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64 दिन बाद अनुज सिंह को मिल गयी जमानत, मलबे में दबकर चार की हुई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Tue, 13 Sep 2016 02:31 PM IST
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अनुज सिंह।
- फोटो : फाइल फोटो
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210 बी आरआर मॉल ध्वस्तीकरण में 64 दिनों से जेल में बंद चले आ रहे कैंट बोर्ड के सीईई अनुज सिंह को जिला जज चंद्रहास राम ने सोमवार को जमानत पर छोड़ने पर आदेश दिए हैं। इस केस के अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट पहले ही रोक लगा चुकी है।
केस हिस्ट्री
नौ जुलाई को हुए इस ध्वस्तीकरण में दीपक शर्मा और उसके पुत्र हनी समेत चार लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। वादी दीपक के भाई जितेंद्र शर्मा ने थाना सदर बाजार पर कैंट बोर्ड के सीईओ राजीव श्रीवास्तव, सीईई अनुज सिंह, एई पीयूष गौतम, जेई अवधेश यादव, योगेश यादव व अरविंद गुप्ता आदि के खिलाफ हत्या में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने 10 जुलाई को अनुज सिंह को जेल भेजा था। बाद में जितेंद्र ने पुलिस को दर्ज कराए बयान और शपथपत्र में इसे हत्या नहीं हादसा बताया। इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शियों राजीव श्रीवास्तव समेत 15 लोगों ने भी शपथपत्र में इसे हादसा बताया। जिसके बाद विवेचक ने इस केस को हत्या (302 आईपीसी) से उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना (304 ए आईपीसी) में तरमीम कर दिया था।
यह हुई सुनवाई
न्यायालय जिला जज चंद्रहास राम की कोर्ट के समक्ष आरोपी पक्ष से केके पाहवा और संजीव कुमार गुर्जर अधिवक्ता ने बहस की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी अनुज सिंह को जमानत का उचित आधार पाते हुए एक-एक लाख के दो जमानती और इतनी ही धनराशि के निजी मुचलके पर छोडे़ जाने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही जमानतदारों के कागजातों का पुलिस से वेरीफिकेशन कराने के निर्देश दिए।
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बोर्ड में जाएगा मामला
गिरफ्तारी के बाद अनुज सिंह को कैंट बोर्ड ने सस्पेंड कर दिया था। अब जमानत मिलने के बाद बहाली के लिए मामला फिर से बोर्ड के सामने जाएगा। कैंट बोर्ड के पीआरओ एमए जफर के मुताबिक 19 सितंबर को बोर्ड की बैठक होगी। इसकी सूचना सदस्यों को दे दी गई है।
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केस हिस्ट्री
नौ जुलाई को हुए इस ध्वस्तीकरण में दीपक शर्मा और उसके पुत्र हनी समेत चार लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। वादी दीपक के भाई जितेंद्र शर्मा ने थाना सदर बाजार पर कैंट बोर्ड के सीईओ राजीव श्रीवास्तव, सीईई अनुज सिंह, एई पीयूष गौतम, जेई अवधेश यादव, योगेश यादव व अरविंद गुप्ता आदि के खिलाफ हत्या में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने 10 जुलाई को अनुज सिंह को जेल भेजा था। बाद में जितेंद्र ने पुलिस को दर्ज कराए बयान और शपथपत्र में इसे हत्या नहीं हादसा बताया। इसके अलावा प्रत्यक्षदर्शियों राजीव श्रीवास्तव समेत 15 लोगों ने भी शपथपत्र में इसे हादसा बताया। जिसके बाद विवेचक ने इस केस को हत्या (302 आईपीसी) से उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करना (304 ए आईपीसी) में तरमीम कर दिया था।
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यह हुई सुनवाई
न्यायालय जिला जज चंद्रहास राम की कोर्ट के समक्ष आरोपी पक्ष से केके पाहवा और संजीव कुमार गुर्जर अधिवक्ता ने बहस की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी अनुज सिंह को जमानत का उचित आधार पाते हुए एक-एक लाख के दो जमानती और इतनी ही धनराशि के निजी मुचलके पर छोडे़ जाने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही जमानतदारों के कागजातों का पुलिस से वेरीफिकेशन कराने के निर्देश दिए।
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बोर्ड में जाएगा मामला
गिरफ्तारी के बाद अनुज सिंह को कैंट बोर्ड ने सस्पेंड कर दिया था। अब जमानत मिलने के बाद बहाली के लिए मामला फिर से बोर्ड के सामने जाएगा। कैंट बोर्ड के पीआरओ एमए जफर के मुताबिक 19 सितंबर को बोर्ड की बैठक होगी। इसकी सूचना सदस्यों को दे दी गई है।