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Meerut News: कहां जाएं कैंसर के बीमार... रेडियोथैरेपी का संकट बरकरार

Fri, 03 Feb 2023 09:46 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Feb 2023 09:46 AM IST
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NA
मेरठ। दिल्ली रोड के रहने वाले रामपाल (49) को गले में कैंसर है। रेडियोथैरेपी करानी है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण निजी अस्पतालों में करवा नहीं पा रहे हैं और सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं है। यह परेशानी अकेले रामपाल की नहीं है, बल्कि उन सभी की है जो कैंसर पीड़ित हैं और चिकित्सक ने उन्हें रेडियोथैरेपी की सलाह दी है। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग जागरूक हों, पर जागरूकता के साथ इलाज की व्यवस्था करना भी जरूरी है, पर इस और ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में सात साल बाद कैंसर के मरीजों की रेडियोथैरेपी शुरू तो हुई, मगर कुछ दिन बाद फिर बंद हो गई। मेडिकल कॉलेज में रेडियो एक्टिव सोर्स कोबाल्ट 60 की मदद से रेडियोथैरेपी होती है। इसकी क्षमता क्षीण हो गई थी, जिस कारण सात मई 2015 से रेडियोथैरेपी नहीं हो रही थी। तभी से हर साल कैंसर के 500 से अधिक लोगों को अलीगढ़ और जीटीबी रेफर किया जा रहा था। कोबाल्ट 60 आने के बाद 19 मई 2022 को रेडियोथैरेपी शुरू की गई। हालांकि इसका विधिवत शुभारंभ 22 मई को कमिश्नर और जिलाधिकारी ने किया। इसके बाद विकिरण अधिकारी डॉ. एके तिवारी 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड के निर्देशानुसार जब तक कोई विकिरण अधिकारी नहीं आएगा, तब तक यह सुविधा नए मरीजों के लिए शुरू नहीं हो पाएगी। प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि नए विकिरण अधिकारी की नियुक्ति के लिए बात चल रही है। नए मरीजों के लिए रेडियोथैरेपी शुरू होने में अभी दिक्कत है।
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मेडिकल में एक माह में लगते हैं 700 रुपये
मेडिकल में एक दिन की सिकाई के 35 रुपये लगते हैं। एक माह में सामान्यत: 20 सिकाई होती हैं। इस तरह एक माह का खर्च 700 रुपये आता है। इतनी सिकाई के निजी अस्पताल एक से डेढ़ लाख रुपये तक लेते हैं।
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तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मरीज
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. उमंग मित्तल ने बताया कि कैंसर के मरीजों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। बेहतर होगा कि स्वस्थ आहार खाएं, धूम्रपान बंद करें, नियमित व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें, शराब का सेवन नहीं करें या कम से कम करें। धूम्रपान और गुटखा आदि के अलावा कैंसर होने की वजह खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट भी है। महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौत का सबसे आम कारण सर्वाइकल कैंसर है। समय पर इलाज न होने की वजह से 15 से 44 वर्ष की आयु की महिलाओं में ये कैंसर मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन रहा है। लेकिन ये ऐसी कैंसर की बीमारी है जिसे ठीक किया जा सकता है।

हौसला और परिवार है संग तो कैंसर से भी जीत जाएंगे जंग
कैंसर, खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही इलाज, हौसला, परिवार का साथ और सकारात्मक सोच हो तो इंसान कैंसर जैसी बीमारी को भी हरा सकता है। मेरठ में ऐसी काफी महिलाएं हैं जो कैंसर को हराकर न सिर्फ सामान्य जीवन जी रही हैं बल्कि कैंसर पीड़ितों को जागरूक भी कर रही हैं। कैंसर को हराने वाली नीता शर्मा, प्रमिला दीक्षित और टीना चड्ढा का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि इन्हें कैंसर है तो एक बार तो बहुत कमजोर पड़ गई थी। लगा सब कुछ खत्म हो गया है। मगर परिवार ने हौसला दिया। इच्छाशक्ति जागी। खानपान और लाइफस्टाइल बदलकर इलाज कराया। फिर सब आसान होता चला गया।


कैंसर का इलाज संभव है
कैंसर को लेकर घबराएं नहीं। कैंसर का इलाज संभव है और तमाम लोगों ने सही इलाज से कैंसर की जंग को जीता भी है। सही जांच और बेहतर इलाज आवश्यक है। - डॉ. सुनील गुप्ता, चेयरमैन, केएमसी कैंसर संस्थान
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