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सावधान : शहर में इतने लोगों को HIV, इससे बचने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Mon, 03 Apr 2017 08:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Mon, 03 Apr 2017 08:39 PM IST
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careful : Many people in the city are HIV, follow these tips to avoid this
एचआईवी से बचे

जरा सी भूल से परिवार तबाह हो रहे हैं। जिले में लगातार एचआईवी पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है। बड़ों की नासमझी के कारण मासूम बच्चे भी इस लाइलाज बीमारी की चपेट में हैं। उनके चेहरे से बचपन की मुस्कान छिन गई है। वे हर पल मरने को मजबूर हैं। लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर पर ऐसे ही सैकड़ों मरीजों का इलाज चल रहा है।

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जिले में पिछले साल 16000 से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए। इनमें से 328 मरीजों में एचआईवी वायरस की पुष्टि हुई। इस साल जनवरी में 29 और फरवरी में 22 मरीजों की पुष्टि हुई। जनवरी में 2047 सैंपल लिए गए, जबकि फरवरी में 1202 सैंपलों की जांच की गई।
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इलाज करा रहे मरीजों के बारे में जानेंगे तो कई तथ्य चौंकाने वाले सामने आए। नासमझी के कारण इन्होंने अपने पूरे परिवार को अंधेरे में धकेल दिया। कई दंपति एक-दूसरे पर आरोप भी लगा रहे हैं। उनके  घर में कलह ने जन्म ले लिया है। इस विवाद को कम करने के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की तरफ से एआरटी सेंटर पर चिकित्सा सुविधा के  साथ काउंसिलिंग की सुविधा भी दी  जाती है।

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पीड़ितों से मिले सामाजिक संस्था के पदाधिकारी

careful : Many people in the city are HIV, follow these tips to avoid this
एचआईवी

क्षेत्र के एक गांव में पति-पत्नी और उनके दोनों बच्चों को एड्स होने की जानकारी पाकर रविवार को एनजीओ सारथी सोशल वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष एवं सदस्य पीड़ित परिवार से मिले। यहां एनजीओ अध्यक्ष कल्पना पांडेय, सदस्य रितेश वर्मा, अशोक शर्मा, संगीता, राजीव आदि ने महिला और उसके पति समेत परिजनों से बातचीत की। उन्होंने पीड़ितों को उपचार के लिए सोमवार को मेडिकल कॉलेज बुलवाया है। एड्स पीड़ित महिला का आरोप है कि ससुराल वालों के रवैये में कोई परिर्वतन नहीं है। वे अब भी धमकी दे रहे हैं। वहीं, इस संबंध में इंस्पेक्टर मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि यदि महिला शिकायत करेगी तो कार्रवाई की जाएगी।

21 साल की उम्र में लग गई बीमारी
मुजफ्फरनगर निवासी परिवार ने 20 साल के इकलौते बेटे को मेरठ पढ़ाई के लिए भेजा। एक साल बाद युवक की तबीयत बिगड़ने लगी। दो- चार महीने इलाज चला, लेकिन ज्यादा आराम नहीं लगा। चिकित्सक ने जांच कराई तो उसमें एचआईवी पॉजिटिव पाया गया। इलाज के लिए युवक को सरकारी सेंटर भेजा गया। युवक ने इस बीमारी के बारे में परिवार वालों को नहीं बताया। तीन साल बाद परिजनों ने शादी तय कर दी। फिर भी युवक ने मना नहीं किया। अब पत्नी को भी यह बीमारी लग गई है।

जागरूकता की जरूरत
डॉ. रवि राणा (मनोचिकित्सक) मेडिकल कॉलेज ने बताया कि एचआईवी को रोकने के लिए व्यापक पैमाने पर जागरूकता लाने की जरूरत है। इससे दो फायदे होंगे। एक तो बीमारी पर अंकुश लगेगा, दूसरे परिवार में होने वाले विवाद भी रोके जा सकेंगे। दंपति की काउंसिलिंग जरूरी है।

HIV से कैसे बचे
एचआईवी से बचने के लिए कई अहम बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे- सुरक्षित यौन संबंध, ब्लड लेने पर नई सिरींज का प्रयोग करें। यह बहुत खतरनाक बीमारी है इसलिए इससे बचे और जल्दबाजी में कोई गलत काम न करें।  

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