{"_id":"68839d9ed5c19c3a2b0e6581","slug":"business-started-in-the-fruit-and-vegetable-market-after-kanwar-yatra-meerut-news-c-14-1-mrt1005-927257-2025-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांवड़ यात्रा के बाद फल-सब्जी मंडी में कारोबार शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांवड़ यात्रा के बाद फल-सब्जी मंडी में कारोबार शुरू
विज्ञापन
मेरठ। कांवड़ यात्रा के बाद गल्ला, फल एवं सब्जी मंडी का कारोबार फिर से पटरी पर लौटने लगा है। कांवड़ मेले के दौरान 11 दिन में नवीन गल्ला, सब्जी और फल मंडी के कारोबार को 15 करोड़ से अधिक का झटका लगा है। इस अवधि में प्रतिदिन 20 से 50 प्रतिशत ही कारोबार हुआ। हालांकि 25 जुलाई से मंडी का कारोबार फिर से पटरी पर लौटता नजर आ रहा है।
प्रशासन ने 13 जुलाई से मार्ग परिवर्तित कर दिए थे। कामर्शियल वाहनों का शहर में प्रवेश बंद कर दिया गया था। इस कारण मंडी में सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई थी। गल्ला मंडी में दाल, चावल, तेल, घी, खल चूरी, समेत सभी सामान का थोक और फुटकर कारोबार होता है। यहीं से पूरे शहर में ही नहीं बल्कि आसपास के शहर और गांवों तक खाद्य सामग्री पहुंचती है। व्यापारी और मंडी समिति के रिकॉर्ड के मुताबिक कांवड़ यात्रा के दौरान 30 प्रतिशत ही कारोबार हो सका। मंडी में प्रतिदिन करीब दो करोड़ रुपये का खाद्यान्न कारोबार होता है।
व्यापारियों के अनुसार सब्जी मंडी में 13 से 24 जुलाई तक बाहर से आने वाली सब्जी नहीं पहुंची। प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च, परमल आदि सामान मंडी से पूरी तरह गायब हो गए थे। रास्ते बंद होने के कारण स्थानीय किसान भी जैसे तोरई, लोकी, खीरा, बैंगन, आलू, हरी मिर्च आदि समस्त सब्जी लेकर मंडी में नहीं पाए। सब्जी से जुड़ा प्रतिदिन 70 से 85 लाख रुपये का कारोबार होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान लगभग यह लगभग 30 लाख रह गया।
विज्ञापन
इसी प्रकार फल मंडी का भी यही हाल रहा। सामान्य दिनों में फल मंडी में प्रतिदिन 60 से 70 लाख का कारोबार होता है। चूंकि कांवड़ में रास्ते बंद रहे और बाहर से आने वाले फल पहुंच ही नहीं पाए। स्थानीय फल जैसे आम, अमरूद, नाशपाती आदि फल भी कम मात्रा में ही पहुंचे। जिसके कारण फल मंडी का कारोबार गिरकर प्रतिदिन मात्र 25 लाख ही रहा गया।
-- -- --
- कांवड़ यात्रा के दौरान गल्ला मंडी का 70 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ। - मनोज गुप्ता, अध्यक्ष नवीन गल्ला मंडी एसो।
- इस अवधि में सब्जी, फल और खाद्यान की आपूर्ति 10 से 15 प्रतिशत ही रह गई थी। अब व्यवस्था पटरी पर लौट रही है। -कुलदीप सैनी, सचिव मंडी समिति मेरठ।
विज्ञापन
प्रशासन ने 13 जुलाई से मार्ग परिवर्तित कर दिए थे। कामर्शियल वाहनों का शहर में प्रवेश बंद कर दिया गया था। इस कारण मंडी में सामान की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई थी। गल्ला मंडी में दाल, चावल, तेल, घी, खल चूरी, समेत सभी सामान का थोक और फुटकर कारोबार होता है। यहीं से पूरे शहर में ही नहीं बल्कि आसपास के शहर और गांवों तक खाद्य सामग्री पहुंचती है। व्यापारी और मंडी समिति के रिकॉर्ड के मुताबिक कांवड़ यात्रा के दौरान 30 प्रतिशत ही कारोबार हो सका। मंडी में प्रतिदिन करीब दो करोड़ रुपये का खाद्यान्न कारोबार होता है।
विज्ञापन
व्यापारियों के अनुसार सब्जी मंडी में 13 से 24 जुलाई तक बाहर से आने वाली सब्जी नहीं पहुंची। प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च, परमल आदि सामान मंडी से पूरी तरह गायब हो गए थे। रास्ते बंद होने के कारण स्थानीय किसान भी जैसे तोरई, लोकी, खीरा, बैंगन, आलू, हरी मिर्च आदि समस्त सब्जी लेकर मंडी में नहीं पाए। सब्जी से जुड़ा प्रतिदिन 70 से 85 लाख रुपये का कारोबार होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान लगभग यह लगभग 30 लाख रह गया।
विज्ञापन
इसी प्रकार फल मंडी का भी यही हाल रहा। सामान्य दिनों में फल मंडी में प्रतिदिन 60 से 70 लाख का कारोबार होता है। चूंकि कांवड़ में रास्ते बंद रहे और बाहर से आने वाले फल पहुंच ही नहीं पाए। स्थानीय फल जैसे आम, अमरूद, नाशपाती आदि फल भी कम मात्रा में ही पहुंचे। जिसके कारण फल मंडी का कारोबार गिरकर प्रतिदिन मात्र 25 लाख ही रहा गया।
- कांवड़ यात्रा के दौरान गल्ला मंडी का 70 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ। - मनोज गुप्ता, अध्यक्ष नवीन गल्ला मंडी एसो।
- इस अवधि में सब्जी, फल और खाद्यान की आपूर्ति 10 से 15 प्रतिशत ही रह गई थी। अब व्यवस्था पटरी पर लौट रही है। -कुलदीप सैनी, सचिव मंडी समिति मेरठ।