हॉस्टल में छात्राओं के कपड़े उतरवाने पर वार्डन के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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कस्तूरबा गांधी विद्यालय में छात्राओं के कपड़े उतारने का मामला सुर्खियों में आने के बाद वार्डन को सस्पेंड कर दिया गया था। बता दें कि शनिवार को वार्डन के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।
मुजफ्फरनगर में शुक्रवार को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डन की करतूत ने हर किसी को शर्मसार कर दिया था। दरअसल, स्कूल के बाथरूम में ब्लड दिखने पर वार्डन ने लड़कियों से पूछा तो उन्होंने जानकारी होने से इंकार कर दिया था। वार्डन को शक था कि यह ब्लड मासिक धर्म का है। इस पर गुस्सा हुई वार्डन ने स्कूल की सभी 70 छात्राओं के कपड़े उतरवाकर चेक किया था। छात्राओं ने इसकी जानकारी परिजनों को दी तो हड़कंप मच गया था।
डीएम के आदेश पर वार्डन को संविदा के पद से शुक्रवार को ही हटा दिया गया था। इससे पहले महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने डीएम डीके सिंह से आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मामला खतौली ब्लाक के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय तिगाई का है। केंद्र सरकार की योजना से संचालित स्कूल में कक्षा आठ तक की 70 छात्राएं शिक्षारत हैं। सभी छात्राएं स्कूल हॉस्टल में ही रहती हैैं। गौरतलब है कि मंगलवार को निरीक्षण के दौरान वार्डन सुरेखा तोमर को स्कूल के बाथरूम में कुछ ब्लड पड़ा हुआ था। वार्डन ने छात्राओं से ब्लड के बारे में पूछा तो उन्होंने जानकारी होने से इंकार कर दिया था, जिसे देखकर वार्डन आगबबूला हो गईं थी। उन्होंने सभी 70 छात्राओं को निर्वस्त्र कर चेक किया था। शर्मसार कुछ छात्राएं रोने लगीं। बाद में कुछ छात्राओं ने इसकी जानकारी फोन पर अपने परिजनों को दे दी थी।
वहीं परिजनों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया था। सूचना पर सीओ और बीएसए ने स्कूल पहुंचकर मामले की जानकारी ली थी। घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय अधिकारियों की एक टीम गठित की थी। टीम की रिपोर्ट शुक्रवार को डीएम डीके सिंह को सौंपी गई। डीएम की रिपोर्ट पर स्कूल की वार्डन सुरेखा तोमर को सस्पेंड कर दिया गया था। वार्डन सुरेखा तोमर का कहना है कि वह सिर्फ छात्राओं से साफ सफाई के संबंध में पूछताछ कर रही थी। कपड़े उतरवाने का आरोप बेबुनियाद है। वह स्कूल के स्टाफ की राजनीति का शिकार हुई हैं। स्टाफ ने छात्राओं को उनके खिलाफ भड़काया है।