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कैंट बोर्ड की लापरवाही से हुआ आरआर माल हादसा
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 27 Sep 2016 02:46 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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बंगला नंबर 210 बी के आरआर माल ध्वस्तीकरण में हुए हादसे की मजिस्ट्रेट जांच पूरी कर जिलाधिकारी को दे दी गयी है। इस जांच रिपोर्ट मेें जांच अधिकारी अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गौरव वर्मा ने हादसे के लिए कैंट बोर्ड की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। जांच अधिकारी के अनुसार यदि बिल्डिंग गिराने से पहले तकनीकी तौर पर प्रशिक्षित अभियंताओं के साथ होमवर्क किया जाता तो हादसा होने से बचाया जा सकता था।
बंगला नंबर 210 बी में बने आरआर मॉल को कोर्ट के निर्देश पर नौ जुलाई की सुबह कैंट बोर्ड की टीम ने गिराया था। प्रशासनिक मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में इस बिल्डिंग के गिराने के दौरान मॉल के पीछे साइड वाली एक दुकान भी ढह गयी थी, जिसके मलबे में दबकर चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि एक गंभीर रुप से घायल हुआ था। इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को मजिस्ट्रेट जांच सौंपी थी।
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गौरव वर्मा ने जांच रिपोर्ट पूरी कर डीएम को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग को गिराने के लिए कैंट बोर्ड ने सही तकनीक का प्रयोग नहीं किया। कैंट बोर्ड के अभियंताओं को भवन गिराने की तकनीक का ज्ञान नहीं था और न ही उन्होंने किसी तकनीकी विशेषज्ञ के साथ भवन गिराने पर होमवर्क किया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि यदि कैंट बोर्ड सही तकनीक का प्रयोग करता और भवन गिराने में जल्दबाजी नहीं करता तो हादसा होने से बचाया जा सकता था।
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बंगला नंबर 210 बी में बने आरआर मॉल को कोर्ट के निर्देश पर नौ जुलाई की सुबह कैंट बोर्ड की टीम ने गिराया था। प्रशासनिक मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में इस बिल्डिंग के गिराने के दौरान मॉल के पीछे साइड वाली एक दुकान भी ढह गयी थी, जिसके मलबे में दबकर चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि एक गंभीर रुप से घायल हुआ था। इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को मजिस्ट्रेट जांच सौंपी थी।
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अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व गौरव वर्मा ने जांच रिपोर्ट पूरी कर डीएम को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग को गिराने के लिए कैंट बोर्ड ने सही तकनीक का प्रयोग नहीं किया। कैंट बोर्ड के अभियंताओं को भवन गिराने की तकनीक का ज्ञान नहीं था और न ही उन्होंने किसी तकनीकी विशेषज्ञ के साथ भवन गिराने पर होमवर्क किया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि यदि कैंट बोर्ड सही तकनीक का प्रयोग करता और भवन गिराने में जल्दबाजी नहीं करता तो हादसा होने से बचाया जा सकता था।
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