसयू की डिग्री का नाम आते ही छात्र-छात्राओं को दूसरे प्रदेशों में संदेह की नजरों से देखा जाता था, लेकिन अब विवि प्रदेश में सबसे ज्यादा नेट और जेआरएफ उत्तीर्ण छात्र दे रहा है। कुछ वर्षों में खुले यूजी कोर्सों को छोड़ दें तो यहां पर पीजी, एमफिल और पीएचडी करने वाले अधिकतर छात्र-छात्राओं को अपने क्षेत्र में कामयाबी मिली है। डिग्री कॉलेजों में सबसे ज्यादा शिक्षक यहीं के छात्र-छात्राएं चयनित हो रहे हैं।
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नैक से पहले बहुत हुए कार्य
कैंपस में नैक निरीक्षण से पहले कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने बहुत से नए कार्य कराए। शोध को बढ़ावा देने से लेकर दर्जनों नए काेर्स शुरू कराए गए। कैंपस का इतना सुंदरीकरण पहले कभी नहीं हुआ। जिसके चलते नैक टीम ने हर बिंदु पर सीसीएसयू की प्रशंसा की। ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने से सीसीएसयू देश के गिनती के विश्वविद्यालयों में शामिल हो जाएगा।
पढ़ाई के साथ पर्यावरण बचाने की शिक्षा
सीसीएसयू कैंपस में पढ़ाई के साथ ही प्रकृति बचाने की भी पहल की जा रही है। 222 एकड़ में फैले विवि का 80 फीसदी क्षेत्र हरियाली से घिरा है। यहां पर साढ़े पांच सौ प्रजाति के 13 हजार से ज्यादा पेड़ हैं। हरियाली की वजह से यहां पर दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां है। घूमने के लिए तपोवन के भीतर खूबसूरत ट्रैक बना है, यहां पर मोरों का कुनबा भी देखा जा सकता है। पानी को संजोने के लिए 50 से अधिक रेन वाटर हार्वेसिंग सिस्टम लगाए गए हैं। 70 फीसदी बिजली की खपत सोलर ऊर्जा प्लांट से हो रही है। कूड़ा निस्तारण प्लांट भी लगा है।
कोरोना काल में सब कुछ हुआ ऑनलाइन
कोरोना से पहले तक सीसीएसयू में मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन, प्रोविजनल सर्टिफिकेट आदि बनवाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। कोरोना के चलते लॉकडाउन लगा तो छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए जाने का कार्य जारी रहा। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने खुद खड़े होकर प्रमाण पत्र दिलवाए। इसके बाद पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया। अब डिग्री, मार्कशीट, माइग्रेशन और प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए छात्र सीसीएसयू की वेबसाइट www.ccsu.ac.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रमाण पत्र डाक द्वारा खुद भेजे जाते हैं।
नंबरों में छू रहे आसमान
दीक्षांत समारोह में यूजी-पीजी के तमाम कोर्सों में छात्र-छात्राएं 95 फीसदी तक भी नंबर ला रहे हैं। छात्राओं का प्रतिशत भी यहां पर छात्रों से ज्यादा है।
आज नैक टीम रिपोर्ट ओपन कर सकती है। विवि के सभी शिक्षकों-कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं को ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने की उम्मीद है। सभी बेहद उत्साहित हैं। सीसीएसयू को ए प्लस प्लस ग्रेड मिल जाए तो ये हमारे लिए होली की सबसे बड़ी बधाई होगी। - प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति