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CCS University: किसी छात्र को जाति से बुलाया, तो दर्ज होगा रैगिंग का केस, जानें क्या-क्या कहने पर लगा बैन
Wed, 09 Jul 2025 08:56 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Wed, 09 Jul 2025 08:56 PM IST
सार
Meerut News: नए सेशन से पहले सीसीएसयू कैंपस और उससे जुड़े कॉलेजों के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई है। किसी का नाम बिगाड़ना भी रैगिंग की श्रेणी में आएगा।
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CCSU, सीसीएसयू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूजीसी ने एंटी रैगिंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत नया सेशन शुरू होने से पहले चौधरी चरण सिंह विवि अलर्ट मोड पर आ गया है। अब किसी को बिहारी, जाट, चिंकी-पिंकी कहकर बुलाना रैगिंग की श्रेणी में आएगा।
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मानसिक व शारीरिक शोषण के अलावा रंग, जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्रीय मूल, भाषाई पहचान, जन्म स्थान, निवास स्थान या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर किसी तरह की टिप्पणी करने पर रैगिंग के तहत मामला दर्ज होगा। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को यूजीसी के एंटी-रैगिंग 2009 के तहत नियमों का पालन करना जरूरी है। इसमें आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, मेडिकल, लॉ, मैनेजमेंट, फार्मेसी, इंजीनियरिंग समेत सीसीएसयू परिसर और उससे संबंधित कॉलेज भी शामिल हैं।
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बता दें कि इस समय चौधरी चरण सिंह विवि में नए शैक्षणिक सत्र में दाखिले के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है। विवि की ओर से रैगिंग रोकने के हर साल टीम बनाई जाती हैं, जो शौचालय, कैंटीन, हॉस्टल आदि का निरीक्षण कर रिपोर्ट देती हैं। इस वर्ष रैगिंग से निपटने के लिए छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों के लिए छोटे वीडियो भी बनाए जाएंगे। अभी तक पोस्टर, वर्कशॉप के जरिये जागरूक किया जाता रहा है, अब वीडियो की भी मदद ली जाएगी।
नियमित संवाद के जरिये करेंगे जागरूक
शिक्षण संस्थानों को रैगिंग मुक्त कैंपस बनाने पर काम करना होगा। इसमें एंटी-रैगिंग समिति बनाने, छात्रों के साथ नियमित संवाद एवं परामर्श, छात्रावासों का औचक निरीक्षण शामिल है। छात्रों के साथ नियमित संवाद व उनकी काउंसलिंग होगी। कैंपस में डार्क प्लेस यानी ऐसे स्थानों पर कैमरा लगाने जरूरी होंगे, जहां किसी की सीधी नजर नहीं पड़ती।
शिक्षण संस्थानों को रैगिंग मुक्त कैंपस बनाने पर काम करना होगा। इसमें एंटी-रैगिंग समिति बनाने, छात्रों के साथ नियमित संवाद एवं परामर्श, छात्रावासों का औचक निरीक्षण शामिल है। छात्रों के साथ नियमित संवाद व उनकी काउंसलिंग होगी। कैंपस में डार्क प्लेस यानी ऐसे स्थानों पर कैमरा लगाने जरूरी होंगे, जहां किसी की सीधी नजर नहीं पड़ती।
कमेटी सदस्यों के नाम व नंबर वेबसाइट पर होंगे जारी
संस्थानों को वेबसाइट पर कैंपस को रैगिंग मुक्त बनाने संबंधी जानकारियां देनी होंगी। इसमें समिति सदस्यों के फोन नंबर, ईमेल-आईडी, लैंडलाइन नंबर व नाम होने चाहिए। यदि कोई सूचना मिलती है तो बिना देरी के कार्रवाई करनी होगी।
संस्थानों को वेबसाइट पर कैंपस को रैगिंग मुक्त बनाने संबंधी जानकारियां देनी होंगी। इसमें समिति सदस्यों के फोन नंबर, ईमेल-आईडी, लैंडलाइन नंबर व नाम होने चाहिए। यदि कोई सूचना मिलती है तो बिना देरी के कार्रवाई करनी होगी।