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कैंट बोर्ड के सैनिटरी सुपरवाइजर को सीबीआई कोर्ट ने भेजा जेल
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कैंट बोर्ड के सैनिटरी सुपरवाइजर को सीबीआई कोर्ट ने भेजा जेल
मेरठ/गाजियाबाद। रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए कैंट बोर्ड के सैनिटरी सुपरवाइजर संजय को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने संजय को मंगलवार को गाजियाबाद लिंक कोर्ट में पेश किया था।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि टीम ने सोमवार को कैंट बोर्ड में छापा मारा था। मंगलवार सुबह 4:30 बजे तक चली कार्रवाई के बाद सैनिटरी सुपरवाइजर संजय को गाजियाबाद में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील प्रसाद की कोर्ट में पेश किया गया। कंकरखेड़ा के सुंदरनगर निवासी निशांत पुत्र नरेंद्र ने सीबीआई की गाजियाबाद शाखा में सात अक्तूबर को शिकायत की थी। निशांत ने सीबीआई को बताया कि मेरठ कैंट बोर्ड में संविदा पर सफाईकर्मी की भर्ती निकली थी। निशांत के सहपाठी बटजेवरा निवासी आदित्य और बाबूराम ने आवेदन किया था। भर्ती की जानकारी लेने के लिए तीनों मित्र छावनी बोर्ड कार्यालय में पहुंचे तो उनकी संजय से मुलाकात हुई। संजय ने दोनों से भर्ती के नाम पर 50-50 हजार रुपये की मांग की।
सीबीआई टीम सोमवार दोपहर तीन बजे छावनी बोर्ड कार्यालय में पहुंची। योजना के मुताबिक निशांत ने आदित्य और बाबूराम की नौकरी के लिए रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50-50 हजार रुपये संजय को दिए। एक लाख रुपये हाथ में लेते ही सीबीआई टीम ने संजय को पकड़ लिया और मंगलवार सुबह गाजियाबाद कोर्ट में ले गई।
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बड़ा खेल: 28 लड़कों की नौकरी के लिए 33 लाख का सौदा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। निशांत बीए के छात्र हैं और बटजेवरा निवासी आदित्य और बाबूराम उनके सहपाठी हैं। निशांत के पिता नरेंद्र ने बताया कि कैंट बोर्ड में संविदा सफाईकर्मियों की नियुक्ति की सूचना पर ही तीनों कैंट बोर्ड दफ्तर गए थे। वहां इनकी मुलाकात सैनिटरी सुपरवाइजर संजय कुमार से हुई। संजय से बातचीत में उन्हें पता लगा कि वह सदर में रहता है। इस बीच संजय से उनकी दोस्ती हो गई। निशांत और उसके मित्रों को बताया गया कि 80 कर्मचारियों की नियुक्ति होनी है। 28 कर्मचारियों के लिए प्रति कैंडिडेट 1.20 लाख रुपये लिए जाने हैं। पैसा ऊपर भी बांटा जाएगा। जितने भी परिचित हैं सभी की भर्ती कराई जा सकती हैं। इस बीच तीनों मित्रों ने अपने परिजनों से संपर्क किया। परिजनों ने पैसा देकर नौकरी लगाने की बात से इन्कार कर दिया। इस बीच मामले की शिकायत सीबीआई से की गई।
सीईओ का दावा: कैंट बोर्ड में कोई भर्ती नहीं
मेरठ। छावनी बोर्ड सीईओ ज्योति कुमार ने बताया कि सीबीआई ने कैंट बोर्ड में किसी भी पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है। सैनिटरी विभाग में कार्यरत कर्मचारी संजय कुमार ने कच्चे में भर्ती कराने के नाम पर पैसा लिया। सीबीआई टीम ने रंगे हाथ उसे दबोच लिया है। कैंट बोर्ड के सभी अधिकारियों ने सीबीआई टीम का पूरा सहयोग किया है। मंगलवार सुबह 4:30 बजे टीम संजय कुमार को अपने साथ ले गई है। ब्यूरो
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मेरठ/गाजियाबाद। रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए कैंट बोर्ड के सैनिटरी सुपरवाइजर संजय को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने संजय को मंगलवार को गाजियाबाद लिंक कोर्ट में पेश किया था।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि टीम ने सोमवार को कैंट बोर्ड में छापा मारा था। मंगलवार सुबह 4:30 बजे तक चली कार्रवाई के बाद सैनिटरी सुपरवाइजर संजय को गाजियाबाद में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील प्रसाद की कोर्ट में पेश किया गया। कंकरखेड़ा के सुंदरनगर निवासी निशांत पुत्र नरेंद्र ने सीबीआई की गाजियाबाद शाखा में सात अक्तूबर को शिकायत की थी। निशांत ने सीबीआई को बताया कि मेरठ कैंट बोर्ड में संविदा पर सफाईकर्मी की भर्ती निकली थी। निशांत के सहपाठी बटजेवरा निवासी आदित्य और बाबूराम ने आवेदन किया था। भर्ती की जानकारी लेने के लिए तीनों मित्र छावनी बोर्ड कार्यालय में पहुंचे तो उनकी संजय से मुलाकात हुई। संजय ने दोनों से भर्ती के नाम पर 50-50 हजार रुपये की मांग की।
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सीबीआई टीम सोमवार दोपहर तीन बजे छावनी बोर्ड कार्यालय में पहुंची। योजना के मुताबिक निशांत ने आदित्य और बाबूराम की नौकरी के लिए रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50-50 हजार रुपये संजय को दिए। एक लाख रुपये हाथ में लेते ही सीबीआई टीम ने संजय को पकड़ लिया और मंगलवार सुबह गाजियाबाद कोर्ट में ले गई।
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बड़ा खेल: 28 लड़कों की नौकरी के लिए 33 लाख का सौदा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। निशांत बीए के छात्र हैं और बटजेवरा निवासी आदित्य और बाबूराम उनके सहपाठी हैं। निशांत के पिता नरेंद्र ने बताया कि कैंट बोर्ड में संविदा सफाईकर्मियों की नियुक्ति की सूचना पर ही तीनों कैंट बोर्ड दफ्तर गए थे। वहां इनकी मुलाकात सैनिटरी सुपरवाइजर संजय कुमार से हुई। संजय से बातचीत में उन्हें पता लगा कि वह सदर में रहता है। इस बीच संजय से उनकी दोस्ती हो गई। निशांत और उसके मित्रों को बताया गया कि 80 कर्मचारियों की नियुक्ति होनी है। 28 कर्मचारियों के लिए प्रति कैंडिडेट 1.20 लाख रुपये लिए जाने हैं। पैसा ऊपर भी बांटा जाएगा। जितने भी परिचित हैं सभी की भर्ती कराई जा सकती हैं। इस बीच तीनों मित्रों ने अपने परिजनों से संपर्क किया। परिजनों ने पैसा देकर नौकरी लगाने की बात से इन्कार कर दिया। इस बीच मामले की शिकायत सीबीआई से की गई।
सीईओ का दावा: कैंट बोर्ड में कोई भर्ती नहीं
मेरठ। छावनी बोर्ड सीईओ ज्योति कुमार ने बताया कि सीबीआई ने कैंट बोर्ड में किसी भी पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है। सैनिटरी विभाग में कार्यरत कर्मचारी संजय कुमार ने कच्चे में भर्ती कराने के नाम पर पैसा लिया। सीबीआई टीम ने रंगे हाथ उसे दबोच लिया है। कैंट बोर्ड के सभी अधिकारियों ने सीबीआई टीम का पूरा सहयोग किया है। मंगलवार सुबह 4:30 बजे टीम संजय कुमार को अपने साथ ले गई है। ब्यूरो