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कैंट विधायक का नाम विस अध्यक्ष की दौड़ में
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Mar 2017 02:06 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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भाजपा के मेरठ सहित आसपास के विधायक मंत्री बनने की जुगत में लगे हैं। सबके अपने-अपने दावे हैं और समर्थकों को भी भरोसा है कि उनके नेता को अहम पद मिलेगा। इसी बीच मेरठ कैंट से विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल का नाम बड़ी जिम्मेदारी के लिए सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है। हिंदुत्व के चेहरे संगीत सोम को भी मंत्री बनने का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
मेरठ कैंट से सत्यप्रकाश अग्रवाल चार बार से विधायक हैं। वह पहली बार 2002 में विधायक बने थे। इस बार उन्होंने कैंट सीट से लगभग 76 हजार वोटों से जीत हासिल की है। लोकसभा चुनावों में भी मेरठ कैंट से भाजपा को डेढ़ लाख से ज्यादा वोट मिले थे। उन्हें गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अलावा संघ के कई नेताओं का करीबी बताया जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें वैश्य होने का भी लाभ मिल सकता है।
चुनाव से पहले उनकी उम्र का हवाला देकर टिकट कटने की बात कही जा रही थी। लेकिन बड़ी जीत हासिल करके सत्यप्रकाश अग्रवाल ने अपना लोहा मनवा लिया। दरअसल भाजपा की पहले चरण में पश्चिम से अच्छी हवा चली थी। माना जा रहा है कि मेरठ और आसपास के जिलों की अहमियत देखते हुए एक बड़ा पद यहां के हिस्से में आ सकता है। संभव है कि इसी रणनीति के तहत सत्यप्रकाश अग्रवाल का नाम विधानसभा अध्यक्ष के मजबूत दावेदारों में लिया जा रहा है।
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सब विधायकों का अपना गणित
जिले में संगीत सोम को भाजपा का फायरब्रांड नेता माना जाता है। लक्ष्मीकांत वाजपेयी के चुनाव हारने के बाद उनकी दावेदारी मेरठ जिले से सबसे ज्यादा मजबूत है। वहीं, युवा विधायक सोमेंद्र तोमर के पक्ष में गुर्जर बिरादरी के अलावा उनका शैक्षणिक बैकग्राउंड भी है। दिनेश खटीक भी जातिगत समीकरणों के आधार पर अपना दावा ठोक रहे हैं। सत्यवीर त्यागी को भी कई बड़े नेताओं के कैंप में गिना जाता है। इनमें कई विधायक लखनऊ और दिल्ली में बड़े नेताओं के पास अपनी दावेदारी जता चुके हैं। सभी का यह भी कहना है कि पश्चिम के महत्व को देखते हुए यहां पर पार्टी कई विधायकों को अहम जिम्मेदारियां दे सकती है।
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मेरठ कैंट से सत्यप्रकाश अग्रवाल चार बार से विधायक हैं। वह पहली बार 2002 में विधायक बने थे। इस बार उन्होंने कैंट सीट से लगभग 76 हजार वोटों से जीत हासिल की है। लोकसभा चुनावों में भी मेरठ कैंट से भाजपा को डेढ़ लाख से ज्यादा वोट मिले थे। उन्हें गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अलावा संघ के कई नेताओं का करीबी बताया जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें वैश्य होने का भी लाभ मिल सकता है।
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चुनाव से पहले उनकी उम्र का हवाला देकर टिकट कटने की बात कही जा रही थी। लेकिन बड़ी जीत हासिल करके सत्यप्रकाश अग्रवाल ने अपना लोहा मनवा लिया। दरअसल भाजपा की पहले चरण में पश्चिम से अच्छी हवा चली थी। माना जा रहा है कि मेरठ और आसपास के जिलों की अहमियत देखते हुए एक बड़ा पद यहां के हिस्से में आ सकता है। संभव है कि इसी रणनीति के तहत सत्यप्रकाश अग्रवाल का नाम विधानसभा अध्यक्ष के मजबूत दावेदारों में लिया जा रहा है।
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सब विधायकों का अपना गणित
जिले में संगीत सोम को भाजपा का फायरब्रांड नेता माना जाता है। लक्ष्मीकांत वाजपेयी के चुनाव हारने के बाद उनकी दावेदारी मेरठ जिले से सबसे ज्यादा मजबूत है। वहीं, युवा विधायक सोमेंद्र तोमर के पक्ष में गुर्जर बिरादरी के अलावा उनका शैक्षणिक बैकग्राउंड भी है। दिनेश खटीक भी जातिगत समीकरणों के आधार पर अपना दावा ठोक रहे हैं। सत्यवीर त्यागी को भी कई बड़े नेताओं के कैंप में गिना जाता है। इनमें कई विधायक लखनऊ और दिल्ली में बड़े नेताओं के पास अपनी दावेदारी जता चुके हैं। सभी का यह भी कहना है कि पश्चिम के महत्व को देखते हुए यहां पर पार्टी कई विधायकों को अहम जिम्मेदारियां दे सकती है।