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Meerut News: इलाज न मिलने पर नवजात की मौत मामला
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पीड़ित नाबालिग मां को मिलेगा 50 हजार रुपये हर्जाना
- उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने दिए आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। प्राथमिक चिकित्सालय केंद्र सरधना में इलाज न मिलने पर नवजात शिशु की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग लखनऊ द्वारा पीड़ित नाबालिग मां को 50 हजार रुपये हर्जाना देने के आदेश किए हैं।
गाजियाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा एक प्रार्थना पत्र आयोग को 27 मई 2024 को दिया गया कि 24 मई 2024 को एक गर्भवती (किशोरी) को प्राथमिक चिकित्सालय सरधना ले जाया गया, जहां स्टाफ द्वारा इलाज नहीं दिया गया। नवजात शिशु का जन्म खुले स्थान पर हो गया, जिसके चलते शिशु की वहीं पर मृत्यु हो गई। पीड़ित मां को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इस मामले में जिलाधिकारी मेरठ द्वारा तीन अधिकारियों की कमेटी नियुक्त की गई, जिसमें एडीएम वित्त, एसीएमओ और एसीएम चतुर्थ ने अपनी जांच रिपोर्ट दी।
इसमें प्राथमिक चिकित्सालय अधिकारी डॉ. सरित कुमार एवं स्टाफ नर्स डोली को इलाज न दिए जाने का जिम्मेदार माना। इससे आयोग को अवगत कराया गया कि डॉ. सरित कुमार के खिलाफ विभागीय जांच की जा रही है और स्टाफ नर्स डोली को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही जननी सुरक्षा योजना के तहत 1400 रुपये पीड़िता को अदा किए गए हैं। मानवाधिकार आयोग के सदस्य जस्टिस राजीव लोचन मेहरोत्रा और सदस्य बृजभूषण ने लापरवाही के चलते नवजात शिशु की मृत्यु होने पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश को 50 हजार रुपये पीड़ित मां को दिए जाने के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस धनराशि की वसूली आरोपियों से किए जाने या न किए जाने का निर्णय सरकार के अधीन किया है।
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- उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने दिए आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। प्राथमिक चिकित्सालय केंद्र सरधना में इलाज न मिलने पर नवजात शिशु की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग लखनऊ द्वारा पीड़ित नाबालिग मां को 50 हजार रुपये हर्जाना देने के आदेश किए हैं।
गाजियाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा एक प्रार्थना पत्र आयोग को 27 मई 2024 को दिया गया कि 24 मई 2024 को एक गर्भवती (किशोरी) को प्राथमिक चिकित्सालय सरधना ले जाया गया, जहां स्टाफ द्वारा इलाज नहीं दिया गया। नवजात शिशु का जन्म खुले स्थान पर हो गया, जिसके चलते शिशु की वहीं पर मृत्यु हो गई। पीड़ित मां को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इस मामले में जिलाधिकारी मेरठ द्वारा तीन अधिकारियों की कमेटी नियुक्त की गई, जिसमें एडीएम वित्त, एसीएमओ और एसीएम चतुर्थ ने अपनी जांच रिपोर्ट दी।
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इसमें प्राथमिक चिकित्सालय अधिकारी डॉ. सरित कुमार एवं स्टाफ नर्स डोली को इलाज न दिए जाने का जिम्मेदार माना। इससे आयोग को अवगत कराया गया कि डॉ. सरित कुमार के खिलाफ विभागीय जांच की जा रही है और स्टाफ नर्स डोली को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही जननी सुरक्षा योजना के तहत 1400 रुपये पीड़िता को अदा किए गए हैं। मानवाधिकार आयोग के सदस्य जस्टिस राजीव लोचन मेहरोत्रा और सदस्य बृजभूषण ने लापरवाही के चलते नवजात शिशु की मृत्यु होने पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य उत्तर प्रदेश को 50 हजार रुपये पीड़ित मां को दिए जाने के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस धनराशि की वसूली आरोपियों से किए जाने या न किए जाने का निर्णय सरकार के अधीन किया है।
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-फोटो 58 : कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यातिथि डॉ. राजेश कुमार व साथ मौजूद प्राचार्य। स्रोत कॉ